खलीफा का बाज दे रहा होर्मुज स्ट्रेट पर पहरा...
ईरान के ‘ईगल 44’ के जाल से निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है !
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का गुप्त ईगल 44 एयरबेस फिर चर्चा में है. होर्मुज स्ट्रेट के पास पहाड़ों के नीचे बना यह भूमिगत सैन्य अड्डा लड़ाकू विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल तैनाती में सक्षम है. इसका उद्देश्य हमले की स्थिति में सुरक्षित रहकर जवाबी कार्रवाई यानी सेकंड स्ट्राइक क्षमता बनाए रखना है.
ईरान ने अपने सामरिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई गुप्त सैन्य ठिकाने विकसित किए हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ईगल 44 एयरबेस की हो रही है, जिसे ईरान की भूमिगत सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है. ये एयरबेस दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़ी भूमिका निभाता है.
रिपोर्टों के अनुसार, ईगल 44 एयरबेस पहाड़ों के नीचे सैकड़ों मीटर की गहराई में बनाया गया है, जिससे यह आधुनिक बमों और मिसाइल हमलों से काफी हद तक सुरक्षित माना जाता है. इस बेस का निर्माण ईरान की उस सैन्य अवधारणा के तहत किया गया है जिसे आम तौर पर मिसाइल सिटी कहा जाता है. इस रणनीति का उद्देश्य अपने सैन्य संसाधनों को भूमिगत सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर तेजी से जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता बनाए रखना है.
होरमोजगान प्रांत में स्थित है ईगल 44
ईगल 44 एयरबेस दक्षिण-पश्चिमी ईरान के होरमोजगान प्रांत में स्थित है. रिपोर्टों के अनुसार, यह ठिकाना बंदर अब्बास से लगभग 120 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में एक दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र में बनाया गया है. इसका अनुमानित स्थान लगभग 28.04° N, 55.52° E निर्देशांक के आसपास बताया जाता है. इस स्थान का चुनाव रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सीधे तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है.
वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम मार्ग
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी चैनल से होकर गुजरता है. ऐसे में इस क्षेत्र के आसपास स्थित किसी भी सैन्य ठिकाने का सामरिक महत्व बहुत अधिक होता है. ईरान के लिए यह एयरबेस इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर निगरानी और सैन्य प्रतिक्रिया की क्षमता को मजबूत करता है. रिपोर्टों के मुताबिक, ईगल 44 एयरबेस में लड़ाकू विमान, बमवर्षक और ड्रोनों की तैनाती संभव हैं. इसके अलावा यह बेस लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों से लैस विमानों को तैयार करने और उन्हें सुरक्षित भूमिगत रनवे से लॉन्च करने की सुविधा भी देता है.
ईरान के सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, ईगल 44 जैसे ठिकानों का मुख्य उद्देश्य सेकंड स्ट्राइक क्षमता सुनिश्चित करना है. यानी यदि किसी हमले में ऊपर मौजूद सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचता है, तब भी भूमिगत ठिकानों से जवाबी कार्रवाई की जा सके. हाल के क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ऐसे ठिकानों को गुप्त युद्ध योजना का हिस्सा माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन भूमिगत सैन्य अड्डों के कारण ईरान की रक्षा क्षमता और रणनीतिक लचीलापन काफी बढ़ जाता है.


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