जानें क्लेम के नियम और प्रक्रिया...
ट्रेन हादसे में मौत होने पर मिलेगा 18 लाख रुपये तक का मुआवजा !
ट्रेन से सफर के दौरान किसी अनहोनी या हादसे में यात्री की मौत होने पर रेलवे और IRCTC से ट्रैवल इंश्योरेंस के तहत अधिकतम 18 लाख रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है. जानिए रेलवे एक्ट के तहत क्लेम करने की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और मुआवजे के सभी महत्वपूर्ण नियम.
हालांकि, यह राशि किस परिस्थिति में और कितनी मिलेगी, यह दुर्घटना के कारण और टिकट बुकिंग के समय चुने गए विकल्पों पर निर्भर करता है. दरअसल, दुर्घटना के शिकार यात्रियों के परिजनों को दो तरह से मुआवजा मिल सकता है. पहला रेलवे की तरफ से और दूसरा टिकट बुकिंग के वक्त लिए गए इंश्योरेंस के आधार पर आईआरसीटीसी से संबद्ध इंश्योरेंस कंपनी से.
रेलवे की तरफ से मिलने वाला सरकारी मुआवजा
रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 124A के तहत किसी भी ट्रेन दुर्घटना या अप्रिय घटना जैसे आतंकवादी हमला, डकैती, दंगा, या चलती ट्रेन से अचानक गिर जाने से मौत होने पर परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. ऐसे मामलों में रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल की ओर से मौत के मामले में पीड़ित परिवार को 8,000,000 रुपये का कानूनी मुआवजा दिया जाता है. आमतौर पर बड़े हादसों के तुरंत बाद पीड़ित परिवार की तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए रेलवे की ओर से 50,000 रुपये तक की अनुग्रह राशि तुरंत नकद दी जाती है. हालांकि, गंभीर दुर्घटनाओं में सरकार इसे बढ़ाकर 10 लाख तक भी कर देती है.
IRCTC ट्रैवल इंश्योरेंस का मुआवजा
अगर आपने IRCTC की वेबसाइट (https://www.irctc.co.in/) या ऐप से ऑनलाइन टिकट बुक करते वक्त मात्र 35 से 45 पैसे का ऑप्शनल ट्रैवल इंश्योरेंस चुना था, तो ऐसे मामलों में इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से अलग से क्लेम मिलता है. ट्रेन हादसे में इंश्योरेंस वाले यात्रियों की मौत होने पर उनके नॉमिनी या कानूनी वारिस को 10 लाख रुपये का अतिरिक्त बीमा क्लेम दिया जाता है. इस तरह रेलवे की ओर से मिलने वाला 8 लाख रुपये का मुख्य मुआवजा और IRCTC ट्रैवल इंश्योरेंस का 10 लाख का क्लेम मिलाकर यात्रियों के परिजनों को 18 लाख रुपये मिल सकते हैं.
इन परिस्थितियों में नहीं मिलता है मुआवजा?
- रेलवे एक्ट की धारा 124A के अनुसार नीचे बताए गए किसी भी तरह से मौत होने पर रेलवे की ओर से किसी भी तरह का मुआवजा नहीं दिया जाता है.
- यात्री द्वारा आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास करने पर.
- खुद को जानबूझकर चोट पहुंचाने या गैरकानूनी रूप से रेलवे पटरी पार करने के दौरान हुए हादसे में.
- प्राकृतिक कारणों या किसी पुरानी बीमारी जैसे ट्रेन में अचानक हार्ट अटैक आना से हुई सामान्य मौत के मामले में. अत्यधिक नशे की हालत में या खुद की गंभीर लापरवाही के कारण हुए हादसे पर.
टिकट खो जाने पर भी मिलता है मुआवजा
बिना टिकट या टिकट खो जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के मुताबिक अगर दुर्घटना में किसी वैध यात्री का टिकट खो जाता है या वह गिर जाता है, तो केवल टिकट न होने के आधार पर मुआवजा खारिज नहीं किया जा सकता. परिस्थितियों के आधार पर मुआवजा देना होगा. कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, रेलवे की जवाबदेही सिर्फ चलती ट्रेन में ही नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में प्रवेश करने से लेकर ट्रेन से उतरने की पूरी प्रक्रिया के दौरान लागू होती है.
मुआवजे का क्लेम कैसे करें?
- दुर्घटना के तुरंत बाद GRP स्टेशन पर जाकर घटना की शिकायत दर्ज कराएं और एफआईआर (FIR) की प्रति प्राप्त करें.
- मृतक का पहचान पत्र, ट्रेन टिकट या PNR नंबर, जीआरपी पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र संभाल कर रखें.
- मुआवजे के लिए रेलवे दावा न्यायाधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट (https://claims.indianrail.gov.in/) पर जाकर या उनके क्षेत्रीय कार्यालय में फॉर्म भरकर आवेदन जमा करें.
ई-टिकट इंश्योरेंस से 10 लाख पाने के लिए ऐसे करें क्लेम
IRCTC ई-टिकट बुक करते समय चुने गए मात्र 35-45 पैसे के ट्रैवल इंश्योरेंस से ट्रेन हादसे में मौत होने पर नॉमिनी को 10 लाख रुपये का क्लेम मिलता है. ऐसे में अगर आपने भारतीय रेलवे (IRCTC) की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ई-टिकट बुक करते समय ट्रैवल इंश्योरेंस (Travel Insurance) का विकल्प चुना था, तो किसी अप्रिय घटना या दुर्घटना में यात्री की मौत होने पर नॉमिनी या कानूनी वारिस 10 लाख रुपये तक के बीमा क्लेम के हकदार होते हैं. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि क्लेम पाने के लिए हादसे के 4 महीने यानी 120 दिन के भीतर संबंधित इंश्योरेंस कंपनी से सीधा संपर्क कर दस्तावेज सबमिट करना अनिवार्य होता है.



0 Comments