G News 24 : संगीत एवं स्थापत्य वाले ग्वालियर की पहचान,अब धूल, धुआं और ट्रैफिक जाम से होती हैं !

फूलबाग से नदी गेट तक सुपर स्ट्रक्चर (एलिवेटेड रोड) के अंतर्गत पीयर कैप का काम जोरों पर है...

संगीत एवं स्थापत्य वाले ग्वालियर की पहचान,अब धूल, धुआं और ट्रैफिक जाम से होती  हैं !

एक समय था जब ग्वालियर की पहचान संगीत एवं स्थापत्य वाले शहर के रूप में होती थी।  साफ-सुथरी सड़कें एवं बड़े - बड़े चौराहे इसकी खूब सूरती को और बड़ा देते थे। लेकिन बीते कुछ वर्षों से विकास के नाम पर की जा रही तोड़-फोड़ और वाहनों की बढ़ती बे-तहासा भीड़ के कारण ग्वालियर की तस्वीर इन दिनों बदली हुई है।इसी के कारण  ग्वालियर की पहचान अब धूल, धुआं और ट्रैफिक जाम वाले शहर के रूप में होने लगी है। इस समय करोड़ों की लागत से बन रहा एलिवेटेड रोड फिलहाल शहरवासियों के लिए राहत नहीं, बल्कि रोजाना की दुविधा बन गया है। फूलबाग से गिरवाई तक फैले इस मेगा प्रोजेक्ट के नाम पर हर गली-नुक्कड़ में सिर्फ धूल ही धूल उड़ रही है। लोग घर से बाहर निकलते ही मुंह-नाक ढकने को मजबूर, आंखें जल रही हैं, सांस फूल रही है। फूलबाग स्थित महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से लेकर गुरुद्वारा, नदी गेट, शिंदे की छावनी, छप्परवाले पुल, कॉर्मल स्कूल रोड, जीवाजीगंज, नई सडक़, कमानी पुल और समाधिया कॉलोनी से गिरवाई तक हर तरफ उड़ती धूल से लोग परेशान हैं और आसपास के एरिया व सडक़ पर पानी छिडक़ाव की मांग कर रहे है।

फूलबाग स्थित महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से लेकर गुरुद्वारा, नदी गेट, शिंदे की छावनी, छप्परवाले पुल, कॉर्मल स्कूल रोड, जीवाजीगंज, नई सडक़, कमानी पुल और समाधिया कॉलोनी से गिरवाई तक पूरी पट्टी धूल की चादर ओढ़े बैठी है। निर्माण के दौरान खुदाई, मशीनरी और मटेरियल की आवाजाही से धूल का ऐसा गुबार कि दिन में भी अंधेरा छा जाता है। लोग घरों में बंद रहने को मजबूर, बच्चे-बूढ़े-बीमार सबसे ज्यादा परेशान। जहां ‘सुविधा’ के नाम पर एलिवेटेड रोड बन रहा है, वहीं फिलहाल दुविधा और बीमारी का साम्राज्य कायम है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा बनाई जा रही है। गिरवाई पुलिस चौकी से फूलबाग तक 7.42 किमी लंबे और 19.50 मीटर चौड़े एलिवेटेड कॉरिडोर पर 926.21 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट की शुरुआत 26 जून 2024 को हुई थी और इसे 19 नवंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इसमें 14 लूप बनाए जाएंगे।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे। पानी का छिडक़ाव सीमित है और खुदाई के बाद मलबा खुला पड़ा रहता है।

फूलबाग से नदी गेट तक सुपर स्ट्रक्चर के अंतर्गत पीयर कैप का काम जोरों पर है। अफसरों के मुताबिक कुल 33 पीयर कैप लगने हैं। अभी 15 बन चुके, 8 बन रहे हैं, बाकी के लिए मटेरियल भेजा जा रहा है। पीयर कैप के बाद गाडर रखे जाएंगे। रविवार को होटल क्लार्क के सामने जेसीबी से खुदाई का काम जारी रहा। लेकिन सवाल ये कि निर्माण तेज करने के चक्कर में धूल नियंत्रण पर कोई ध्यान क्यों नहीं, पानी का छिडक़ाव, कवर शीट या अन्य उपायों की कमी से शहर धूल भरी आंधी में तब्दील हो रहा है। शहरवासी चिल्ला रहे हैं कि 926 करोड़ खर्च कर सडक़ ऊपर बना रहे हो, लेकिन नीचे की जिंदगी को धूल में दबा रहे हो। स्वास्थ्य पर असर, ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। क्या विकास सिर्फ कागजों पर अच्छा लगता है, या हकीकत में भी लोगों की सेहत और सुविधा का ख्याल रखा जाएगा।

Reactions

Post a Comment

0 Comments