G News 24 : "एआई बनाम मानव बुद्धि: एक विधायी प्रारूपण और संवैधानिक जांच" प्रतियोगिता हुई आयोजित।

 प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा ...

"एआई बनाम मानव बुद्धि: एक विधायी प्रारूपण और संवैधानिक जांच" प्रतियोगिता हुई आयोजित।

ग्वालियर।  प्रेस्टीज प्रबंधन एवं शोध संस्थान, ग्वालियर के विधि विभाग द्वारा "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाम मानव बुद्धि: एक विधायी प्रारूपण और संवैधानिक जांच प्रतियोगिता" का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस अनूठी प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और विश्लेषणात्मक कौशल को बढ़ावा देना था । कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को एआई-जनित परिणामों और मानवीय तर्क के बीच के अंतर को समझने तथा दोनों की शक्तियों और सीमाओं को पहचानने का अवसर प्रदान करना था । साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मानव बुद्धिमत्ता के बीच तुलनात्मक अध्ययन को प्रोत्साहित करना था। 

इस अवसर पर कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि के रूप में माननीय अधिवक्ता मोनिका मिश्रा जी (म.प्र. उच्च न्यायालय) ने बताया कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव तथा विधि क्षेत्र में उसकी उपयोगिता एवं सीमाओं पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी विकास के साथ-साथ मानवीय मूल्यों एवं संवैधानिक समझ को बनाए रखने का संदेश दिया तथा  अंत में, उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें बदलते परिवेश के अनुरूप ढलने की सलाह दी ।

इस अवसर पर कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि के रूप में माननीय न्यायमूर्ति अखिल श्रीवास्तव (पूर्व न्यायाधीश, म.प्र. उच्च न्यायालय) ने बताया कि वर्तमान युग में तकनीक और कानून का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायता तो प्रदान कर सकती है, लेकिन मानवीय संवेदना और कानूनी बारीकियों की समझ का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने भविष्य की कानूनी चुनौतियों का सामना करने के लिए छात्रों को तैयार रहने का आह्वान किया  तथा विधायी प्रारूपण के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला ।

संस्थान के निदेशक, प्रोफेसर डॉ. निर्मल्या बंद्योपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन तकनीकी प्रगति और मानवीय बुद्धिमत्ता के बीच की दूरी को पाटने का कार्य करते हैं । उन्होंने वैश्विक स्तर पर कानून के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा  उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई जैसी आधुनिक तकनीक और मानव बुद्धि के बीच जो अंतर है, उसे इस तरह की प्रतियोगिताएं कम करने का काम करती हैं । उनके अनुसार, तकनीक केवल एक साधन है, लेकिन उसे सही दिशा देना मानवीय बुद्धिमत्ता का काम है ।

विधि विभाग की प्राचार्या, प्रोफेसर डॉ. राखी सिंह चौहान ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता को आयोजित करने का हमारा मुख्य उद्देश्य विधि विभाग के छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर पर चल रहे तकनीकी घटनाक्रमों और एआई के प्रभाव से रूबरू कराना है । विद्यार्थी यहाँ से व्यावहारिक सीख प्राप्त कर भविष्य में आने वाली जटिल चुनौतियों का सामना कर सकेंगे । विधि विभाग का संकल्प केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करना है ताकि वे समाज में एक सक्षम विधि विशेषज्ञ के रूप में उभरें। उन्होंने आयोजन की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि संस्थान समय-समय पर ऐसे बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित करता रहता है ।

इस प्रतियोगिता में कुल 35 टीमों (प्रत्येक में 3 सदस्य) ने भाग लिया। प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई प्रारंभिक चरण एवं फाइनल चरण। प्रारंभिक चरण में प्रतिभागियों ने अपने कौशल एवं विचार प्रस्तुत किए, जिसमें से श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर 10 टीमों का चयन फाइनल राउंड हेतु किया गया। फाइनल राउंड में प्रतिभागियों ने उन्नत स्तर पर विधायी मसौदा निर्माण एवं संवैधानिक परीक्षण की अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 

इस प्रतियोगिता में विजेता के रूप में लीगल ड्राफ्ट्समैनशिप अवार्ड (विजेता) — आशि मंगल, शिवांश शर्मा , देव छपरिया , गार्डियन ऑफ़ द कॉन्स्टिट्यूशन अवार्ड — अंश शर्मा , अदिति मोदी , रुद्र प्रताप सिंह गौर तथा बेस्ट प्रेज़ेंटेशन एंड ओरेटर अवार्ड — आशि मंगल , शिवांश शर्मा , देव छपरिया को चुना गया तथा सभी विजेताओं को नगद पुरस्कार तथा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। 

कार्यक्रम में संस्थान के सह-प्राध्यापक डॉ0 अक्षय भार्गव , सह-प्राध्यापक  आबिल हुसैन , सह-प्राध्यापक राहुल श्रीवास्तव, सह-प्राध्यापिका  मानसी गुप्ता , सह-प्राध्यापिका मानसी सोनी , सह-प्राध्यापिका दीक्षा भदोरिया सह-प्राध्यापक साहिल वर्मा  मौजूद रहे तथा कार्यक्रम संचालन और आभार व्यक्त सह-प्राध्यापिका सह-समन्वयक जिज्ञासा वोहरा ने किया तथा  कार्यक्रम में  रिपोर्ट वाचन सह-प्राध्यापिका तथा कार्यक्रम की समन्वयक रिचा मित्तल  ने  किया गया।

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