एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित धरती पर वापस लाने के क्रम में एक बड़ी सफलता हासिल की...
गगनयान मिशन से पहले ISRO को मिली बड़ी कामयाबी !
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान मिशन को लेकर जोरों पर तैयारियां चल रही है. इसी क्रम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO को बड़ी कामयाबी मिली है. ISRO ने अंतरिक्ष यात्रियों यानी एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित धरती पर वापस लाने के क्रम में एक बड़ी सफलता हासिल की है. इसरो ने अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सबसे जरूरी पैराशूट सिस्टम का सफल टेस्ट IMAT-05 सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. ISRO ने गगनयान क्रू कैप्सूल के पैराशूट सिस्टम का एक बहुत ही जरूरी टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस सफल टेस्ट के साथ ही भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित धरती पर वापस लाने के एक कदम और करीब पहुंच गया है.
ISRO ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी शेयर की है कि उन्होंने मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ड्रॉप जोन में इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट को अंजाम दिया है. इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य उस मेन पैराशूट सिस्टम की परफॉर्मेंस को चेक करना था, जो अंतरिक्ष से लौटते समय गगनयान क्रू कैप्सूल की रफ्तार को धीमा करेगा और उसे सुरक्षित समुद्र में लैंड कराएगा. गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह पैराशूट सिस्टम सबसे जरूरी फीचर्स में से एक है. जब क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष से वापस लौटते समय पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेंगे, तो उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. इसी स्पीड को कंट्रोल करने और सेफ लैंडिंग स्पीड तक लाने के लिए पैराशूट्स की एक पूरी सीरीज को बहुत ही सटीक तरीके से का करना होगा.
गगनयान क्रू मॉड्यूल को धीमा करने के लिए कुल 4 अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका पूरा सीक्वेंस कुछ इस तरह काम करेगा-
- अपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट : सबसे पहले ये दो पैराशूट खुलेंगे, जो पैराशूट कंपार्टमेंट के ऊपर लगे सेफ्टी कवर को हटाएंगे.
- ड्रोग पैराशूट : इसके तुरंत बाद ये दो पैराशूट खुलेंगे, जो कैप्सूल की रफ्तार को कम करेंगे और उसे हवा में स्थिर रखेंगे.
- पायलट पैराशूट : मॉड्यूल के स्थिर होने के बाद, ये तीन पायलट पैराशूट बाहर निकलेंगे.
- मेन पैराशूट : ये पायलट पैराशूट ही आखिर में तीन बड़े मेन पैराशूट को खींचकर खोलेंगे. ये बड़े कैनोपी पैराशूट आखिरी चरण में स्पीड को इतना कम कर देंगे, जिससे क्रू मॉड्यूल सुरक्षित रूप से समुद्र में उतर सके, जहां से रिकवरी टीमें एस्ट्रोनॉट्स को सुरक्षित बाहर निकालेंगी.
इस टेस्ट के लिए इंजीनियर्स ने भारतीय वायु सेना के IL-76 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का प्रयोग किया. इस विमान की सहायता से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से एक डमी वजन के साथ मेन पैराशूट असेंबली को नीचे गिराया गया. टेस्ट की शुरुआत में एक एक्सट्रैक्टर पैराशूट ने पेलोड को स्थिर करने के लिए एक ड्रोग पैराशूट को खोला. जैसे ही जरूरी फ्लाइट कंडीशंस हासिल हुईं, मेन पैराशूट सफलतापूर्वक खुल गया और उसने पेलोड की स्पीड को पूरी तरह सुरक्षित सीमा तक कंट्रोल किया. ISRO के अनुसार, इस टेस्ट का उद्देश्य मेन पैराशूट की मजबूती और डिजाइन की क्षमताओं को उस अधिकतम लोड पर टेस्ट करना था, जो पहले अनक्रूड यानी बिना इंसानों वाले गगनयान G1 मिशन के दौरान आ सकता है.
क्वालिफिकेशन कैंपेन के तहत यह पांचवां इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट था. ISRO ने कहा कि इस सफल ट्रायल से G1 मिशन से पहले मेन पैराशूट सिस्टम की परफॉर्मेंस और इसकी विश्वसनीयता पर भरोसा काफी बढ़ गया है. गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिसे ISRO विकसित कर रहा है. इस मिशन का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है. यह मिशन अगले साल यानी 2027 की शुरुआत में लॉन्च हो सकता है.


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