इस्लामाबाद में यूएस-ईरान के बीच शांतिवार्ता फ्लॉप होने पर ...
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का PAK पर तीखा तंज,बोले 'बड़े देश एक्ट करते हैं, दलाल नहीं',
इस्लामाबाद में यूएस-ईरान के बीच शांतिवार्ता फ्लॉप होने पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पाकिस्तान पर करारा तंज कसा है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि बड़े देश एक्ट करते हैं, वे दलाल की भूमिका नहीं निभाते. रूस-चीन या यूएस ऐसा कभी नहीं करते, जिसे पाकिस्तान को सीखना चाहिए.
पाकिस्तान ने बिचौलिया बनकर वाहवाही बटोरने की कोशिश की लेकिन यह उसे ही भारी पड़ गई. इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई और दोनों पक्ष अपने-अपने देश लौट गए. इस असफल वार्ता के बाद पाकिस्तान की दुनियाभर में खिल्लियां उड़ रही हैं. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी पाकिस्तान पर तंज कसते हुए उसे कई नसीहतें दी हैं. उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इस पर अपमें कमेंट लिखकर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
'यूएस-रूस, चीन नहीं करते मध्यस्थता'
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाते हुए लिखा, 'पिछले करीब 250 वर्षों में अमेरिका कितनी बार किसी युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका में आया? शायद मुश्किल से ही कभी. 1917 से अब तक सोवियत संघ या रूस कितनी बार किसी युद्ध को समाप्त करने में वार्ताकार बना है? जारवादी रूस की बात छोड़ दें तो शायद कभी नहीं.'
चीन का उदाहरण देते हुए कांग्रेस सांसद ने लिखा, 'हजारों वर्षों के इतिहास में चीन कितनी बार किसी संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका में रहा है? लगभग कभी नहीं. बड़े और आत्मविश्वास से भरे शक्तिशाली देश एक्ट करने वाले होते हैं, दलाल नहीं.'
'छोटे देश करते हैं ऐसा'
पाकिस्तान की बिचौलिया बनने की हसरत पर तंज कसते हुए तिवारी ने कहा, 'छोटे या मध्यम शक्तिशाली देश मान्यता पाने के लिए मध्यस्थता के रास्ते पर चलते हैं. इसी तथ्य से पाकिस्तान की उस भूमिका की व्याख्या हो जाती है, जिसमें वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है. इतिहास बहुत कुछ सिखाता है. लोगों को इसे पढ़ना चाहिए.'
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, मनीष तिवारी ने यह पोस्ट करके पाकिस्तान की हैसियत दुनिया के सामने एक्सपोज कर दी है. पाकिस्तान पिछले कई सालों से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और महंगाई वहां पर चरम पर पहुंची है. लोगों को दो वक्त भोजन का भी टोटा पड़ा हुआ है. देश में चारों प्रांतों में अलगाववादी गतिविधियां जोर पकड़े हुए हैं और हिंसा में रोजाना दर्जनों लोग मारे जा रहे हैं.
'पाकिस्तान की तरह दलाल नहीं है भारत'
ऐसे माहौल में देश की आंतरिक समस्याओं को दूर करने पर ध्यान देने के बजाय वैश्विक शक्तियों के बीच चल रहे संघर्ष में बिचौलिया बनना पाकिस्तान की नादानी ही दिखाता है. भारत इन सब परिस्थितियों को कहीं बेहतर तरीके से समझता है, इसलिए उसने परिपक्व कूटनीति का उदाहरण पेश करते हुए अभी तक के वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता से खुद को दूर रखा है.
जब भारतीय विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने भी तंज कसते हुए कहा था कि भारत, पाकिस्तान की तरह दलाल नहीं है. अब तिवारी ने भी अपनी पोस्ट में करारे शब्दों में पाकिस्तान को नसीहत देकर बता दिया कि जिन्नालैंड दलाल मुल्क है, जिसकी दुनिया में कोई इज्जत नहीं है.

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