G News 24 : 'बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर हो विचार': सुप्रीम कोर्ट

 आवारा कुत्तों के मामले में SC का आदेश...

 'बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर हो विचार': सुप्रीम कोर्ट 

मंगलवार (19 मई, 2026) को कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में आदेश देते हुए यह भी कहा कि गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार हो. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों को बरकरार रखा है और फिलहाल मामले की सुनवाई बंद कर दी गई है. कोर्ट ने कहा है कि वह 17 नवंबर को हर राज्य की कंप्लायंस रिपोर्ट देखेगा. आवारा कुत्तों के मामले में नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा कि उसके फैसले का सही से पालन नहीं किया गया और इसे वह कोर्ट की अवमानना के तौर पर देखता है. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स का पालन करना चाहिए था. तब ऐसी स्थिति नहीं बनती. यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और इकोलॉजिकल बैलेंस का मामला है. कोर्ट ने कहा, 'हमारे 7 नवंबर, 2025 के आदेश का राज्यों ने सही से पालन नहीं किया. इसे अवमानना की तरह देखा जाएगा.'

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों, बुजुर्गों को कुत्ते काट रहे हैं. हम ऐसी स्थिति से आंखें नहीं मूंद सकते. उन्होंने कहा कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के खिलाफ सभी आवेदन हम खारिज कर रहे हैं.

कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई बंद कर दी है, लेकिन कहा है कि वह 17 नवंबर को हर राज्य की कंप्लायंस रिपोर्ट देखेगा. कुल मिला कर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेशों को बरकरार रखा है. इसमें हर सार्वजनिक परिसर से कुत्तों को बाहर करना भी शामिल है. कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ अहम निर्देश दिए हैं, वो ये हैं-

  1. राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र ABC फ्रेमवर्क का पालन करें.
  2. हर शहर में इसके लिए सेंटर हो.
  3. कर्मचारियों को उचित ट्रेनिंग दी जाए.
  4. एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध करवाई जाए.
  5. NHAI हाई वे से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए कदम उठाए.
  6. गौशाला बनाई जाए. इन्हें वहां भेजा जाए.
  7. गंभीर रूप से बीमार और खतरनाक कुत्तों को मारने पर विचार हो.
सही से लागू हों आदेश ...
अदालत ने अपने आदेश में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को लेकर कहा कि राज्य केवल चुपचाप तमाशा नहीं देख सकता और कोर्ट भी जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज नहीं कर सकता. बच्चे, बुज़ुर्ग सब कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं. SC ने कहा कि उसके आदेश को सही तरीके से लागू करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई FIR या क्रिमिनल शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी. 

तेजी से बढ़ रहीं कुत्तों के काटने की घटनाएं ...
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को सही तरीके से लागू करने में गंभीर लापरवाही हुई है, जिसके चलते ये समस्या बढ़ी. खासतौर से कुत्तों के काटने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है. राजस्थान के श्री गंगानगर में केवल एक महीने में 1084 लोगों को कुत्तों ने काटा. छोटे बच्चों को बहुत गंभीर चोटें आईं. वहीं तमिलनाडु में पिछले 4 महीनों में लगभग 2 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज  किए गए. 

सुप्रीम कोर्ट ने आज कुत्तों को लेकर डॉग लवर्स की मांग को भी नकारा ...
सुप्रीम कोर्ट ने आज कुत्तों को लेकर डॉग लवर्स की स्कूल,कॉलेज, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक जगहों से कुत्तो को हटाने के आदेश में बदलाव की मांग खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि उसका यह आदेश बरकरार रहेगा और इन जगहों से हटाए गए कुत्तों को वैक्सीनेशन के बाद भी वापस नहीं लिया जाएगा. SC ने कहा कि सम्मान के साथ जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि लोग बिना कुत्तों के काटने या हमले के डर के सुरक्षित जीवन जी सकें. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश का पलान न करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.   

हमारे आदेशों के पालन में कदम उठा रहे अधिकारियों को उनका काम करने दिया जाए. उनके खिलाफ कोई अदालत अपरिहार्य स्थिति में ही सुनवाई करे. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देशभर से सामने डॉग बाइट के मामलों का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा, 'डॉग बाइट की समस्या चिंता में डालने वाली है. राजस्थान के गंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा से हमें चौंकाने वाले आंकड़े मिले हैं. तमिलनाडु समेत दूसरे राज्यों से भी ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं.' कोर्ट ने कहा कि  दिल्ली के IGI एयरपोर्ट में भी जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट की घटनाएं हुई हैं. विदेशी पर्यटकों को भी कुत्तों ने काटा है. देशभर में रैबीज से मौत की कई घटनाएं हुई हैं.


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