नहीं चली इनकी मर्ज़ी...
बस के गेट पर लटके, सड़क पर लोट लगाई, फिर भी उठा ले गयी पुलिस !
सड़क पर लेटे और पसीने से तर-ब-तर राहुल गांधी को जबरन उठाते हुए दिल्ली पुलिस के जवान, प्रियंका गांधी को खींचती हुईं महिला सुरक्षाकर्मी, कई कांग्रेसी सांसदों को बस में बैठाते पुलिसकर्मी. नीट पेपर लीक मामले पर आज कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन का जो 'मंजर' रहा वो यही था. पहली बार कांग्रेस की टॉप लीडरशिप किसी मुद्दे पर इस हद तक मुखर होकर सरकार का विरोध करने सड़क पर उतरी. खबरें हैं कि केंद्र सरकार ने कांग्रेस के ऐसे प्रदर्शन पर आपत्ति जताई है. केंद्र का मानना है कि कांग्रेस ऐसा करके एक गलत परंपरा शुरू कर रही है.
पीएम आवास के पास ऐसा धरना-प्रदर्शन हटाने के लिए कुछ ही देर में दिल्ली पुलिस अपनी पूरी तैयारी से पहुंच गई. पहले सभी नेताओं से धरना शांतिपूर्वक खत्म करने को कहा गया. इस पर कोई माना नहीं. राहुल गांधी ने तो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर और भी लोगों को धरना स्थल पर पहुंचने का आह्वान कर दिया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए पहले अन्य नेताओं को जबरन बस में बैठाकर वहां से हटाया. इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी जबरन हटाया जाने लगा.
इस दौरान राहुल जमीन पर ही लेट गए. इस पर दिल्ली पुलिस के जवान उन्हें जबरन उठाने लगे. इस दौरान हुए बल-प्रयोग में राहुल के कपड़े भी अस्त-व्यस्त हो गए. पसीने में भीगे राहुल किसी भी कीमत पर वहां से हटने को तैयार नहीं हुए तो उन्हें खींचकर वहां से बस के अंदर किया गया. राहुल गांधी का ये रूप लोगों ने पहली बार देखा. सफेद रंग की हाफ टीशर्ट और पैंट पहने राहुल गांधी पूरे बगावती तेवर में नजर आए. खबर है कि राहुल को हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया है.
यही हाल प्रियंका गांधी का रहा. वो भी धरना स्थल से हटने को राजी नहीं थीं. उन्हें भी बमुश्किल बस तक ले जाया गया तो वे वहीं बस के गेट पर लटक गईं. उन्हें भी बल-प्रयोग कर बस के अंदर किया गया. अपने नेताओं के साथ ऐसा बर्ताव देख बाकी कांग्रेस नेता भी भड़क गए. सभी लोग केंद्र सरकार पर आरोप लगाने लगे. लेकिन भारी पुलिस बल के आगे किसी की न चली.
पेपर लीक मामले में मंगलवार को कांग्रेस ने हल्ला बोला. देश की सबसे सुरक्षित जगह पीएम आवास से कुछ दूरी पर मंगलवार दोपहर कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप अचानक इकट्ठी हो गई. लोक कल्याण मार्ग के पास इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार समेत कई नेता नारेबाजी करने लगे. सांकेतिक रूप से उन्होंने अपने हाथों को भी किसी प्लास्टिक की रस्सीनुमा चीज से बांध लिया. उनकी मांग संसद में नीट पेपर लीक पर चर्चा की थी.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ देर बाद सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन प्रदर्शन कर रहे नेताओं से बात करने पहुंचे. कुछ देर की मान-मनौव्वल के बाद दोनों लौट गए. उनमें क्या बात हुई, ये सब जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर बताया.
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी से अनुरोध किया गया कि वे अपना धरना समाप्त करें, क्योंकि यह स्थल धरने का स्थल नहीं है और यहां पर धरना करने से लोगों को असुविधा भी पहुंच रही है. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार संसद में NEET और उससे संबंधित आंदोलन के साथ जुड़े सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए मान जाती है, तो वह अपना धरना तुरंत समाप्त कर देंगे. शीर्ष नेताओं से मशवरा करने के बाद उनकी ये मांग मान ली गई. जब राहुल को बताया गया तो वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ गए. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी का व्यवहार लोकतंत्र के उसूलों से मेल नहीं खाता है.
इस धरने-प्रदर्शन में बाद में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पहुंच गए. उनके साथ कुछ और सपा के नेता थे. नारेबाजी कर रहे अखिलेश को भी दिल्ली पुलिस बस में बैठाकर ले गई.




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