सरकार उठा सकती है यह कदम...
चीनी की किल्लत न हो और इसके दाम भी ना बड़ें,govt.ने बदला प्लान,अब गन्ने से नहीं बनेगा इथेनॉल !
आने वाले त्योहारी सीजन में किसी भी तरह चीनी की किल्लत न हो और इसके दाम में भी इजाफा न हो. इसके लिए केंद्र सरकार ने दूसरे प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है, जिससे गन्ने से इथेनॉल नहीं बनाया जाएगा.
पेट्रोल के बाद देश में चीनी की कीमत में उछाल देखा जा रहा है. कुछ जगह रिटेल में चीनी का दाम 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है. त्योहारी सीजन में चीनी की डिमांड बढ़ने से इसके दाम में और इजाफा देखने को मिल सकता है. ऐसे में रिकॉर्ड छू रही कीमत पर लगाम लगाने और बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है. सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले पेराई सत्र में इथेनॉल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की मात्रा को सीमित करने का प्लान कर रही है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सरकार की तरफ से यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आने वाले समय में किसी भी प्रकार से चीनी की किल्लत न हो और दाम आम आदमी की पहुंच में बने रहें. देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश होने के कारण अगले साल चीनी के प्रोडक्शन में भी गिरावट आने की आशंका है. इस कारण किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सरकार चीनी सप्लाई को प्रियोरिटी देने की तैयारी कर रही है. इससे देश को चीनी के आयात पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा.
चीनी के दाम में 10 प्रतिशत तक का इजाफा
मौजूदा पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलों ने करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी, जो कि कुल प्रोडक्शन का (10 प्रतिशत है, इथेनॉल बनाने में यूज की थी. अगले सीजन में इस पर पाबंदी लगाने से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई में उतना ही इजाफा होगा. इससे कम बारिश के कारण उत्पादन में होने वाली कमी की भी भरपाई की जा सकेगी. पिछले एक महीने के दौरान देश में चीनी की कीमत 10 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है. आने वाले फेस्टिव सीजन के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. इस कारण अगले कुछ महीने कीमत में तेजी देखने को मिल सकती है.
मक्के और चावल से तैयार होगा इथेनॉल
चीनी की कीमत पर लगाम लगाने के साथ ही सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लीडिंग के अपने टारगेट को प्रभावित नहीं होने देना चाहती. इसके लिए गन्ने से होने वाली इथेनॉल सप्लाई की भरपाई मक्के और चावल से की जाएगी. देश में मक्के और चावल के अलावा दूसरे खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक है. सरकार की प्लानिंग के अनुसार चीनी मिलों को गन्ने के रस और बी-हेवी मोलासेस से इथेनॉल बनाने से रोका जा सकता है. मिलों को खासतौर पर सी-हेवी मोलासेस का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाएगी. इससे चीनी का अधिकतर हिस्सा निकाला जा चुका होता है. तेल कंपनियों की तरफ से जल्द इथेनॉल खरीद के लिए नए टेंडर जारी किये जा सकते हैं.
शुगर इंडस्ट्री को नुकसान नहीं
केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए पहले ही इसके एक्सपोर्ट पर पाबंदी पर लगा रखी है और व्यापारियों के लिए स्टॉक की लिमिट भी तय कर दी है. इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि गन्ने से इथेनॉल बनाने पर रोक लगाने से चीनी मिलों के बिजनेस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. चीनी की डिमांड और कीमतें मजबूत होने के कारण मिलों को इथेनॉल के बजाय सीधे चीनी बनाकर बेचने में ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है.
पेराई सत्र 10 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव
चीनी की किल्लत और बढ़ती कीमत के बीच चीनी मिलों की तरफ से अहम प्रस्ताव सामने आया है. चीनी मिलों ने आगामी पेराई सत्र को तय समय से करीब 10 दिन पहले शुरू करने की सिफारिश की है. आमतौर पर गन्ने का पेराई सत्र अक्टूबर मिड या अंत में शुरू होता है. लेकिन इस बार अक्टूबर के शुरू में ही इसे शुरू करने का प्लान बनाया जा रहा है. मिलों का कहना है कि पेराई सत्र को समय से पहले शुरू करने के लिए चीनी मिले पूरी तरह से तैयार हैं. चीनी मिलों के प्रस्ताव पर अब केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से मुहर लगनी बाकी है.



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