राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में भाजपा को बड़ा झटका लगा है...
मंडल अध्यक्ष की कार्यशैली से नाराज भाजपा के 111 नेताओं और कार्यकर्ताओं का सामूहिक इस्तीफा !
डोंगरगढ़ (राजनांदगांव)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है। पार्टी के 111 नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस्तीफे की वजह शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोआना की कार्यशैली और कार्यकर्ताओं की कथित उपेक्षा को बताया गया है।
सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल हुई तेज
इस्तीफे से जुड़ा पत्र सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और भाजपा संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस्तीफा देने वालों में पार्टी के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी, मंडल एवं जिला स्तर के नेता, विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों के सदस्य, पूर्व पार्षद, बूथ अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हैं। इतने बड़े स्तर पर एक साथ इस्तीफे सामने आने से डोंगरगढ़ की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
कार्यकर्ताओं ने लगाया उपेक्षा का आरोप
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सामूहिक इस्तीफे में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले काफी समय से संगठन के भीतर उनकी अनदेखी की जा रही थी। उनका आरोप है कि शहर मंडल अध्यक्ष की कार्यशैली के कारण समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान और महत्व नहीं मिल रहा था। कई बार संगठन के वरिष्ठ नेताओं तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष लगातार बढ़ता गया और आखिरकार उन्हें सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लेना पड़ा।
इस्तीफा देने वालों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम किया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में संगठन में काम करना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं की भागीदारी कम हो गई है और कुछ लोगों तक ही संगठन सीमित होकर रह गया है।
शीर्ष नेतृत्व को भेजा गया इस्तीफा
सामूहिक इस्तीफे का पत्र भाजपा के जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री पवन साय और राष्ट्रीय नेतृत्व को संबोधित किया गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शहर मंडल अध्यक्ष की कार्यशैली और कार्यकर्ताओं की अनदेखी से आहत होकर सभी लोग भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि संगठन की मजबूती कार्यकर्ताओं के सम्मान और संवाद पर निर्भर करती है। यदि कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जाएगी तो संगठन कमजोर होगा। इसी भावना के साथ सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंपने का फैसला लिया।
कई पदाधिकारी भी शामिल
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस्तीफा देने वालों में केवल सामान्य कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि पार्टी के विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारी निभा चुके कई नेता भी शामिल हैं। इनमें वर्तमान और पूर्व मंडल पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों के सदस्य, पूर्व पार्षद, बूथ अध्यक्ष और शक्ति केंद्र प्रभारी शामिल बताए गए हैं। इससे यह मामला केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि संगठन के भीतर व्यापक असंतोष का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी राजनीतिक दल में बड़ी संख्या में अनुभवी कार्यकर्ताओं का एक साथ इस्तीफा संगठन के लिए चिंता का विषय होता है। यदि समय रहते नाराज नेताओं से संवाद नहीं किया गया तो इसका असर भविष्य की चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
इतने बड़े घटनाक्रम के बावजूद भाजपा जिला संगठन या शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोआना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी नेतृत्व की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं या फिर नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने की कोई कोशिश की जाएगी।संगठन के स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की परंपरा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेताओं की ओर से डोंगरगढ़ पहुंचकर नाराज कार्यकर्ताओं से चर्चा किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
सामूहिक इस्तीफे का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इस घटनाक्रम पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साध रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थक संगठन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में इस तरह के घटनाक्रम का असर तेजी से फैलता है और इससे पार्टी की सार्वजनिक छवि पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए भाजपा नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की होगी।
स्थानीय राजनीति पर पड़ सकता है असर
डोंगरगढ़ क्षेत्र राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं होती है तो इसका असर आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी रणनीति पर भी देखने को मिल सकता है। संगठन की ताकत बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं पर टिकी होती है और जब बूथ स्तर के पदाधिकारी भी इस्तीफा देने वालों में शामिल हों, तो स्थिति और गंभीर मानी जाती है।हालांकि यह भी संभव है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने की कोशिश करे और नाराज नेताओं को फिर से संगठन से जोड़ने का प्रयास करे।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर भाजपा के प्रदेश और जिला नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। यदि पार्टी नेतृत्व जल्द संवाद स्थापित करता है तो विवाद सुलझने की संभावना बनी रह सकती है। वहीं, यदि नाराज नेताओं की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह मामला आगे और बड़ा रूप ले सकता है। राजनांदगांव जिले की राजनीति में यह सामूहिक इस्तीफा फिलहाल सबसे बड़ी चर्चाओं में शामिल है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि भाजपा इस असंतोष को दूर करने में कितनी सफल होती है और इसका स्थानीय संगठन पर कितना प्रभाव पड़ता है।



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