मुलाकत भी मुश्किल…

कोविड के चलते इस बार जेल में सूनी रहेंगी भाइयों की कलाई

ग्वालियर की सेन्ट्रल जेल में इस बार रक्षाबंधन पर बहनें अपने बंदी भाइयों को राखी नहीं बांध पाएंगी। मतलब जेल में भाइयों की कलाई सूनी ही रहेगी। यह निर्णय कोविड गाइडलाइन को लेकर लिया गया है। वैसे बता दें कि पिछली बार भी सेन्ट्रल जेल में रक्षाबंधन नहीं मनाया गया था। लगातार दूसरी साल है जब रक्षाबंधन जेल में नहीं मनाया जाएगा। इस बार तो मुलाकात भी मुश्किल है। हालांकि अभी संक्रमण काफी कम है, लेकिन संभावित तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है और खतरे को देखते हुए जेल मुख्यालय ने इस बार भी बहनों को राखी बांधने की अनुमति नहीं दी है। 

जेल में सजा काट रहे बंदियों में ग्वालियर के साथ ही उत्तरप्रदेश, राजस्थान तथा अन्य दूसरे राज्यों और शहरों के बंदी शामिल है। यहां से मिलाई के लिए परिजन कई दिनों तक नहीं आ पाते है, ऐसे में रक्षा बंधन, व भाईदूज पर बहनें व परिवार की अन्य महिलाएं पकवान बनाकर लाती थीं और बंदियों को अपने हाथों से खिलाती थी, लेकिन कोरोना के खतरे को देखते हुए जेल मुख्यालय पिछले दो साल से इस पर रोक लगाए हुए है। जेल में बंद बंदी भले ही बहनों से ना मिल पाए, लेकिन जेल प्रबंधन द्वारा उनके लिए रक्षाबंधन पर विशेष भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है, जिससे उन्हें त्यौहार में खुशी मिल सके।

उनके लिए विशेष पकवान, मिठाइयां और खीर रविवार को बनवाई जाएगी। जेल में इस समय करीब साढ़े तीन हजार बंदी सजा काट रहे है। ऐसे में जेल प्रबंधन की समस्या यह है कि अगर एक भी बंदी संक्रमण की चपेट में आ गया तो संक्रणम काफी तेजी से फैलेगा। इसलिए मुख्यालय से त्योहार को सामूहिक रूप से नहीं मनाने का निर्णय लिया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार भी जेल में बहनों के राखी बांधने पर रोक है। जेल मुख्यालय की गाइड लाइन का पालन कराया जाएगा। बंदियों को कोरोना से बचाना भी जरूरी है।