10 साल से बंद है गैर-प्रशासनिक सेवाओं का रास्ता...
राज्य प्रशासनिक सेवा के 13 अधिकारी बनेंगे आईएएस,गैर-प्रशासनिक अफसरों की उम्मीदें टूटी !
भोपाल। प्रदेश में आईएएस संवर्ग में पदोन्नति की प्रक्रिया एक बार फिर राज्य प्रशासनिक सेवा तक सिमटती नजर आ रही है। वर्ष 2025 के लिए आईएएस संवर्ग में नियुक्ति के 13 पद उपलब्ध हैं और इनके लिए 39 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाएंगे।सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इसे जल्द संघ लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा।
इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2016 के बाद गैर-प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों के लिए आईएएस बनने का रास्ता क्यों नहीं खुल पाया। जबकि राज्य के कई अन्य विभागों में काम करने वाले अधिकारियों को भी उनके अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर आईएएस संवर्ग में नियुक्ति का अवसर दिए जाने का प्रावधान है।
आईएएस संवर्ग में नियुक्ति के लिए एक पद के मुकाबले तीन अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाते हैं। इस लिहाज से 13 पदों के लिए 39 नाम भेजे जाएंगे। सेवा अभिलेख और पात्रता के आधार पर विभागीय पदोन्नति समिति चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। समिति में यूपीएससी के अध्यक्ष या सदस्य, मुख्य सचिव, एक अपर मुख्य सचिव और केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के दो अधिकारी शामिल होंगे। अंतिम चयन इसी प्रक्रिया के बाद होगा।
10 साल से बंद है गैर-प्रशासनिक सेवाओं का रास्ता
मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 में चार गैर-प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में नियुक्ति का अवसर मिला था। इनमें वित्त, पंजीयन, जेल और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल थे। इसके बाद करीब एक दशक से इस वर्ग के अधिकारियों के नाम प्रस्तावित नहीं किए गए। यही वजह है कि गैर-प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी अब इसे केवल पदोन्नति का मामला नहीं, बल्कि समान अवसर और करियर प्रगति से जुड़ा नीतिगत सवाल मान रहे हैं।
दूसरे राज्यों में मिल रहा अवसर
मध्य प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ का कहना है कि गुजरात, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में गैर-प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में आने के अवसर मिलते रहे हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में इस व्यवस्था को लंबे समय से लागू नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि अलग-अलग विभागों में लंबे समय तक काम करने वाले अफसरों के पास प्रशासनिक अनुभव और विशेषज्ञता होती है। ऐसे अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में आने का अवसर मिलने से प्रशासन में विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव भी शामिल हो सकता है।
सरकार के सामने दो अलग मांगें
मामला अब दो पक्षों की मांगों के बीच दिखाई दे रहा है। एक ओर गैर-प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आईएएस संवर्ग में नियुक्ति के अवसर की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर राज्य प्रशासनिक सेवा संघ चाहता है कि आईएएस संवर्ग में चयन से वंचित रह जाने वाले पात्र अधिकारियों के लिए छत्तीसगढ़ की तर्ज पर उच्चतम वेतनमान की व्यवस्था की जाए। छत्तीसगढ़ में अप्रैल 2026 से राज्य प्रशासनिक सेवा के नियमों में संशोधन कर ऐसी व्यवस्था लागू की गई है। मध्य प्रदेश में भी इसी मॉडल की मांग उठ रही है।
कमल नाथ सरकार में बनी थी सहमति
गैर-प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस संवर्ग में अवसर देने का मुद्दा नया नहीं है। कमल नाथ सरकार के कार्यकाल में भी इस दिशा में सहमति बनी थी। तत्कालीन सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने इसकी पहल की थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर आईएएस पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के साथ यह सवाल सामने है कि क्या इस बार भी 13 पदों का पूरा अवसर सिर्फ स््रस् अधिकारियों तक सीमित रहेगा, या लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे गैर-प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए भी रास्ता खोला जाएगा।



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