रेड रोड पर सन्नाटा,'ब्रिगेड परेड ग्राउंड' में शिफ्ट हुई ईद की नमाज,
सुवेंदु सरकार के एक फैसले ने बदल दी कोलकाता की 'बकरीद'
पश्चिम बंगाल की सियासत बदलने के साथ ही अब कोलकाता की सड़कों की तस्वीर भी बदलने लगी है. राज्य की नई सुवेंदु सरकार ने एक बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए कोलकाता के ऐतिहासिक 'रेड रोड' पर होने वाली मुख्य ईद की नमाज को 'ब्रिगेड परेड ग्राउंड' में शिफ्ट कर दिया है. द्वितीय विश्व युद्ध के हवाई पट्टी रहे इस VIP कॉरिडोर के बंद होने से शहर का यातायात ठप हो जाता था. बता दें कि धार्मिक नेताओं ने भी सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है.
सरकार का तर्क है कि इस फैसले से शहर की दम तोड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारा जा सकेगा. हालांकि शुरुआती दौर में इस पर थोड़ी सियासी बहस जरूर छिड़ी, लेकिन अब इसे मुस्लिम समाज के प्रमुख धार्मिक नेताओं का भी साथ मिलने लगा है.
कोलकाता की मशहूर नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने इस बदलाव को एक सकारात्मक कदम करार दिया है. उन्होंने कहा कि ब्रिगेड परेड ग्राउंड रेड रोड से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर है और वहां नमाजियों के लिए कहीं ज्यादा खुली जगह मौजूद है, जिससे प्रशासन के लिए भी इंतजाम संभालना आसान होगा.
क्यों इतनी खास है रेड रोड?
रेड रोड सिर्फ कोलकाता के नक्शे की एक लकीर नहीं है, बल्कि इसका इतिहास बेहद चौंकाने वाला और सामरिक है. जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश काल में बनी इस सड़क का इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान रॉयल एयर फोर्स (RAF) के लड़ाकू विमानों के लिए एक इमरजेंसी रनवे के रूप में किया जाता था. 1940 के दशक में जब कोलकाता पर जापानी हवाई हमलों का खतरा मंडरा रहा था, तब यह सड़क सेना के लिए सबसे बड़ा ढाल बनी थी. आज भी यह सड़क उत्तर और दक्षिण कोलकाता को जोड़ने वाला सबसे मजबूत 'VIP कॉरिडोर' है, जिसके बंद होने का मतलब है पूरे कोलकाता की रफ्तार का थम जाना.
दशकों से चली आ रही परंपरा के मुताबिक, ईद के दिन सुबह से लेकर दोपहर 10 बजे तक रेड रोड पूरी तरह सील रहता था. यही हाल पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के दौरान शुरू हुए 'दुर्गा पूजा कार्निवल' के समय भी होता था, जब यह सड़क 10-10 घंटे तक ब्लॉक रहती थी. इसका नतीजा यह होता था कि एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और दफ्तर जाने वाले आम लोग कई-कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम में फंस जाते थे. पिछली सरकारों ने कभी इसका परमानेंट इलाज ढूंढने की जहमत नहीं उठाई. लेकिन अब नई सरकार ने पहली बार परंपरा और पब्लिक सुविधा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है.
परंपरा भी बची रहेगी और एंबुलेंस का रास्ता भी साफ
प्रशासन का साफ कहना है कि धार्मिक आयोजनों का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन मेट्रो शहरों में इमरजेंसी सेवाओं (जैसे मेडिकल और फायर सर्विस) को किसी भी कीमत पर रोका नहीं जा सकता. ईद की नमाज को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट करने से नमाजियों को तो बड़ी और खुली जगह मिलेगी ही, साथ ही शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली रेड रोड भी पूरी तरह खुली रहेगी. धार्मिक गुरुओं के इस फैसले के समर्थन में आने के बाद अब इसे राजनीति से ऊपर उठकर एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक शहरी समाधान के रूप में देखा जा रहा है.


0 Comments