शिवराज सरकार के समय भोपाल में मस्जिद बचाने का दिया उदाहरण...
उमा भारती ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, रखी खड़े हनुमान मंदिर बचाने की मांग !
उज्जैन। उज्जैन के करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। मंदिर को सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में हटाने के प्रयासों के बीच मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंदिर की धार्मिक आस्था और महत्व को सुरक्षित रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों की आस्था का सम्मान करते हुए ऐसा वैकल्पिक रास्ता तलाशा जाना चाहिए, जिससे सड़क चौड़ीकरण भी हो और मंदिर को भी सुरक्षित रखा जा सके।
उमा भारती ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि खड़े हनुमान मंदिर को हटाने के बजाय सड़क निर्माण की योजना में बदलाव या किसी अन्य तकनीकी और व्यावहारिक विकल्प पर विचार किया जाए। उन्होंने अपने पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव के उज्जैन से जुड़े होने का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उज्जयिनी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को अच्छी तरह समझते हैं। ऐसे में इस मामले में भी विकास और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन कायम करने वाला समाधान निकाला जा सकता है। उमा भारती का कहना है कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य लोगों की सुविधा बढ़ाना होता है।
यदि किसी धार्मिक स्थल को सुरक्षित रखते हुए परियोजना को पूरा करने का विकल्प उपलब्ध हो, तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से ऐसा समाधान निकालने की अपील की, जिससे मंदिर को हटाने की आवश्यकता ही न पड़े और सड़क चौड़ीकरण का काम भी प्रभावित न हो। उमा भारती ने अपनी मांग के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने भोपाल में कमलापति पार्क के सामने सड़क चौड़ीकरण के दौरान सामने आई स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वहां मौजूद एक मस्जिद को हटाने के बजाय सड़क की योजना में बदलाव कर वैकल्पिक रास्ता अपनाया गया था।
उमा भारती ने इसी उदाहरण के आधार पर उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को भी बचाने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि सड़क निर्माण के दौरान धार्मिक स्थल की आस्था का सम्मान करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो उज्जैन में भी ऐसा रास्ता तलाशा जाना चाहिए। दरअसल, उज्जैन के कंठाल चौराहा से छत्री चौक और बड़ा सराफा मार्ग की ओर सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी मार्ग पर करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर स्थित है। सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान मंदिर के बाहरी हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मंदिर में स्थापित करीब 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया।
बताया गया कि प्रतिमा को हटाने के लिए भारी मशीनों और तकनीकी प्रयासों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन काफी कोशिशों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। इसके बाद मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों की ओर से विरोध और आस्था से जुड़ी मांगें और तेज हो गईं। प्रतिमा को हटाने के प्रयास विफल होने के बाद मंदिर से जुड़े कई श्रद्धालु इसे भगवान हनुमान का चमत्कार और मंदिर को नहीं हटाने का दैवीय संकेत मान रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर प्रतिमा के नहीं हटने के तकनीकी कारणों को समझने का प्रयास किया जा रहा है। प्रतिमा का आधार जमीन के भीतर कितना गहरा है और वह किस संरचना पर टिकी हुई है, इसे लेकर तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है।
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर एक ओर प्रशासन सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की योजना पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु और धार्मिक संगठन मंदिर को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं। अब उमा भारती के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने से यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। खास बात यह है कि उमा भारती ने मंदिर को बचाने की मांग के समर्थन में भाजपा की ही पूर्व सरकार के कार्यकाल में भोपाल में अपनाए गए वैकल्पिक तरीके का उदाहरण दिया है। इससे सरकार के सामने विकास कार्य और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाने की चुनौती और महत्वपूर्ण हो गई है।
उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है और यहां मंदिरों से जुड़े मामलों का भावनात्मक महत्व काफी अधिक है। ऐसे में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रशासन के सामने चुनौती है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात सुधार की योजना को आगे बढ़ाते हुए खड़े हनुमान मंदिर को लेकर उठ रही धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान किया जाए। उमा भारती ने अपने पत्र के माध्यम से ऐसा तकनीकी और व्यावहारिक समाधान तलाशने की मांग की है, जिसमें विकास कार्य भी जारी रहें और मंदिर को भी सुरक्षित रखा जा सके। अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रशासन उमा भारती के सुझाव पर क्या कदम उठाते हैं और खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद का समाधान किस तरह निकाला जाता है।




0 Comments