G News 24 : अपनी लेखनी से सरलता व प्रभावशीलता का अद्भुत संतुलन !

 ग्वालियर का सपूत, अपनी कर्मस्थली मुंबई से बना रहा है...

अपनी लेखनी से सरलता व प्रभावशीलता का अद्भुत संतुलन !

कुंवर राकेश सागर एक ऐसा नाम जिसने साहित्यिक जीवन मात्र 14 वर्ष की आयु से प्रारंभ किया और जो अब साधना का रूप ले चुका है। उन्होंने जीवन के हर सुख-दुख और परिस्थितियों को अपनी लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त किया है।

 ग़ज़ल, गीत, कविता, कहानी और व्यंग्य जैसे विविध साहित्यिक रूपों में उनकी सशक्त उपस्थिति दिखाई देती है। उनकी रचनाओं में संवेदना, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की गहरी झलक मिलती है।

कोविड काल में उन्होंने “जीत जाएंगे हम” के माध्यम से समाज को आशा का संदेश दिया, वहीं “अपने अपने राम” में आध्यात्मिक भावों को स्वर दिया। “मां” और “पिता” जैसे संग्रहों में पारिवारिक संबंधों की गहराई और भावनात्मक पक्ष को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

प्रकाशित साहित्य:जीत जाएंगे हम (काव्य संग्रह), अपने अपने राम (भजन संग्रह), मां (कविता संग्रह), पिता (कविता संग्रह), आर. के. प्रकाशन, नहीं बाकी (बाल गीत), आर. के. प्रकाशन।

आपको अभी तक दैनिक स्वदेश द्वारा आदर्श साहित्यकार पुरस्कार, दैनिक नवभारत द्वारा उजाला सम्मान, आकाशवाणी द्वारा युवा वाणी सम्मान, मुंबई में आदर्श रचनाकार सम्मान। आदि सहित तमाम सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

साहित्य समाज व राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने के बाद अब कुंवर राकेश सागर हिंदी भाषा की सेवा को अपना दायित्व मानते हुए साहित्य सृजन को समाज सेवा का माध्यम बना लिया है। उनकी लेखनी में सरलता, सरसता और प्रभावशीलता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है, जो पाठकों को सहज ही प्रभावित करता है।

 उन्होंने बाल साहित्य “नन्हीं कली” के माध्यम से बच्चों में नैतिकता, संस्कार और सकारात्मक भाव विकसित करने का सराहनीय प्रयास किया है। उनका मानना है कि साहित्य केवल विचारों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज, परिवार और राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति है। हर साहित्य का विश्लेषण आवश्यक नहीं, बल्कि प्रेरणादायी और सकारात्मक साहित्य ही उतना ही महत्वपूर्ण है, जो समाज में साहस और आशा का संचार करे।

उन्हें हिंदी भाषा की मौलिकता और शक्ति पर उन्हें पूर्ण विश्वास है, किंतु इसके व्यापक विकास के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। तभी साहित्य अपने गौरवपूर्ण स्थान परलेखनी में सरलता व प्रभावशीलता का अद्भुत संतुलन

कुंवर राकेश सागर का साहित्यिक जीवन मात्र 14 वर्ष की आयु से प्रारंभ होकर आज निरंतर साधना का रूप ले चुका है। उन्होंने जीवन के हर सुख-दुख और परिस्थितियों को अपनी लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। ग़ज़ल, गीत, कविता, कहानी और व्यंग्य जैसे विविध साहित्यिक रूपों में उनकी सशक्त उपस्थिति दिखाई देती है। उनकी रचनाओं में संवेदना, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की गहरी झलक मिलती है।

कोविड काल में उन्होंने “जीत जाएंगे हम” के माध्यम से समाज को आशा का संदेश दिया, वहीं “अपने अपने राम” में आध्यात्मिक भावों को स्वर दिया। “मां” और “पिता” जैसे संग्रहों में पारिवारिक संबंधों की गहराई और भावनात्मक पक्ष को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

प्रकाशित साहित्य:जीत जाएंगे हम (काव्य संग्रह), अपने अपने राम (भजन संग्रह), मां (कविता संग्रह), पिता (कविता संग्रह), आर. के. प्रकाशन, नहीं बाकी (बाल गीत), आर. के. प्रकाशन।

सम्मान:दैनिक स्वदेश द्वारा आदर्श साहित्यकार पुरस्कार, दैनिक नवभारत द्वारा उजाला सम्मान, आकाशवाणी द्वारा युवा वाणी सम्मान, मुंबई में आदर्श रचनाकार सम्मान।

साहित्य समाज व राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति

कुंवर राकेश सागर हिंदी भाषा की सेवा को अपना दायित्व मानते हुए साहित्य सृजन को समाज सेवा का माध्यम समझते हैं। उनकी लेखनी में सरलता, सरसता और प्रभावशीलता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है, जो पाठकों को सहज ही प्रभावित करता है। उन्होंने बाल साहित्य “नन्हीं कली” के माध्यम से बच्चों में नैतिकता, संस्कार और सकारात्मक भाव विकसित करने का सराहनीय प्रयास किया है।

उनका मानना है कि साहित्य केवल विचारों की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज, परिवार और राष्ट्र की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति है। हर साहित्य का विश्लेषण आवश्यक नहीं, बल्कि प्रेरणादायी और सकारात्मक साहित्य ही उतना ही महत्वपूर्ण है, जो समाज में साहस और आशा का संचार करे।

उन्हें हिंदी भाषा की मौलिकता और शक्ति पर  पूर्ण विश्वास है, किंतु इसके व्यापक विकास के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा। तभी साहित्य अपने गौरवपूर्ण स्थान पर पुनः प्रतिष्ठित हो सकेगा। पुनः प्रतिष्ठित हो सकेगा। हिंदी भाषा के प्रति बाल मन कैसे आकर्षित हो, इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने नर्सरी के बच्चों के लिए कुछ राइम्स वाली पुस्तकों का लेखन किया है जिनका विमोचन आज शहर के जाने वाले तमाम वरिष्ठ पत्रकारों एवं साहित्यकारों की उपस्थिति में किया गया।

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