लेकिन इससे होगा क्या,कुछ भी नहीं !
कॉकरोच जनता पार्टी : विदेशी टूल किट और युवाओं को भ्रमित करने की साजिश...
भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे मजबूत लोकतंत्र माना जाता है। यहां जनता अपने मत से सरकार बनाती है और अपने विवेक से सत्ता परिवर्तन भी करती है। लेकिन समय-समय पर कुछ ऐसी ताकतें सामने आती रही हैं जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास करने के बजाय भ्रम, अराजकता और दुष्प्रचार के सहारे देश की स्थिरता को कमजोर करने का प्रयास करती हैं। आजकल “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से चल रही एक नई डिजिटल नौटंकी भी इसी प्रकार की साजिश का हिस्सा दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि इस तथाकथित अभियान के पीछे कुछ स्वयंभू सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और रीलबाज चेहरे सक्रिय हैं, जिनके तार देश के बाहर बैठे लोगों से जुड़े हुए हैं। कोई अमेरिका में बैठकर भारत के खिलाफ डिजिटल नैरेटिव गढ़ रहा है, कोई जर्मनी से सोशल मीडिया एजेंडा चला रहा है, तो कोई दुबई से इस पूरे नेटवर्क को हवा देने में लगा है। इनका उद्देश्य लोकतांत्रिक संवाद नहीं, बल्कि भारत की युवा शक्ति को भड़काकर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ भ्रम का माहौल तैयार करना प्रतीत होता है।
सोशल मीडिया के इस दौर में टूल किट राजनीति कोई नई बात नहीं रही। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां विदेशी धरती से संचालित डिजिटल कैंपेन के माध्यम से भारत की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश हुई। “कॉकरोच जनता पार्टी” भी उसी कड़ी का नया अध्याय मानी जा रही है। पहले युवाओं को सिस्टम विरोधी नारों और वायरल रीलों के जरिए आकर्षित किया गया, फिर उन्हें यह विश्वास दिलाने का प्रयास हुआ कि देश में केवल अराजक आंदोलन ही परिवर्तन ला सकते हैं।
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुछ युवा भी भावनाओं और आक्रोश में आकर इस भ्रम जाल का हिस्सा बनने लगे। लेकिन जैसे-जैसे इस अभियान की वास्तविकता सामने आने लगी, वैसे-वैसे इसकी विश्वसनीयता भी खत्म होती चली गई। लोगों को समझ आने लगा कि यह कोई वैचारिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक संगठित डिजिटल टूल किट है, जिसे कुछ राजनीतिक हितों और विदेशी फंडिंग के सहारे खड़ा करने की कोशिश की गई।
जब इस अभियान की परतें खुलनी शुरू हुईं, तब यह भी स्पष्ट होने लगा कि इसके पीछे कौन-कौन से राजनीतिक और वैचारिक समूह सक्रिय हैं। अब वही युवा, जो शुरुआत में इससे प्रभावित हुए थे, तेजी से इससे दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि भारत का युवा भावुक जरूर है, लेकिन देशविरोधी एजेंडों का स्थायी समर्थक कभी नहीं हो सकता। वह सच और झूठ में अंतर समझता है और समय आने पर सही निर्णय भी लेता है।
सरकार द्वारा ऐसे संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सख्ती दिखाना राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के दृष्टिकोण से आवश्यक कदम माना जा रहा है। यदि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल युवाओं को भड़काने, समाज में अराजकता फैलाने या लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने के लिए किया जाता है, तो उस पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सत्ता प्राप्ति के लिए देश के युवाओं को सड़क पर उतारना उचित राजनीति है? क्या लोकतंत्र में विचारों की लड़ाई लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर नहीं लड़ी जानी चाहिए? भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव और जनमत है, न कि विदेशी टूल किट, डिजिटल प्रोपेगेंडा और अराजक अभियानों का सहारा।
भारत का युवा देश निर्माण की शक्ति है, विनाश की नहीं। उसे यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर परोसा जाने वाला हर नैरेटिव सच नहीं होता। राष्ट्रहित सर्वोपरि है और किसी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर देश की स्थिरता, एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान होना चाहिए।
इस टूल किट के लाखों followers में से अधिकांश पाकिस्तानी, बांग्लादेशी,मिडिल ईस्ट और अमेरीका से हैं। जहां से इस account को चलाया जा रहा है,कसद वही है, भारत के GenZ को भड़काना और सड़कों पर लाना !
लेकिन इससे होगा क्या !
सिर्फ सोशल मीडिया पर हवा बनाने से चुनाव नहीं जीते जाते हैं, इन्हें इतनी सी बात समझ नहीं आती की सोशल मीडिया भी तभी काम करता है। जब आपके नेता जनता मे स्वीकार्यता हो। आपके नेताओ काम तो ऐसे हैं कि केंद्र सरकार पेट्रोल के दाम 3/- बढ़ाती है तो इनके मुख्यमंत्री 5/- बढ़ा देते हैं और कहते हैं मोदी ने पेट्रोल महंगा कर दिया है. जैसे जनता को तो कुछ पता ही नहीं है।
अरे भाई जब आपका प्रोडक्ट ही नालायक है, तो चाहे लाख Propaganda फैला के हवाबाजी करते रहो होना कुछ नहीं है। 2019 मे कॉंग्रेस ने राहुल की इमेज बनाने में 500 करोड़ खर्च किए और हुआ क्या ! GenZ वाली नौटंकी 2024 के चुनाव में खूब फैलाई गई क्या हुआ ! अभी बंगाल चुनाव में कितनी अफवाहें फैलाई गईं क्या हुआ!
भाई जो जमीन पर मजबूत हैं उन्हें हवाबाजी से हराने के सिर्फ सपने देखे जा सकते हैं बाकी अगर नेपाल -बांग्लादेश की तरह कुछ करने का इरादा है तो हमारे पास जांचा परखा और आजमाया हुआ स्प्रे है। जो काॅकरोच जैसे गंदीगी का जड़ से सफाया कर देता है।


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