G News 24 : ग्वालियर में जिस तरह से विकास हो रहा है उसकी पोल खोल का ढोल फाड़ गए दुबे जी !

 आख़िर एसीएस संजय दुबे ने ऐसा कहा कि  ...

ग्वालियर में जिस तरह से विकास हो रहा है उसकी पोल खोल का ढोल फाड़ गए दुबे जी ! 


ग्वालियर। "ग्वालियर बहुत सुंदर शहर हुआ करता था" इस पंक्ति पर जोर उन लोगों के मुंह पर ज़ोर का झापड़ है जो विकास पुरुष विकास के मसीहा विकास के धुरंधर विकास के बड़े पापा बनने का दावा करते हैं । इस पंक्ति पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने दो बार इस पंक्ति का उपयोग किया और कहा कि यह कैसा विकास है ? जिसमें चारों तरफ सड़क खुदी पड़ी हैं धूल उड़ रही है। श्री दुबे जी ने उन लोगों के मुंह पर ज़ोर का थप्पड़ मारा है जो विकास के नाम पर झूठी रिपोर्ट है देकर स्टेट में बैठी सरकार से वाह-वाही लूटने का प्रयास करते रहते हैं। जो लोग स्वयं को विकास पुरुष/ मसीहा दिखाने का प्रयास करने में जुटे रहते हैं।

ग्वालियर के नेता विकास के नाम पर श्रेय लेने के लिए एक ही प्रोजेक्ट की दो दो बार, दो दो लोग अपने-अपने तरीके से समीक्षा करने पहुंचते हैं । लेकिन प्रोजेक्ट है कि फिर भी जिस गति से चल रहा है उसे देखकर तो नहीं लगता कि यह 2027 में भी पूरा हो पाएगा। ग्वालियर की सड़कें आज भी खुदी पड़ी हैं धूल के ग़ुबार उड़ रहे हैं और अगले महीने से फिर मानसून सक्रिय हो जाएगा । एक बार फिर से सड़कों में सुरंग बनेगी और इनमें वाहन फसते नजर आएंगे क्योंकि स्वर्णरेखा इस समय पूरी तरह छत-विछत हो चुकी है ! तो स्वाभाविक है कि जो पानी नाले के माध्यम से शहर से बाहर निकलता था वह पानी या शहर की सड़कों पर शहर की गलियों में और लोगों के घरों में भरना तय है! 

इतना लचर इतना बेबस ग्वालियर कभी नहीं रहा । ग्वालियर के प्रभारी पर्यटन मंत्री जी दौरे करते रहे, लेकिन वही ढाक के तीन पात ! उनके आने या ना आने से शहर में चल रहे विकास कार्यों या शहर की होती दुर्दशा पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

शहर में जगह-जगह बनाए गए पब्लिक टॉयलेट की स्थिति ऐसी है कि वहां 2 सेकंड भी खड़ा होना संभव नहीं है तो लोग उसका उपयोग कैसे करेंगे ! ट्रैफिक का हाल बे- हाल है। शायद यही सब देखकर दुबे जी की आत्मा काँप गई और उनको कहना पड़ा कि ग्वालियर बहुत सुंदर शहर हुआ करता था...

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