बहुजन बौद्धिक शिखर सम्मेलन में शिक्षा,संविधान और सामाजिक न्याय पर हुआ मंथन ...
कांग्रेस ने शिक्षकों को बार-बार परीक्षाओं में उलझाने के निर्णय का विरोध किया !
भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने आज भोपाल में आयोजित बहुजन बौद्धिक शिखर सम्मेलन में सहभागिता की। इस अवसर पर CWC सदस्य गुरदीप सिंह सप्पल, उदयन वाजपेयी, बादल सरोज, श्रीमती किरण अहिरवार, सुनील बोरसे, इनायत अब्बास, डॉ. देवेंद्र धाकड़ एवं डॉ. (मेजर) मनोज राजे सहित अनेक प्रबुद्धजनों की उपस्थिति रही।
सम्मेलन में संविधान के मूल्यों, सामाजिक न्याय, समानता और देश-प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर एवं सार्थक संवाद हुआ। इस अवसर पर जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने कहा कि किसी भी देश की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है, लेकिन मध्यप्रदेश में शिक्षा भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 20 वर्षों में भाजपा सरकार ने प्रदेश के बच्चों से उनका भविष्य छीन लिया है।
उन्होंने कहा कि देश में कई विश्वविद्यालय आज डिग्रियां बेचकर अपना खर्च चला रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के पतन का संकेत है। मध्यप्रदेश की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां जनसंख्या बढ़ने के बावजूद स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है।
श्री पटवारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जहां पहले प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 50 लाख बच्चे स्कूलों में थे, वहीं अब यह संख्या घटकर करीब 1 करोड़ रह गई है। यानी लगभग 50 लाख बच्चे शिक्षा से दूर हो गए हैं। उन्होंने इसे सरकार की विफल नीतियों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा का बजट 7,000 करोड़ से बढ़ाकर 37,000 करोड़ कर दिया, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार नहीं हुआ।
यह स्पष्ट करता है कि सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं में शिक्षा शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है, जहां शिक्षा की स्थिति अत्यंत कमजोर है। शिक्षकों को बार-बार परीक्षाओं में उलझाने के निर्णय का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो रही है। सवाल यह है कि आखिर मध्यप्रदेश में शिक्षक की स्थिरता कब सुनिश्चित होगी।
श्री पटवारी ने अपने संबोधन में पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए संस्थानों की स्थापना की गई थी, चाहे वह स्कूल स्तर हो या कॉलेज स्तर, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ था। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में संवैधानिक मूल्यों की लगातार अनदेखी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी स्वयं को कानून और संविधान से ऊपर मानते हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।उन्होंने पीएम केयर्स फंड सहित विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश का सर्वोच्च पद ही जवाबदेही से बचता हुआ नजर आए, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री, संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।
श्री पटवारी ने हाल की विभिन्न घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इंदौर में पानी में जहर के कारण 35 लोगों की मौत हो जाना और जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होना, या बच्चों की मौत जैसी घटनाओं में दोषियों का बच निकलना, यह दर्शाता है कि कानून का शासन कमजोर हुआ है।उन्होंने कहा कि यदि संविधान के प्रावधानों का सही तरीके से पालन होता, तो दोषियों को सख्त सजा मिलती। लेकिन आज व्यवस्था में जवाबदेही का अभाव है।
उन्होंने कहा कि आज यह सबसे बड़ा प्रश्न है कि क्या देश और प्रदेश के चुने हुए प्रतिनिधि — सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री — स्वयं को संविधान से ऊपर मानने लगे हैं। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और इस पर देश की जनता को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अंत में श्री पटवारी ने कहा कि यह समय संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए एकजुट होने का है।


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