G News 24 : चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का कहर, 90 साल में सबसे भीषण बाढ़ का दावा !

रामघाट का पुल भी बाढ़ की चपेट में,सड़कों पर चली नाव...

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का कहर, 90 साल में सबसे भीषण बाढ़ का दावा !

सतना। चित्रकूट में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। मंदाकिनी नदी उफान पर है, गोरगी बांध टूटने से कई इलाकों में पानी घुस गया है। चित्रकूट के रामघाट का करीब 300 मीटर लंबा पुल बह गया, जबकि नागौद थाने में घुटनों तक पानी भरने से लोग घरों में कैद हो गए हैं। जिले में बारिश और बाढ़ का असर आवागमन पर भी पड़ा है. नागौद और मझगवां क्षेत्र के कई रास्तों पर पानी भरने से दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है. वहीं चित्रकूट-सतना मार्ग पर भी बाढ़ के पानी के चलते आवाजाही बाधित होने की स्थिति बनी है. मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर भी बारिश और जलभराव का असर पड़ने की खबर है.

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे चित्रकूट क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। मंदाकिनी नदी के जलस्तर में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी से चित्रकूट के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। सतना, चित्रकूट के साथ टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में भी कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है।

चित्रकूट में पिछले करीब 18 घंटे से लगातार तेज बारिश होने की वजह से मंदाकिनी नदी उफान पर है। स्थानीय लोगों के मुताबिक नदी का पानी करीब 30 फीट ऊंचाई तक पहुंच गया है। तेज बहाव ने नदी किनारे बसे क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। रामघाट और आसपास के इलाके पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। नदी का पानी कई दुकानों, होटलों, आश्रमों और घरों में घुस गया है।

90 साल में ऐसी बाढ़ नहीं देखी

स्थानीय बुजुर्ग राम सलोने के अनुसार, उन्होंने अपनी जिंदगी में मंदाकिनी नदी में इससे ज्यादा भयावह बाढ़ कभी नहीं देखी। उनका कहना है कि करीब 90 वर्षों में नदी का जलस्तर इस तरह नहीं बढ़ा। लगातार बारिश और तेज बहाव के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है।बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई जगह लोग अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। कुछ मकान चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं। सैकड़ों लोगों के घरों में पानी भर गया है और कई परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

रामघाट का पुल भी बाढ़ की चपेट में

मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर का सबसे ज्यादा असर रामघाट क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। तेज बहाव के कारण रामघाट का करीब 300 मीटर लंबा पुल बहने की जानकारी सामने आई है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन पर बड़ा असर पड़ा है और आसपास के क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ है।रामघाट के किनारे बड़ी संख्या में दुकानें और होटल संचालित होते हैं। बाढ़ का पानी इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में घुस गया है। धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में पानी भरने के बाद स्थानीय व्यापारियों को भी भारी नुकसान की आशंका है।

सड़कों पर नाव का सहारा

बाढ़ का पानी कई ग्रामीण इलाकों और मुख्य सड़कों तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के कटरा गूदर गांव में स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। तरौवां ग्रामीण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भी बाढ़ के पानी में डूब गया है।कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। ऐसे में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन और पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रही हैं।कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी बढ़ने के कारण जरूरी सामान और राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बन गया है। प्रशासन की ओर से लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी तथा जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है।

36 गांवों में अलर्ट

टोन्स हाइडल प्रोजेक्ट से पानी छोड़े जाने की संभावना के मद्देनजर 36 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने नदी और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।पानी छोड़े जाने की स्थिति में नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जानकीकुंड के आश्रमों में घुसा पानी

बाढ़ का असर चित्रकूट के जानकीकुंड क्षेत्र में भी व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है। यहां पंजाबी भगवान आश्रम, आरोग्यधाम, सद्गुरु सेवा संघ का आश्रम, जगद्गुरु रामभद्राचार्य आश्रम समेत बड़ी संख्या में आश्रम बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं।कई भवनों में पानी प्रवेश कर गया है। आश्रमों और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ते पानी के कारण स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।कुछ स्थानीय लोगों ने कई इमारतों में कंपन महसूस होने की बात भी कही है। इससे भवनों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ऐसी स्थिति में प्रशासन द्वारा भवनों की सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है।

छतों पर पहुंच रहे लोग

बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने के कारण कई परिवारों ने अपने घरों की छतों पर शरण ली है। जिन मकानों के चारों तरफ पानी भर गया है, वहां से लोगों को निकालना बचाव दलों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं। प्राथमिकता उन लोगों को सुरक्षित निकालने की है, जो पानी से घिरे मकानों में फंसे हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में नावों और अन्य उपलब्ध संसाधनों के जरिए लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

सतना समेत कई जिलों में बिगड़े हालात

चित्रकूट के अलावा सतना जिले में भी लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। वहीं टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में भी भारी बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है।कई ग्रामीण मार्गों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन द्वारा संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जा रही है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है।

राहत-बचाव अभियान जारी

मौजूदा हालात को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और स्थानीय राहत दल लगातार सक्रिय हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिन क्षेत्रों में सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां नावों के जरिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत महसूस की जा रही है। लगातार बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण हालात तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने की चुनौती भी है।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का यह उफान धार्मिक नगरी के लिए बेहद असामान्य स्थिति पैदा कर रहा है। रामघाट से लेकर जानकीकुंड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। आने वाले घंटों में बारिश और जलस्तर की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, नदी के किनारे न जाएं और राहत-बचाव दलों के निर्देशों का पालन करें।

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