G News 24 : पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर बकरीद की पाबंदी,पुलिस ने छीन लिए कुर्बानी के बकरे !!!

  पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिम को गैर-मुस्लिम घोषित किया जा चुका है...

पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर बकरीद की पाबंदी,पुलिस ने छीन लिए कुर्बानी के बकरे !!! 

मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय ने आरोप लगाया है कि कराची पुलिस बकरीद से पहले उनके कुर्बानी के जानवर जब्त कर रही है. समुदाय का कहना है कि धार्मिक पहचान की वजह से उनके साथ भेदभाव हो रहा है. पाकिस्तान में अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित किया जा चुका है और उन पर कई धार्मिक प्रतिबंध लागू हैं. 

पुलिस अहमदिया समुदाय के घरों से कुर्बानी के जानवर जब्त करके ले जा रही है, ताकि वे कुर्बानी न कर सके. पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय ने आरोप लगाया है कि कराची में पुलिस बकरीद से पहले कुर्बानी के बकरे को जब्त कर रही है. अहमदिया समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि उनके धार्मिक विश्वासों की वजह से ये कार्रवाई की जा रही है.

दरअसल, अहमदिया समुदाय के लोग अपने आप को मुसलमान मानते हैं, अहमदिया समुदाय के धार्मिक अकीदे की वजह से मुस्लिम समुदाय उन्हें मुसलमान नहीं मानता. साल 1974 में एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया गया. अहमदिया समुदाय के लोगों के हज करने पर भी प्रतिबंध है

करांची में अहमदिया समुदाय के घरों से कुर्बानी के जानवर जब्त करने की कार्रवाई पर अहमदिया समुदाय के प्रतिनिधि आमिर महमूद ने कहा, "हमें हर बार धार्मिक त्योहार पर उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कुर्बानी के लिए बकरा खरीदना और उसे रखने में मुश्किलें आ रही हैं. क्योंकि पुलिस उन्हें डरा-धमका रही है.

कराची पुलिस इसलिए कार्रवाई कर रही है, क्योंकि पाकिस्तान सरकार अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम मानती है, इसलिए अहमदिया समुदाय को बकरीद पर कुर्बानी करने की इजाजत नहीं है. अहमदिया समुदाय के प्रतिनिधि आमिर महमूद ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अहदिया समुदाय पर लगाए गए प्रतिबंध और कट्टरपंथियों द्वारा मिली धमकियों ने अहमदियों के लिए सार्वजनिक धार्मिक सभा करने, इबादत करने और बकरीद पर जानवर कुर्बानी करना असंभव बना दिया है.

गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने साल 1974 में अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित किया. इसके बाद 1984 में सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के शासनकाल के दौरान अहमदियों के खिलाफ और सख्त कानून लागू किए गए, जिसके तहत अहमदिया समुदाय अपने इबादत स्थलों को मस्जिद नहीं बता सकते और सार्वजनिक रूप से धार्मिक उपदेश नहीं दे सकते.  

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