मोहन यादव के सीनियर मिनिस्टर प्रहलाद पटेल ने खोले दिल के राज...
टिकट कटने या पद से हटाए जाने का डर नहीं है, राजनीति पद से नहीं, संगठन से चलती है: श्री पटेल
उमरिया। मध्य प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का एक बयान प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। उमरिया के एक दिवसीय दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें किसी भी पद का मोह नहीं है और यदि पार्टी चाहे तो वे आज ही जिम्मेदारी छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनका यह बयान उस समय आया, जब उनसे भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का उदाहरण देते हुए सवाल किया गया कि क्या उन्हें भी कभी टिकट कटने या पद से हटाए जाने का डर लगता है।
प्रहलाद पटेल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्हें किसी तरह का भय नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में नेता पद के लिए राजनीति नहीं करते, बल्कि संगठन और विचारधारा के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा, "हम तो चाहते हैं कि इससे मुक्त हो जाएं। इसमें डरने जैसी क्या बात है? भाजपा में कोई पद के लिए नहीं जीता। यदि पार्टी कहे तो हम कभी भी नमस्ते करने के लिए तैयार हैं। ऐसे सवाल कांग्रेस के नेताओं से पूछिए, क्योंकि हमारी राजनीति पद से नहीं, संगठन से चलती है।"
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब मध्य प्रदेश की राजनीति में लगातार संगठन और सरकार के स्तर पर बदलावों की चर्चा होती रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रहलाद पटेल का यह बयान भाजपा की उस कार्यशैली को रेखांकित करता है, जिसमें संगठन को सर्वोपरि माना जाता है। हालांकि विपक्ष इस बयान को अलग-अलग नजरिए से देख रहा है, लेकिन भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी में जिम्मेदारियां बदलना सामान्य प्रक्रिया है और कार्यकर्ता किसी भी भूमिका में काम करने के लिए तैयार रहते हैं।
प्रहलाद सिंह पटेल भाजपा के अनुभवी और कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। इसके बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा में सक्रिय रहे और धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे। वे पांच बार सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें केंद्र की राजनीति से राज्य की राजनीति में भेजा, जहां वे वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 1989 में पहली बार सांसद बनने वाले प्रहलाद पटेल लंबे समय से भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
अपने दौरे के दौरान मंत्री ने केवल राजनीतिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने उमरिया जिले के कटारिया ग्राम में मछडार नदी और उमड़ार नदी के उद्गम स्थल पर पूजा-अर्चना की और लोगों से प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण में भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी नदियां और प्राकृतिक जल स्रोत ग्रामीण जीवन की आधारशिला हैं। यदि समय रहते इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
प्रहलाद पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में वर्षा जल का अधिक से अधिक हिस्सा जमीन के भीतर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं होगा, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने स्वयं को नर्मदा परिक्रमा करने वाला बताते हुए कहा कि यदि छोटी नदियों में पूरे वर्ष पानी बनाए रखने की दिशा में काम किया जाए तो बड़ी नदियों में भी जल प्रवाह बेहतर बना रहेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि छोटी नदियों को बारहमासी बनाने के लिए कंक्रीट के निर्माण पर अधिक निर्भर रहने के बजाय उनके किनारों पर स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएं। उनके अनुसार, पहले जिन प्राकृतिक वृक्षों की मौजूदगी से जल स्रोत सुरक्षित रहते थे, उन्हीं प्रजातियों को फिर से बढ़ावा देना चाहिए। इससे न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम करने में मदद मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि आज शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। ऐसे में छोटी नदियों, तालाबों और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने गांवों के जल स्रोतों को बचाने के लिए आगे आएं और वृक्षारोपण को जन आंदोलन का रूप दें।
इस कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अनुजा पटेल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह, आशुतोष अग्रवाल, बांधवगढ़ एसडीएम अंबिकेश प्रताप सिंह, मिथिलेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प भी लिया।
उमरिया दौरे के दौरान प्रहलाद पटेल का राजनीतिक बयान और जल संरक्षण पर दिया गया संदेश दोनों ही चर्चा का विषय बने रहे। एक ओर उन्होंने साफ किया कि भाजपा में पद से अधिक संगठन का महत्व है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने जल संकट से निपटने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण को सबसे प्रभावी उपाय बताया। उनके इस दौरे ने राजनीतिक संदेश के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण संदेश दिया।



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