G News24 : मंदिर सरकारी है तो वहां का पुजारी सिर्फ उस मंदिर का प्रबंधक होता है, उसका मालिक नहीं !

 रामजानकी मंदिर पर पुजारी ने हक की याचिका का हाईकोर्ट ने किया खारिज...

मंदिर सरकारी है तो वहां का पुजारी सिर्फ उस मंदिर का प्रबंधक होता है, उसका मालिक नहीं !

ग्वालियर। ग्वालियर के चावड़ी बाजार स्थित रामजानकी मंदिर को लेकर लम्बे समय से चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चावड़ी बाजार स्थित इस प्राचीन मंदिर पर मालिकाना हक को लेकर दावा करने वाले पुजारी की याचिका खारिज कर दी गयी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह मंदिर किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश सरकार के माफी औकाफ विभाग की शासकीय जमीन पर स्थित है।

पंडित कैलाशनारायण दीक्षित ने हाईकोर्ट में दावा किया था मंदिर स्थित संपत्ति उनके पूर्वजों के समय से उनके स्वामित्व में है। उन्होनंे नगरनिगम के टैक्स रजिस्टर और मतदाता सूची के आधार पर स्वयं को मालिक बताया है।

मंदिर श्रीराम जी दर्ज हैं पुराने रिकॉर्ड में

हाईकोर्ट ने जब पुराने रिकॉर्ड तलब किये तो सामने आया कि 1960-1978 तक के कागजातों में संपत्ति के मालिक के रूप में सिर्फ ‘‘मंदिर श्री रामजी’’ ही दर्ज था। उस पर टैक्स भी माफ था और बाद में पुजारी का नाम रिकॉर्ड में कैसे जुड़ा है। इसका कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

सरकार का पक्ष मजबूत, दावा खारिज

शासन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता मृत्युंजय गोस्वामी ने तर्क दिया कि यह मंदिर शासकीय भूमि पर है और इस पर कोई निजी दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पुजारी का दावा खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान ऐसे दस्तावेज पेश किए गए, जिनसे साबित हुआ कि वादी के दादा बाबूलाल दीक्षित को मंदिर में पूजा-अर्चना के बदले 15 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था।कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति वेतनभोगी पुजारी है, वह संपत्ति का स्वामी नहीं हो सकता।

मामला तब सामने आया जब पुजारी परिवार मंदिर में मरम्मत और तोड़फोड़ का काम कर रहा था, जिसे 14 मार्च 2005 को तहसीलदार ने रोक दिया था। कोर्ट ने इस कार्रवाई को मप्र भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत पूरी तरह वैध माना। अदालत के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि धार्मिक स्थल की सेवा करने वाला पुजारी उसका मालिक नहीं होता, बल्कि वह केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है।

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