बंगाल में चुनाव आयोग ने चलाया चाबुक...
वोटिंग से पहले क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले नेताओं का सुरक्षा 'घेरा' हटेगा !
बंगाल चुनाव में पहले चरण की वोटिंग से पहले चुनाव आयोग बड़ा फैसला लेते हुए जिन नेताओं पर अपराधिक मुकदमे हैं, उन सबकी सरकारी सुरक्षा हटाने का आदेश दिया है.
चुनाव आयोग ने पूरे पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वो आपराधिक मामलों के आरोपी नेताओं की सुरक्षा तुरंत हटाएं, और इसकी रिपोर्ट सूचित करें.
ये निर्देश मालदा जिले में जजों को बंधक बनाने की घटना के बाद दिए गए हैं. मालदा की घटना को लेकर कहा जा रहा था कि बंगाल के नेता सरकारी सुरक्षा का इस्तेमाल लोगों को धमकाने के लिए कर रहे थे. यानी सुरक्षा का दुरुपयोग किया जा रहा है. सोचने वाली बात ये है कि जब मालदा में जजों को जरूरत हुई तो उन्हें सुरक्षा नहीं मिली, लेकिन क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले कई नेता VIP सिक्योरिटी लेकर घूम रहे हैं. चुनाव आयोग का नया आदेश सभी दलों के नेताओं पर लागू है. चाहे वो जमानत पर हों या पैरोल पर हों.
ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप...
- चुनाव की घोषणा से पहले पश्चिम बंगाल सरकार 976 नेताओं को सरकारी पैसे पर सुरक्षा मुहैया करा रही थी.
- इनमें से 832 नेता सीधे तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए थे, जबकि बाकी 144 नेता TMC समर्थक थे.
- 976 लोगों की सुरक्षा में बंगाल पुलिस के 2,185 जवानों को तैनात थे. यानी हर नेता की सुरक्षा के लिए 2 पुलिसवाले मिले थे.
चुनाव आयोग के आदेश के बाद इनकी सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है. जो दागियों की छवि है, उनकी सुरक्षा हटानी पड़ेगी. अब बंगाल में दागी नेताओं के बारे में भी जानना चाहिए. ताकि ये अंदाजा लग सके कि सुरक्षा पाने वालों में से कितने आपराधिक छवि वाले हैं.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म यानी ADR की रिपोर्ट के मुताबिक 291 मौजूदा विधायकों में से 136 यानी 47% के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
- कई मंत्रियों पर आपराधिक मुकदमे
- इनमें से 109 यानी कुल विधायकों में से 37% के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
- 8 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ हत्या का केस दर्ज है.
- जबकि 29 के खिलाफ़ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है.
- 22 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ महिला विरोधी अपराधों के मुकदमें दर्ज हैं.
सोचिए, पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऐसे-ऐसे लोग बैठे हुए हैं. इन विधायकों के साथ सुरक्षाकर्मी भी तैनात होंगे. आपराधिक केस वाले कुछ विधायक मंत्री भी हैं. ममता सरकार के करीब 10 मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.हम नेताओं को सरकारी सुरक्षा मिलने के खिलाफ नहीं हैं. Threat Perception और Intelligence Input के हिसाब से किसी को सुरक्षा मिलना गलत नहीं है. लेकिन जो अपराधी हैं, उन्हें सुरक्षा क्यों मिलनी चाहिए. उनसे तो आम लोगों को सुरक्षा मिलनी चाहिए क्योंकि वो जेल से बाहर रहेंगे तो वो आम लोगों के लिए खतरा बनेंगे.
मालदा के 'गुनहगारों' का बैकग्राउंड
मालदा में जजों को बंधक बनाने वाले 2 मास्टरमाइंड राजनीति से जुड़े हुए हैं. AIMIM का नेता मोफक्करुल इस्लाम 2021 का चुनाव लड़ चुका है. वहीं दूसरा मास्टरमाइंड ISF का नेता शाहजहां अली कादरी इस बार चुनाव में उतर रहा है. संभव है कि शाहजहां अली चुनाव में जीत भी जाए. तो क्या अपराध के आरोपों के बाद भी उसे सुरक्षा मिलनी चाहिए? जो लोग जजों को बंधक बना लेते हैं, वो सरकारी सुरक्षा मिलने के बाद क्या करेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. जब पुलिस उनके साथ होगी, तब तो वो और लोगों पर धौंस जमाएंगे. सुरक्षा का दुरुपयोग करेंगे.


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