G News 24 : सज्जन कुमार की श्रद्धांजलि सभा में जाना 3 BJP सांसदों को पड़ा गया भारी,नितिन नवीन ने लगाई फटकार !

 मुलाकात पर पार्टी में बवाल...

सज्जन कुमार की श्रद्धांजलि सभा में जाना 3 BJP सांसदों को पड़ा गया भारी,नितिन नवीन ने लगाई फटकार !

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व सांसद और 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार के परिवार से मुलाकात करना दिल्ली के तीन भाजपा सांसदों के लिए विवाद का कारण बन गया है। BJP के इन  सांसदों के श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने पर पार्टी में बवाल मच गया है। नितिन नवीन ने मामले को भांपते हुए इन्हे जमकर फटकार लगाई है। दिल्ली के 3 सांसद सिख विरोधी दंगों में दोषी और दिवंगत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे थे. 

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने दक्षिणी दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के सांसद योगेंद्र चंदोलिया के सज्जन कुमार के घर जाने पर नाराजगी जताते हुए उन्हें फटकार लगाई है।

तीनों सांसद हाल ही में सज्जन कुमार के घर पहुंचे थे और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब सज्जन कुमार के निधन के बाद उनकी श्रद्धांजलि और प्रार्थना सभा को लेकर तैयारियां चल रही थीं। सज्जन कुमार की 20 अगस्त को मौत हुई थी। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

सज्जन कुमार के घर जाने पर क्यों मचा विवाद?

सज्जन कुमार के परिवार से भाजपा सांसदों की मुलाकात सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता एचएस फुल्का ने भी सांसदों के इस कदम पर सवाल उठाया।फुल्का ने इस मुलाकात की आलोचना करते हुए कहा कि 1984 के दंगों के पीड़ित परिवार आज भी उस हिंसा का दर्द झेल रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मामले में सहानुभूति दंगा पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ होनी चाहिए।

उन्होंने तीनों भाजपा सांसदों के बहिष्कार की मांग तक कर दी। इस बयान के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आ गया। भाजपा के लिए यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि पार्टी लंबे समय से 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने का मुद्दा उठाती रही है।

नितिन नवीन ने सांसदों से जताई नाराजगी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों सांसदों के इस कदम पर नाराजगी जताई। बताया गया कि सांसदों को पार्टी की राजनीतिक लाइन और संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक तौर पर उठाए जाने वाले कदमों को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए।

हालांकि, भाजपा की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि तीनों सांसद सज्जन कुमार के परिवार से निजी हैसियत में मिलने गए थे। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि सांसद पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए वहां नहीं गए थे।इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व की नाराजगी सामने आने से यह साफ हो गया कि 1984 के दंगों से जुड़े किसी भी मामले में भाजपा नेताओं की सार्वजनिक गतिविधियां राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं।

कौन हैं रामवीर सिंह बिधूड़ी?

रामवीर सिंह बिधूड़ी दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं। दिल्ली की राजनीति में उनका लंबे समय से सक्रिय राजनीतिक आधार रहा है। लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर दक्षिणी दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया।उनके सज्जन कुमार के परिवार से मिलने जाने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हुई कि आखिर एक भाजपा सांसद ऐसे व्यक्ति के परिवार से मिलने क्यों पहुंचे, जिसे 1984 के दंगों के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।

कमलजीत सहरावत भी पहुंची थीं घर

कमलजीत सहरावत पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं। वह भी सज्जन कुमार के घर जाकर उनके परिवार से मिली थीं। उनके इस दौरे को लेकर भी सवाल उठे।हालांकि, भाजपा की ओर से दी गई सफाई के अनुसार यह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं था। पार्टी ने इसे सांसदों का निजी दौरा बताया है।

योगेंद्र चंदोलिया का नाम भी विवाद में

उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया भी उन तीन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने सज्जन कुमार के परिवार से मुलाकात की थी।तीनों सांसदों के दौरे की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस शुरू हुई। एक तरफ इसे मानवीय और निजी मुलाकात बताया गया, तो दूसरी तरफ 1984 के दंगों के पीड़ितों के संदर्भ में इसे राजनीतिक रूप से गलत संदेश देने वाला कदम बताया गया।

सज्जन कुमार कौन थे?

सज्जन कुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे और लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रहे। वह बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद भी रहे थे।1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और हजारों परिवार प्रभावित हुए। सज्जन कुमार का नाम भी 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में सामने आया। दिल्ली के राज नगर इलाके में दो सिखों की हत्या से जुड़े मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

इसके अलावा 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी वह उम्रकैद की सजा काट रहे थे। लंबे समय तक चले कानूनी मामलों के बाद वह जेल में थे और 20 अगस्त को उनका निधन हो गया।

20 अगस्त को हुआ था निधन

सज्जन कुमार की 20 अगस्त को मृत्यु हुई। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को नई दिल्ली में उनकी प्रार्थना सभा आयोजित की जानी है।इसी बीच भाजपा के तीन सांसदों के उनके घर पहुंचने की खबर सामने आई। चूंकि 1984 के दंगों का मुद्दा भाजपा की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है, इसलिए इस मुलाकात को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

1984 के दंगों को लेकर भाजपा का रुख

भाजपा लंबे समय से 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने का मुद्दा उठाती रही है। पार्टी कांग्रेस पर दंगों के दौरान हुई हिंसा को लेकर सवाल उठाती रही है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग करती रही है।ऐसे में भाजपा के तीन मौजूदा सांसदों का सज्जन कुमार के परिवार से मिलना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा करने वाला माना जा रहा है।हालांकि पार्टी की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सांसदों ने यह मुलाकात निजी तौर पर की थी और वे पार्टी प्रतिनिधि के रूप में वहां नहीं गए थे।

मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल

सांसदों की मुलाकात के बाद उठे विवाद ने एक बार फिर 1984 के दंगों के पुराने जख्मों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर भाजपा नेतृत्व ने सांसदों के कदम पर नाराजगी जताई है, वहीं पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि उनकी यात्रा निजी थी।

एचएस फुल्का की आलोचना के बाद विवाद और तेज हुआ। फुल्का लंबे समय तक 1984 दंगा पीड़ितों के मामलों की कानूनी लड़ाई से जुड़े रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में पीड़ित परिवारों की भावनाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले में भाजपा नेतृत्व की नाराजगी और पार्टी प्रवक्ता की सफाई के बाद राजनीतिक चर्चा जारी है। तीनों सांसदों की ओर से भी यही रुख सामने आया है कि उनकी मुलाकात निजी स्तर पर थी।

कुल मिलाकर, सज्जन कुमार के परिवार से हुई एक मुलाकात ने दिल्ली भाजपा की राजनीति में विवाद खड़ा कर दिया है। 1984 के दंगों से जुड़ी संवेदनशीलता के बीच भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नाराजगी ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।




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