3 साल की कागजी कसरत के बाद जारी हुआ फंड ...
कैंसर मरीज करा सकेंगे अब सस्ता इलाज,50 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक मशीनें लगेंगी !
ग्वालियर। ग्वालियर सहित अंचल के कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर है। करीब एक दशक से भी लंबा इंतजार अब खत्म होने को है। जयारोग्य चिकित्सालय के कैंसर विभाग में 50 करोड़ रुपये की लागत से चार विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक मशीनें पूरी तरह तैयार हैं। इन मशीनों के आने से कैंसर का जो जटिल इलाज दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के निजी अस्पतालों में 2 से 5 लाख रुपये में होता है, वह यहां महज 10 से 20 हजार रुपये में संभव होगा।
आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए यह पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। इन मशीनों के अगले माह तक आने की संभावना है, डॉक्टरों का दावा है कि आते ही इनको इंस्टॉल कराने के बाद इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इन मशीनों का ग्वालियर तक पहुंचने का सफर किसी संघर्ष से कम नहीं रहा।
3 साल की कागजी कसरत के बाद फंड जारी हुआ
2015 में शासन नेग्वालियर को स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की तर्ज पर विकसित करने के लिए मशीनों की स्वीकृति दी। 2018 तक तीन साल की कागजी कसरत के बाद फंड जारी हुआ। जब टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, तब कोविड महामारी ने पूरी दुनिया को रोक दिया, जिससे ऑर्डर अटक गए। 2024-26 में मशीनों को रेडिएशन से सुरक्षित रखने के लिए 7 करोड़ की लागत से विशेष बंकर और नई बिल्डिंग तैयार की गई।
ये चार मशीनें जो बदल देंगी कैंसर इलाज की तस्वीर...
- कैंसर विभाग के रेडियोथैरेपी सेक्शन में अब ये अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध होंगी-
- डुअल-एनर्जी लीनियर एक्सीलरेटर: यह मशीन स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना सीधे कैंसर कोशिकाओं पर सटीक वार करती है।
- सीटी स्यिुलेटर: रेडिएशन देने से पहले यह ट्यूमर का सटीक थ्रीडी डिजिटल नक्शा बनाती है, जिससे रेडिएशन की सही डोज तय होती है।
- ब्रेकी थैरेपी: यह आंतरिक रेडिएशन तकनीक महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए रामबाण मानी जाती है।
पेट सीटी-इससे शरीर के किसी भी हिस्से में कैंसर के प्रसार की शुरुआती स्टेज में ही पहचान हो सकेगी।


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