G News 24 : भर्ती प्रक्रियापूरी नहीं पर DPI का घेराव,10,700 युवा बोले आदेश जारी नहीं हुए तो आंदोलन होगा !

 भड़का चयनित शिक्षकों का गुस्सा...

भर्ती प्रक्रियापूरी नहीं पर DPI का घेराव,10,700 युवा बोले आदेश जारी नहीं हुए तो आंदोलन होगा !

भोपाल। भोपाल में हजारों चयनित शिक्षक अभ्यर्थी जॉइनिंग में देरी से नाराज होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। 9 महीने से नियुक्ति लंबित होने पर हजारों उम्मीदवार डीपीआई कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं। 2022 से चल रही भर्ती प्रक्रिया 2026 तक पूरी नहीं होने से 10,700 युवा प्रभावित हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि नियम के अनुसार 3 महीने में जॉइनिंग होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक न चॉइस फिलिंग हुई और न ही नियुक्ति आदेश जारी हुए। प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद देरी पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द आदेश जारी नहीं हुए तो आंदोलन और उग्र किया।

चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) कार्यालय के सामने हजारों की संख्या में वर्ग-2 के चयनित अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं। तेज गर्मी और धूप के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। उनका साफ कहना है कि यदि जल्द नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

चार साल से अटकी भर्ती प्रक्रिया

अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। परीक्षा, मूल्यांकन, दस्तावेज सत्यापन जैसी सभी प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन 2026 तक भी अंतिम नियुक्ति नहीं दी गई। सितंबर 2025 में परिणाम घोषित होने के बाद उम्मीद थी कि जल्द जॉइनिंग मिलेगी, लेकिन 8-9 महीने बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया अधर में है।

नियमों की अनदेखी का आरोप...

  • प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों ने परीक्षा संचालन नियम पुस्तिका की धारा 3.28 का हवाला देते हुए कहा कि चयन सूची जारी होने के तीन माह के भीतर नियुक्ति आदेश देना अनिवार्य है।
  • इसके बावजूद विभाग द्वारा समयसीमा का पालन नहीं किया गया, जिससे अभ्यर्थियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
  • चॉइस फिलिंग और पात्र-अपात्र सूची भी लंबित
  • अभ्यर्थियों का आरोप है कि अब तक न तो पात्र-अपात्र सूची जारी की गई है और न ही चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई है।
  • नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच कई बार अधिकारियों से मुलाकात की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।
  • मार्च में चॉइस फिलिंग और अप्रैल में जॉइनिंग शुरू करने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ।

10,700 चयनित युवाओं का भविष्य संकट में...

करीब 10,700 चयनित अभ्यर्थी इस देरी से प्रभावित हैं। नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन शिक्षक अब भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब भर्ती प्रक्रिया पर कोई कोर्ट स्टे नहीं है, तो देरी के पीछे क्या कारण हैं, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। हालिया रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रही है—

  • 1,895 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है
  • 29,116 स्कूलों में करीब 99,682 शिक्षकों की कमी
  • जब स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, तो चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने में देरी क्यों की जा रही है?
  • ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 70% पद ही भरे...

प्रदर्शन में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अपनी समस्याएं साझा कीं....

  • छतरपुर के विवेक तिवारी के अनुसार, कई उम्मीदवार वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है।
  • कुछ अभ्यर्थियों के परिवार इलाज के अभाव में जूझ रहे हैं, तो कुछ के परिजन इंतजार करते-करते दुनिया छोड़ चुके हैं।
  • कई उम्मीदवार 40 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, जिससे उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
  • इंदौर के दिनेश ठाकुर ने बताया कि कई अभ्यर्थी किसान परिवारों से आते हैं। कोई कोचिंग पढ़ाकर गुजर-बसर कर रहा है, तो कोई छोटे-मोटे काम कर परिवार चला रहा है।

बार-बार आश्वासन, लेकिन कार्रवाई नहीं

  • अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने कई बार भोपाल पहुंचकर प्रदर्शन किया। हर बार अधिकारियों ने जल्द प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
  • धीरेंद्र चौरसिया के अनुसार, लिखित और मौखिक आश्वासन मिलने के बावजूद पोर्टल पर कोई अपडेट नहीं है।
  • आंदोलन तेज करने की चेतावनी
  • प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
  • उनका कहना है कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य और सम्मान का मुद्दा है।

भोपाल में चल रहा यह प्रदर्शन अब सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और युवाओं के भरोसे से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस बढ़ते आक्रोश को कैसे संभालते हैं और कब तक इन 10,700 युवाओं को उनका हक मिल पाता है।

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