नियमों के अनुसार कंपोजिट शराब दुकान के अलावा अन्य स्थानों पर शराब का विक्रय प्रतिबंधित है...
देवरी शराब दुकान पर गंभीर सवाल,गांव-गांव शराब बिक्री से ग्रामीणों में आक्रोश !
देवरीकलां। देवरी क्षेत्र में शराब बिक्री को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन की नई आबकारी नीति की आड़ में देवरी की सरकारी शराब दुकान के माध्यम से आसपास के गांवों में खुलेआम शराब की बिक्री करवाई जा रही है,जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार देवरी शराब ठेकेदार द्वारा बीना वाराह,समनापुर,चीमाढाना,सिंगपुर,डोंगर सलैया सहित दर्जनों गांवों में एजेंटों के माध्यम से शराब पहुंचाई जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों को कथित “अनुमति पत्र” देकर 10 हजार से 50 हजार रुपये तक लेकर गांवों में शराब बेचने का अधिकार दिया जा रहा है। जबकि आबकारी नियमों के अनुसार निर्धारित कंपोजिट शराब दुकान के अलावा अन्य स्थानों पर शराब का विक्रय प्रतिबंधित है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में शराब की आसान उपलब्धता से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। महिलाओं ने भी इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शराबखोरी के कारण पारिवारिक विवाद और घरेलू हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। समाज में अशांति का माहौल बनने लगा है,लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
शक्तिपुत्र सदस्यों सहित डोगरसलैया,चीमाढाना,के ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि देवरी शराब दुकान पर निर्धारित रेट लिस्ट तक प्रदर्शित नहीं की गई है,जिससे ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि शराब की बोतलों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत ली जा रही है,लेकिन शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग की उदासीनता के कारण यह पूरा खेल फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आबकारी अधिकारी शायद ही कभी कार्यालय में उपलब्ध रहते हैं और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसी वजह से अवैध बिक्री और अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि गांवों में हो रही कथित अवैध शराब बिक्री की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा शराब दुकान पर निर्धारित रेट सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराई जाए,ताकि उपभोक्ताओं का शोषण न हो और क्षेत्र में कानून व्यवस्था एवं सामाजिक वातावरण सुरक्षित रह सके।


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