वर्ष 1996 में गुरुद्वारा समिति के नाम वसीयत करवाने का दावा,कोर्ट में नहीं हुआ साबित...
फूलबाग की बेशकीमती जमीन शासकीय घोषित,गुरुद्वारा समिति का दावा खारिज !
ग्वालियर। फूलबाग गुरुद्वारे के सामने स्थित बेशकीमती जमीन का विवाद निपट गया। मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में जिला अदालत ने श्री गुरुनानक देव गुरुद्वारा समिति का दावा खारिज कर दिया है। पंचम जिला न्यायाधीश कपिल सोनी की अदालत ने माना कि विवादित सर्वे क्रमांक 567 और 568 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय है और समिति अपने स्वामित्व का दावा साबित नहीं कर सकी।
समिति ने दावा किया था कि हरप्रसाद ने 1934 में यह जमीन सुच्चा सिंह को बेची थी और सुच्चा सिंह ने 1996 में रजिस्टर्ड वसीयत के जरिए इसे गुरुद्वारा समिति के नाम कर दिया।वर्ष 2023 में प्रशासन द्वारा निर्माण हटाने की चेतावनी के बाद समिति ने अदालत से स्थायी रोक की मांग की थी। अदालत ने कहा कि समिति न तो 1934 की खरीद का कोई विश्वसनीय दस्तावेज पेश कर सकी और न ही वसीयत को कानून के मुताबिक सिद्ध कर पाई।
वसीयत का एक गवाह जीवित होने के बावजूद उसे अदालत में पेश नहीं किया गया, जबकि ऐसा करना अनिवार्य था। कोर्ट ने कहा कि 1969 में निगम के खिलाफ सुच्चा सिंह के पक्ष में आया फैसला राज्य सरकार पर लागू नहीं होता, क्योंकि उस मुकदमे में सरकार पक्षकार नहीं थी। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने मुकदमा खारिज कर दिया।
इन कारणों से हार गई गुरुद्वारा समिति...
- 1934 की कथित खरीद साबित नहीं कर सकी।
- 1996 की वसीयत का जीवित गवाह अदालत में पेश नहीं किया गया।
- निगम के खिलाफ पुरानी डिक्री का लाभ सरकार के विरुद्ध नहीं मिला।


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