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G News 24 : मिडिल ईस्ट जंग को लेकर अमेरिका ने ईरान पर आगामी दो सप्ताह के लिए हुआ 'सीजफायर'

 डोनाल्ड ट्रंप तो 'सीजफायर' के लिए तैयार थे,लेकिन इजरायल बड़ी मुश्किल से माना !

मिडिल ईस्ट जंग को लेकर अमेरिका ने ईरान पर आगामी दो सप्ताह के लिए हुआ 'सीजफायर' 

ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिका तो 'सीजफायर' के लिए तैयार हो गया लेकिन इजरायल 'सीजफायर' के लिए तैयार नहीं हो रहा था. फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को इस 'सीजफायर' की ऐसी कौन सी बातें बताईं कि बेंजामिन नेतन्याहू भी 'सीजफायर' के लिए तैयार हो गए?

मिडिल ईस्ट जंग को लेकर अमेरिका ने ईरान पर आगामी दो सप्ताह के लिए 'सीजफायर' का ऐलान कर दिया है. इस बीच अमेरिका ने अपने सहयोगी इजरायल को भी ईरान पर 'सीजफायर' के लिए मना लिया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को 'सीजफायर' से मनाने के लिए ऐसी शर्तें समझाईं कि इजरायल भी ईरान के खिलाफ 'सीजफायर' के लिए तैयार हो गया. ट्रंप ने इजरायल को बताया कि आगामी दो सप्ताह  में होने वाली बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान की परमाणु सामग्री को हटाने और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोकने और बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों को खत्म करने पर जोर देगा. 

मिडिल ईस्ट जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रशासन अब ईरान के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है. आगामी बातचीत को लेकर अमेरिका ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि ठोस नतीजों पर केंद्रित रहेगी. वॉशिंगटन की प्राथमिकताओं में ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह सीमित करना सबसे ऊपर है. इसके तहत ईरान से न केवल परमाणु सामग्री हटाने की मांग की जा रही है, बल्कि यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने का दबाव भी बनाया जा रहा है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करने की रणनीति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका करीब 1000 पाउंड यूरेनियम को ईरान से हटाने या अपने नियंत्रण में लेने की योजना पर विचार कर रहा है. यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निर्णायक रूप से कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. सिर्फ इतना ही नहीं, ट्रंप प्रशासन बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हुए उसे खत्म करने की मांग कर रहा है. इस मुद्दे को भी वार्ता की मुख्य शर्तों में शामिल किया गया है.

अगर कूटनीति का रास्ता नहीं रहा कामयाब तो अमेरिका...

हालांकि, इस सख्त रुख के साथ अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि अगर कूटनीतिक रास्ता नाकाम रहता है, तो वह कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. जरूरत पड़ने पर जमीनी कार्रवाई (ग्राउंड ऑपरेशन) की चेतावनी भी दी गई है, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं. ऐसे में आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह टकराव बातचीत से सुलझेगा या फिर दुनिया एक नए संकट की ओर बढ़ेगी.

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