बंगाल में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन...
ममता के करीबी माने जाने वाले चीफ सेक्रेटरी-डीजीपी समेत सभी टॉप अफसरों को हटाया !
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मी तेज हो गई है. चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही चुनाव आयोग ने राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया है.ममता के करीबी माने जाने वाले चीफ सेक्रेटरी-डीजीपी समेत सभी टॉप अफसरों को हटा दिया है।अब तबादले का CM कर रहीं विरोध !
आयोग ने राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पद से हटाकर नई तैनाती का आदेश जारी किया है. इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति भी गर्म हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है और इसके खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग ने यह फैसला राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया है. आयोग का कहना है कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराना उसकी जिम्मेदारी है, इसलिए जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक बदलाव किए जाते हैं.
चीफ सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी को हटाया...
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से हटा दिया है. उनकी जगह 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. इसके अलावा राज्य के होम सेक्रेटरी जगदीश प्रसाद मीणा को भी पद से हटाकर नई नियुक्ति का आदेश दिया गया है. उनकी जगह 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संगमित्रा घोष को प्रिंसिपल सेक्रेटरी, होम एंड हिल अफेयर्स के पद पर तैनात किया गया है. ECI के सेक्रेटरी सुजीत कुमार मिश्रा के साइन किए हुए लेटर में लिखा था, "मुझे यह बताने का निर्देश मिला है कि कमीशन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के आम चुनाव, 2026 के लिए चुनाव की तैयारियों का रिव्यू किया है और यह निर्देश दिया है: दुष्यंत नरियाला, (IAS-1993) को पश्चिम बंगाल सरकार का चीफ सेक्रेटरी बनाया जाए. संघमित्रा घोष, (IAS-1997) को पश्चिम बंगाल सरकार का प्रिंसिपल सेक्रेटरी, होम एंड हिल अफेयर्स बनाया जाए."
नंदिनी चक्रवर्ती ममता की मानी जाती हैं खास...
1994 बैच की आईएएस अधिकारी नंदिनी चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल की पहली महिला चीफ सेक्रेटरी बनी थीं. उन्हें जनवरी 2026 में सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने इस पद पर नियुक्त किया था. कई रिपोर्टों में उन्हें ममता बनर्जी की करीबी और भरोसेमंद अधिकारी माना गया है. एक विवाद तब भी हुआ था जब ईडी की छापेमारी के दौरान वे ममता बनर्जी के साथ I-PAC दफ्तर पहुंच गई थीं, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे. इसलिए राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि नंदिनी चक्रवर्ती मुख्यमंत्री के भरोसे की अफसरों में थीं।
डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर भी बदले...
चुनाव आयोग की कार्रवाई सिर्फ प्रशासन तक सीमित नहीं रही. पुलिस विभाग में भी बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं. राज्य के डीजीपी पीयूष पांडेय को उनके पद से हटाकर सिद्ध नाथ गुप्ता को नया डीजीपी नियुक्त किया गया है. वहीं कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतीम सरकार को भी पद से हटाकर अजय कुमार नंद को नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है. इसके अलावा कुछ और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं. नटराजन रमेश बाबू को डीजी, करेक्शनल सर्विसेज बनाया गया है. अजय मुकुंद रानाडे को एडीजी और आईजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) की जिम्मेदारी दी गई है. चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह बदलाव जरूरी है.
आयोग का सख्त आदेश, तुरंत लागू होंगे फैसले...
चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन सभी आदेशों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए. आयोग ने यह भी कहा है कि जिन अधिकारियों को हटाया गया है, उन्हें चुनाव खत्म होने तक किसी भी चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. इसके साथ ही आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि नए अधिकारियों के पदभार संभालने की कम्प्लायंस रिपोर्ट 16 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजे तक भेजी जाए.
ममता बनर्जी का विरोध, सड़क पर उतरने का ऐलान...
इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस कदम का विरोध किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ममता बनर्जी इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाली हैं और इसे लेकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी तैयार रहने को कहा गया है. तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक ढांचे में इस तरह के बदलाव राजनीतिक दबाव में किए जा रहे हैं.
टीएमसी और बीजेपी में बयानबाजी तेज...
इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी रॉय ने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कहा कि जनता टीएमसी के साथ है और इस तरह के फैसलों से चुनाव का नतीजा नहीं बदलेगा. टीएमसी नेताओं का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह राजनीतिक है और इसका मकसद चुनाव से पहले राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करना है.
वहीं दूसरी ओर, BJP ने कहा कि चुनाव आयोग को यह पक्का करना चाहिए कि पार्टी से जुड़े कोई भी अधिकारी राज्य में चुनाव मशीनरी का हिस्सा न हों. बंगाल BJP के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा, “2021 के विधानसभा चुनावों से पहले, उसके दौरान और बाद में हमारे लगभग 250 कार्यकर्ता और सदस्य मारे गए. हमने ECI से यह पक्का करने की अपील की कि सत्ताधारी पार्टी से जुड़े कोई भी अधिकारी चुनाव मशीनरी का हिस्सा न हों.” इसलिए चुनाव आयोग का यह तबादते का कदम बिल्कुल सही है और इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगी.
कब होंगे बंगाल में चुनाव !
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों का भी ऐलान कर दिया है. राज्य में दो चरणों में मतदान होगा 23 अप्रैल और 29 अप्रैल. सभी सीटों के लिए मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि आयोग की कोशिश है कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और हिंसा मुक्त तरीके से कराए जाएं.










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