G News 24 : मोहब्बत का मुखौटा और साज़िश का समंदर नेछीन ली एक उभरती गायिका की जिंदगी !

  सिंगर इंदर कौर मर्डर केस की पूरी कहानी...

मोहब्बत का मुखौटा और साज़िश का समंदर नेछीन ली एक उभरती गायिका की जिंदगी !

वो  पंजाब की मिट्टी से उपजी एक ऐसी आवाज़ जिसने बहुत कम उम्र में लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली थी, लेकिन किसे पता था कि कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ रही उस मासूम को अपनों के ही भेष में छिपे भेड़िए निगल जाएंगे। उसके सुरों से घर का आंगन और महकती उम्मीदों ने लुधियाना के जमालपुर की तंग गलियों में सुबह रियाज़ की तान और हारमोनियम की आवाज़ से शुरू होती थी। वह आवाज़ थी 29 वर्षीय इंदर कौर उर्फ यशिंदर कौर की उस आवाज को किसी की नजर लग गई और अब वह अब खामोश हो चुकी है। 

उसके 'सोहना लगदा' और 'सोने दी चिड़ी' जैसे गानों से उसने पंजाब के युवाओं के दिलों में अपनी एक ख़ास जगह बना ली थी। जब वह 'किसान एंथम 2' में अपनी बुलंद आवाज़ देती, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। घर में इंदर सबकी लाडली थी। भाई के लिए वह सिर्फ एक बहन नहीं, बल्कि उसका गुरूर थी। माँ-बाप की आँखों का तारा इंदर बेहद सरल और हंसमुख स्वभाव की थी। कामयाबी उसके कदम चूम रही थी, लेकिन उसके पैर हमेशा ज़मीन पर ही रहे। वह अपनी माँ से अक्सर कहती, "बेबे, देखना एक दिन मैं पूरी दुनिया में पंजाब का नाम रोशन करूँगी। 

अपने इस छोटे से घर को खुशियों से भर दूँगी।" माँ उसकी नज़र उतारती और कहती, "धीये (बेटी), तेरी आवाज़ ही तेरी किस्मत है। बस इसे किसी की नज़र न लगे।" पर माँ की ममता को क्या पता था कि काले बादलों ने उनके घर के सूरज को घेरना शुरू कर दिया है।

इंदर के इसी संगीत के सफर के दौरान उसकी मुलाकात मोगा के रहने वाले सुखविंदर सिंह से हुई। सुखविंदर दिखने में बेहद सीधा और मददगार इंसान लगता था। उसने धीरे-धीरे इंदर का विश्वास जीता और उसके काम में हाथ बंटाने लगा। इंदर उसे एक अच्छा दोस्त और शुभचिंतक मानती थी। लेकिन सुखविंदर के दिल में दोस्ती नहीं, बल्कि एक ज़हरीली सनक पनप रही थी। सुखविंदर पहले से ही शादीशुदा था, लेकिन वह इंदर की खूबसूरती और उसकी बढ़ती शोहरत का दीवाना हो चुका था। वह इंदर पर शादी करने का दबाव बनाने लगा। 

जब इंदर को उसकी शादी की सच्चाई पता चली, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसने सुखविंदर से साफ कह दिया।सुखविंदर, तुम शादीशुदा हो। तुम्हारा एक परिवार है। मैं किसी का घर उजाड़कर अपना घर नहीं बसा सकती। और जो इंसान अपनी पहली पत्नी का वफादार नहीं हुआ, वो मेरा क्या होगा? हमारे बीच अब कोई रिश्ता नहीं हो सकता। यह इनकार सुखविंदर के अहंकार पर गहरी चोट थी। उसका प्यार अब एक खौफनाक ज़िद और पागलपन में बदल चुका था। वह दिन-रात इंदर का पीछा करने लगा, उसे धमकियाँ देने लगा। 

इंदर अंदर ही अंदर डरने लगी थी, लेकिन उसने अपने परिवार को इस तनाव से दूर रखने की कोशिश की, ताकि वे परेशान न हों। यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। 13 मई की वो काली दोपहर तारीख थी 13 मई। पंजाब की धूप में अजीब सी तपिश थी, जैसे प्रकृति भी आने वाले तूफान से सहमी हुई हो। दोपहर के वक्त इंदर ने अपनी माँ के हाथ की बनी रोटी खाई, भाई के सिर पर प्यार से हाथ फेरा और अपनी कार की चाबी उठाकर बोली, "बेबे, मैं एक मीटिंग के लिए निकल रही हूँ, शाम तक आ जाऊँगी। माँ ने पीछे से आवाज़ दी, "धीये, ज़रा संभल कर जाना। 

" इंदर मुस्कुराई, "अरे बेबे! तुम भी ना, बस फिक्र करती रहती हो। मैं जल्दी आऊँगी।" वह मुस्कुराता हुआ चेहरा, वो आखिरी शब्द... परिवार को नहीं पता था कि यह इंदर की उनसे आखिरी मुलाकात थी। इंदर कार में बैठकर घर से निकली, लेकिन रास्ते में सुखविंदर ने साज़िश के तहत उसे रोक लिया। सुखविंदर के साथ इस साज़िश में उसके पिता प्रीतम सिंह और उसका दोस्त करमजीत सिंह भी शामिल थे। सुखविंदर ने एक बार फिर इंदर के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। 

जब इंदर ने पूरी हिम्मत से उसे दुत्कारा, तो सुखविंदर के अंदर का जानवर जाग गया। उसने अपने पिता और दोस्त के साथ मिलकर इंदर का गला घोंट दिया। वह आवाज़, जिसने लाखों लोगों को रोना और हंसना सिखाया था, कुछ ही पलों में हमेशा के लिए खामोश हो गई। इंदर की आँखों में अपने परिवार का चेहरा और ज़िंदगी के कई अधूरे सपने तैर रहे थे, जो घुटते हुए दम के साथ हमेशा के लिए धुंधले हो गए। अपनी इस घिनौनी करतूत को छिपाने के लिए, तीनों आरोपियों ने इंदर के शव को उसकी ही कार में डाला और रात के अंधेरे में लुधियाना की नीलोन नहर के पास पहुंचे। उन्होंने बेदर्दी से इंदर की लाश को ठंडे पानी के हवाले कर दिया और कार को भी नहर में धकेल दिया, ताकि यह एक हादसा लगे।

रात के 10 बज चुके थे। जमालपुर वाले घर में माँ की आँखें दरवाज़े पर टिकी थीं। भाई बार-बार इंदर का फोन मिला रहा था, लेकिन फोन लगातार 'नॉट रीचेबल' आ रहा था। पूरी रात जागकर कटी। सुबह होते ही भाई भागता हुआ पुलिस थाने पहुंचा। उसने सुखविंदर पर शक जताते हुए अपहरण का मामला दर्ज कराया। "साहब, मेरी बहन को सुखविंदर परेशान करता था। वो उसे उठा ले गया है, प्लीज मेरी बहन को ढूंढ लाओ," भाई पुलिस के सामने हाथ जोड़कर रो रहा था। 

नीलोन नहर का खौफनाक सच रविवार के दिन पुलिस को नीलोन नहर में एक डूबी हुई कार दिखाई दी। जब क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया, तो वह इंदर की ही कार थी। कार के मिलते ही परिवार के दिलों में अनहोनी का डर और गहरा हो गया। और फिर आया वो काला सोमवार, जिसने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया। सोमवार को नीलोन नहर की लहरों ने इंदर के बेजान शरीर को उगल दिया।पानी में रहने के कारण वह खूबसूरत चेहरा सूज चुका था, जिस आवाज़ के लोग दीवाने थे, वो होंठ नीले पड़ चुके थे। जब समराला के सिविल अस्पताल में भाई ने चादर हटाकर अपनी बहन का शव देखा, तो उसकी चीख से अस्पताल की दीवारें तक कांप उठीं। माँ जब अस्पताल पहुंची, तो बेटी के शव से लिपटकर ऐसी दहाड़ मारकर रोई कि वहां खड़े पुलिस अधिकारियों की आँखों में भी आंसू आ गए। उठ धीये! देख तेरी बेबे आई है। तू तो कहती थी ना कि तू वापस आएगी? देख, तेरे बिना तेरा यह भाई अधूरा हो गया। तेरी आवाज़ के बिना यह घर श्मशान बन गया है, उठ मेरी बच्ची..." माँ का यह विलाप पत्थर का दिल भी पिघलाने के लिए काफी था।

साज़िश का पर्दाफाश और अधूरा न्याय पुलिस ने जब तफ्तीश की सुई सुखविंदर की तरफ घुमाई, तो एक और चौंकाने वाला सच सामने आया। मुख्य आरोपी सुखविंदर इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने और साज़िश रचने के तुरंत बाद देश छोड़कर कनाडा भाग चुका था। वह कानून के हाथों से बचकर सात समंदर पार जा छिपा था। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस कत्ल में सुखविंदर का साथ देने वाले उसके पिता प्रीतम सिंह और उसके दोस्त करमजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। 

सलाखों के पीछे खड़े वो दोनों आरोपी आज भी अपनी गलती पर शर्मिंदा होने के बजाय खामोश थे। इंदर कौर आज इस दुनिया में नहीं है। समराला के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद जब उसका अंतिम संस्कार किया गया, तो पूरी म्यूज़िक इंडस्ट्री और हज़ारों फैंस की आँखें नम थीं। हवाओं में आज भी इंदर के गाए गाने गूंज रहे हैं, लेकिन उन गानों को गाने वाली पंछी हमेशा के लिए उड़ चुकी है।

बूढ़ी माँ आज भी लुधियाना के उस सूने घर की दहलीज़ पर बैठकर रोती है। भाई की कलाई सूनी हो चुकी है। न्याय की गुहार लगाते हुए परिवार की बस एक ही मांग है कि कनाडा भागे उस दरिंदे सुखविंदर को वापस लाया जाए और उसे ऐसी सज़ा मिले, जिसे देखकर किसी भी मासूम के सपनों को कुचलने वाले की रूह कांप उठे। यह सिर्फ एक सिंगर की हत्या नहीं थी, बल्कि पंजाब की एक बुलंद आवाज़ और एक परिवार की उम्मीदों का बेरहमी से किया गया कत्ल था।


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