G News 24: रेल यात्रियों से किन्नरों द्वारा की जा रही अभद्रता,रेल सुरक्षा और गरिमा दोनों पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं !

 “नेग की परंपरा या जबरन वसूली,स्थानीय प्रशासन एवं रेलवे को भी जागना होगा”

रेल यात्रियों से किन्नरों द्वारा की जा रही अभद्रता,रेल सुरक्षा और गरिमा दोनों पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं !

भारतीय समाज में किन्नर समुदाय का अपना एक विशिष्ट स्थान और सम्मान रहा है। किसी भी शुभ अवसर जैसे विवाह, संतान जन्म या गृह प्रवेश पर उनका आना शुभ माना जाता है। लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उन्हें नेग, दान या भेंट देते हैं और बदले में उनकी दुआएं प्राप्त करते हैं। यह परंपरा सदियों से आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना पर आधारित रही है।

किन्तु वर्तमान समय में इस परंपरा का स्वरूप कई स्थानों पर विकृत होता दिखाई दे रहा है। स्वेच्छा से दिए जाने वाले नेग को कुछ लोगों द्वारा “अधिकार” समझ लिया गया है और उसे जबरन वसूली का रूप दे दिया गया है। हजारों रुपये, सोना-चांदी या महंगे वस्त्रों की मांग करना न केवल अनुचित है, बल्कि उस व्यक्ति की आर्थिक स्थिति की अनदेखी भी है, जो महंगाई के इस दौर में पहले ही अपने परिवार की जरूरतों से समझौता कर रहा होता है।

यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि कोई भी व्यक्ति नेग इसलिए देता है क्योंकि वह सम्मान करता है, दुआएं चाहता है और सामाजिक परंपरा का निर्वाह करता है—न कि अपमान सहने के लिए। यदि किसी को उसकी इच्छा के विरुद्ध मजबूर किया जाए, उसके मना करने पर सार्वजनिक रूप से अभद्रता की जाए, गालियां दी जाएं या उसके परिवार के सामने अपमानित किया जाए, तो यह केवल सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी है।

विशेष चिंता का विषय यह है कि ट्रेनों में, विशेषकर जनरल और स्लीपर कोचों में, यात्रियों से जबरन पैसे वसूलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ये वही यात्री होते हैं, जो सीमित संसाधनों के कारण सामान्य श्रेणी में यात्रा करने को विवश होते हैं। ऐसे में उनसे जबरन वसूली करना उनकी मजबूरी का शोषण है। किसी भी व्यक्ति या समूह को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह सार्वजनिक स्थान पर किसी को डराकर, धमकाकर या अपमानित कर पैसे वसूले।

ट्रेन जैसे सार्वजनिक परिवहन में इस प्रकार की घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा और गरिमा दोनों पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं। इस संदर्भ में रेलवे प्रशासन, रेलवे पुलिस और रेल मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। आवश्यक है कि ट्रेनों में इस प्रकार की अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए,और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

  • बार-बार ऐसी हरकत करने वालों को ट्रेनों में यात्रा करने से प्रतिबंधित किया जाए।
  • टिकट जांच की व्यवस्था सभी पर समान रूप से लागू की जाए, चाहे वह कोई भी हो।
  • यात्रियों के लिए शिकायत दर्ज कराने की सरल और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।

समाज में सम्मान पाने का आधार मर्यादा और व्यवहार होता है, न कि भय और दबाव। किन्नर समुदाय को भी यह समझना होगा कि उनकी गरिमा उनकी विनम्रता और आशीर्वाद में है, न कि जबरन वसूली या अभद्रता में।

यह समय है कि परंपरा को उसकी मूल भावना—सम्मान, सहानुभूति और स्वेच्छा—के साथ पुनः स्थापित किया जाए। साथ ही, प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी वर्ग से हो, कानून से ऊपर नहीं है- दिव्या सिंह

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