G News 24 : 6 पीढ़ियों से परिवारके 83 लोग एक साथ रह रहे,जॉइंट फैमिली में रहने के फायदे !

 जहां महिलाएं रोजमर्रा के घर के काम-काज करती हैं और पुरुष बाहर जाकर पैसा कमाने जाते हैं... 

6 पीढ़ियों से परिवारके 83 लोग एक साथ रह रहे,जॉइंट फैमिली में रहने के फायदे !

सूरज बड़जात्या की फिल्म 'हम साथ-साथ हैं' से भी बड़ा और भरा पूरा है आंध्र प्रदेश का नागप्पा परिवार. बच्चे एक साथ लड़ते हैं और बड़े एक साथ काम और हंसी-ठिठोली करते हैं. 6 पीढ़ियों के 83 लोग एक साथ रह रहे, जॉइंट फैमिली में रहने के फायदे जानेंआंध्र प्रदेश का नागप्पा परिवार समाज के लिए मिसाल है. भारत में प्राचीन समय से संयुक्त परिवार की परंपरा रही है. पूरा परिवार मिलकर एक साथ एक छत के नीचे रहता था. जहां महिलाएं मिलकर खाना बनाने से लेकर सभी रोजमर्रा के घर के कामकाज करती थीं. वहीं पुरुष बाहर जाकर पैसा कमाते थे.

लेकिन बदलते जमाने के साथ परिवार की यह व्यवस्था भी बदलती गई. अब ज्यादातर लोग एकल परिवार में विश्वास रखते हैं. शहरों में जॉइंट फैमिली बहुत ही मुश्किल से देखने को मिलती हैं. हालांकि देश से संयुक्त परिवार की प्रथा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. कई जगहों पर आज भी ऐसे परिवार मौजूद हैं जो पीढ़ियों से साथ ही रहते आ रहे हैं.

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर का संयुक्त परिवार आजकल खूब चर्चा में है. यहां पर छह पीढ़ियों के 83 सदस्य एकसाथ एक घर में छत के नीचे रहते हैं. आज के समय में इस परिवार के बारे में जिसने भी सुना उसने जमकर इसकी तारीफ की. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि ऐसे परिवार को तो सम्मानित किया जाना चाहिए.

नागप्पा परिवार में 6 पीढ़ियों के 83 सदस्य

आंध्र के नागप्पा परिवार ने आज भी संयुक्त परिवार की परंपरा को जिंदा रखा हुआ है. इस परिवार में 83 सदस्य एक छत के नीचे रहते हैं, वे साथ खाना बनाते हैं और साथ ही खाते हैं. सभी काम इस घर के लोग मिल-जुलकर और साथ करते हैं. ये लोग रोजी रोटी के लिए पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, साथ ही दूसरे काम भी करते हैं. आज के समय में जब भाई-भाई साथ नहीं रहना चाहते या बच्चे अपने सगे मां-बाप से पल्ला झाड़ लेते हैं, ऐसे में ये परिवार समाज के लिए मिसाल है. 

महिलाएं साथ खाना पकाती हैं, पुरुष साथ काम पर जाते हैं

नागप्पा परिवार एक साथ बहुत ही खुशहाल जिंदगी जी रहा है. छह पीढ़ियों के 83 लोगों का एकसाथ रहना आज के शहरी मॉर्डन परिवारों के लिए तो सपने जैसा है. ये परिवार समाज के लिए मिसाल से कम नहीं है. हालांकि इतने ज्यादा सदस्य होने की वजह से एक घर में सभी का रहना संभव नहीं है. इसीलिए ये लोग चार घरों में आसपास ही रहते हैं. लेकिन पूरा परिवार एक घर की तरह ही काम करता है. खाना, कमाई और जिम्मेदारी सबकुछ बंटी हुई है.

संयुक्त परिवार के फायदे जानें

संयुक्त परिवार को आजकल लोग बेड़ी की तरह समझते हैं. लेकिन ऐसे परिवार बंधन नहीं होते. पुराने जमाने में देश में ऐसे ही परिवारों की परंपरा रही है. सब एक साथ मिलकर रहते थे, साथ हंसते थे साथ गम बांटते थे. कोई खुद को अकेला या डिप्रेशन का शिकार महसूस नहीं करता था. वहीं ऐसे परिवारों में बच्चे बहुत ही आसानी से पल जाते थे. आजकल माता-पिता काम पर जाते समय बच्चों के लिए आया रखते हैं.  लेकिन ऐसे परिवारों में दादी, चाची, बुआ सब मिलकर बच्चों का ध्यान रखते थे. इससे बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते थे. बच्चों का परिवार के साथ जुड़ाव होता था, जो आज कम होता जा रहा है. बच्चे हों या बड़े सभी बस मोबाइल में व्यस्त रहते थे. लेकिन ऐसे परिवारों में हंसी- मजाक और एक साथ समय बिताने से जीवन खुशहाल रहता था. कोई खुद को अकेला महसूस नहीं करते थे. जिम्मेदारियां बंटी होने से किसी एक पर खर्च का पूरा बोझ भी नहीं पड़ता था. 

देश में 6 पीढ़ी वाले कई परिवार 

आंध्र प्रदेश का नागप्पा परिवार भी आज के समय में मिसाल है. देश में 6 पीढ़ी वाले कई परिवार आज भी मौजूद हैं. राजस्थान के अजमेर का 'माली परिवार' सबसे ज्यादा फेमस है. अजमेर के रामसर गांव में रहने वाले इस संयुक्त परिवार में करीब 185 सदस्य एक साथ रहते हैं. इस घर में खाना बनाने के लिए हर दिन 13 चूल्हे जलते हैं. 


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