भारत का जागरूक युवा हमेशा राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखता है ...
कॉकरोच एंड पार्टी राजनीति के लिए,भारत के जागरूक युवाओं से ना उलझे !
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां विचारों की विविधता है, राजनीतिक मतभेद हैं, सरकारों के पक्ष और विपक्ष हैं, लेकिन इन सबके बीच एक बात सबसे महत्वपूर्ण है, राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास।
हाल के वर्षों में यह आरोप बार-बार सामने आते रहे हैं कि कुछ ऐसे समूह, संगठन या नेटवर्क सक्रिय हैं जो विदेशों में बैठकर भारत के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। सोशल मीडिया, डिजिटल अभियानों और तथाकथित "टूलकिट राजनीति" के माध्यम से देश के भीतर असंतोष, भ्रम और अविश्वास का वातावरण बनाने की कोशिश की जाती है। ऐसे तत्वों को प्रतीकात्मक रूप से "कॉकरोच एंड पार्टी" कहा जा सकता है, क्योंकि ये खुले विमर्श के बजाय छिपकर एजेंडा चलाने में विश्वास रखते हैं।
सबसे चिंताजनक बात तब होती है जब देश के कुछ राजनीतिक दल अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे तत्वों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए दिखाई देते हैं। लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन यदि किसी भी प्रकार की गतिविधि देश की संस्थाओं, सामाजिक सद्भाव या राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करे, तो उसका समर्थन किसी भी राजनीतिक दल के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
कुछ लोगों की यह धारणा हो सकती है कि अराजकता, भ्रम या अस्थिरता पैदा करके राजनीतिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इतिहास बताता है कि ऐसे प्रयोग कभी स्थायी सफलता नहीं दिलाते। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था अत्यंत मजबूत है और यहां सत्ता परिवर्तन का मार्ग चुनावों से होकर जाता है, न कि अराजकता या उकसावे से।
भारत के युवाओं को लेकर भी कई बार गलत आकलन किए जाते हैं। भारतीय युवा आज पहले की तुलना में कहीं अधिक शिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और जागरूक है। वह सोशल मीडिया पर चलने वाले हर अभियान को आंख बंद करके स्वीकार नहीं करता। वह तथ्यों की जांच करता है, विभिन्न स्रोतों से जानकारी प्राप्त करता है और अपने विवेक से निर्णय लेने की क्षमता रखता है।
इसी कारण देश को बांटने, भ्रमित करने या भड़काने वाले अभियान लंबे समय तक सफल नहीं हो पाते। भारत का युवा राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाना जानता है। वह अपनी असहमति भी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर सकता है और किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार का शांतिपूर्ण एवं तार्किक प्रतिवाद भी कर सकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि देश का युवा भावनाओं के बजाय तथ्यों पर भरोसा करे, अफवाहों के बजाय प्रमाणों को महत्व दे और किसी भी प्रकार की वैचारिक या डिजिटल टूलकिट का हिस्सा बनने से बचे। राष्ट्र की मजबूती केवल सरकारों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से होती है।
भारत का भविष्य उन युवाओं के हाथ में है जो बहकावे में नहीं आते, बल्कि सोचते हैं, समझते हैं और देशहित को सर्वोपरि रखते हैं। यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और यही उन सभी तत्वों के लिए सबसे बड़ा उत्तर है जो किसी भी रूप में देश को कमजोर करने का सपना देखते हैं।


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