G NEWS 24 : दतिया उपचुनाव में बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय !

कई दिग्गज अब तक प्रचार से दूर...

दतिया उपचुनाव में बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय !

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, लेकिन इस बार चुनावी माहौल में सबसे अधिक चर्चा दोनों दलों के स्टार प्रचारकों की सीमित मौजूदगी को लेकर हो रही है। आमतौर पर उपचुनावों में बड़े नेताओं की जनसभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान राजनीतिक माहौल को गति देते हैं, लेकिन दतिया में अब तक कई प्रमुख नेताओं ने चुनावी मैदान में सक्रियता नहीं दिखाई है। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अब तक दतिया में चुनाव प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं। 

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह केवल कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन कार्यक्रम में शामिल हुए थे, इसके बाद उन्होंने प्रचार अभियान में भाग नहीं लिया। इसके अलावा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा तथा विधायक आरिफ मसूद सहित कई वरिष्ठ नेताओं की भी अब तक कोई बड़ी चुनावी सभा नहीं हुई है। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अंतिम चरण के प्रचार में दतिया पहुंच सकते हैं। दूसरी ओर भाजपा के भी कई प्रमुख नेता अब तक प्रचार अभियान से दूर रहे हैं। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, वीरेंद्र खटीक, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, मंत्री प्रह्लाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव तथा पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह जैसे नेताओं की सभाएं अभी तक नहीं हुई हैं। फिलहाल भाजपा स्थानीय नेतृत्व और संगठन के कार्यकर्ताओं के माध्यम से बूथ स्तर पर प्रचार अभियान को मजबूत करने में जुटी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से पहले के अंतिम तीन दिन चुनावी दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण होंगे। संभावना जताई जा रही है कि दोनों प्रमुख दल अंतिम चरण में अपने प्रभावशाली नेताओं को मैदान में उतारकर जनसभाओं और रोड शो के माध्यम से चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर सकते हैं।

फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों ही स्थानीय मुद्दों को चुनाव प्रचार का प्रमुख आधार बनाए हुए हैं। सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, विकास कार्य तथा क्षेत्रीय समस्याएं प्रचार अभियान के केंद्र में हैं। भाजपा सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को जनता के बीच रख रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और जनहित के मुद्दों को लेकर मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। दतिया विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक महत्व काफी अधिक माना जा रहा है। ऐसे में अंतिम चरण में स्टार प्रचारकों की संभावित एंट्री चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना सकती है। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों की चुनावी गतिविधियों और दोनों दलों की रणनीति पर टिकी हैं।

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