G News 24 : वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण हुए !

 बड़ी संख्या में लोग अपने विवादों के समाधान के लिये पहुंचे जिला न्यायालय ...

वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण हुए ! 

ग्वालियर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार 14 मार्च शनिवार को वर्ष 202़6 की प्रथम लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ सुबह  10ः30 बजे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललित किशोर ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया।इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश (एस्ट्रोसिटीज)  ऋतुराज सिंह चैहान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव प्रियंक भारद्वाज, तथा जिला न्यायालय के  समस्त न्यायाधीशगण, बैंक एवं फायनेंस कम्पनी के अधिकारीगण, पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वालेंटियर्स तथा पक्षकारगण उपस्थित रहे।

जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में शनिवार की वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया है। लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से बड़ी संख्या में लोग अपने विवादों के समाधान के लिये पहुंचे। जिला न्यायालय परिसर में भी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जहां जिले भर से बड़ी संख्या में वादी और प्रतिवादी अपने-अपने प्रकरणों के निपटारे के लिये पहुंचे। लेकिन कुछ देर के लिए तकनीकी व्यवधान के चलते लोगों को थोड़ी परेशानी का भी सामना करना पड़ा।

दरअसल, लोक अदालत में सबसे ज्यादा मामले नगरनिगम और बिजली विभाग से जुड़े राजस्व बिलों के होते हैं। जिनमें मुख्यरूप से संपत्ति कर, जलकर और बिजली बिल से संबंधित प्रकरण शामिल रहते हैं। इन प्रकरणों के निराकरण और बकाया राशि जमा कराने के लिये बड़ी संख्या में उपभोक्ता लोक अदालत में पहुंचे थे। लेकिन लगभग 2 घंटे सर्वर डाउन होने की वजह से कामकाज प्रभावित हुआ। लेकिन तकनीकी समस्या को जल्द ठीक कर लिया गया था। ताकि नेशनल लोक अदालत की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि वह छूट का लाभ लेने के उद्देश्य से ही लोक अदालत में बिल जमा करने पहुंचे थे। परन्तु जब उन्हें बताया गया कि किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं मिल रही है तो उन्हें निराशा हुई। 

74 खंडपीठों ने कुल 11572 प्रकरण निराकृत तथा 22,02,08,392/- रूपये का अवार्ड पारित ...

नेशनल लोक अदालत के आयोजन हेतु जिला न्यायालय ग्वालियर-56, कुटुम्ब न्यायालय-04, श्रम न्यायालय-02, उपभोक्ता न्यायालय-01, सिविल न्यायालय डबरा-08, सिविल न्यायालय भितरवार-03 इस प्रकार कुल 74 खण्डपीठो का गठन किया गया।  

नेशनल लोक अदालत में लम्बित प्रकरणों के अंतर्गत-आपराधिक प्रकरण-327, एनआई एक्ट-244, क्लेम प्रकरण-177, पारिवारिक प्रकरण-101, श्रम विवाद-05, भूमि अधिग्रहण-01, अन्य सिविल प्रकरण-29, विधुत बिल-159, आईपीआर/कंजूमर प्रकरण-39 एवं अन्य प्रकरण-114, इस प्रकार कुल 1196 लंबित प्रकरणों का दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर निराकरण किया गया। उक्त मामलों में कुल राशि 13,13,96,443/- रूपये का अवार्ड पारित किया गया एवं 1112 व्यक्ति लाभान्वित रहे।

 लोक अदालत में न केवल लंबित मामले में राजीनामा कराया गया, अपितु ऐेसे प्री-लिटिगेशन प्रकरण जो न्यायालय में प्रस्तुत न होकर विभागीय स्तर पर थे उन्हें दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर न्यायालय में प्रस्तुत न होने के पूर्व ही निराकरण किया गया। इस बार ऐसे प्रकरणों में विभिन्न बैंकों के 203, विद्युत मण्डल के 2164, नगर निगम के वाटर बिल-5224 व अन्य प्रकरण 2782 इस प्रकार कुल 10376 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया जाकर कुल राशि 8,88,11,949/-/- का अवार्ड पारित किया गया तथा 10717 व्यक्ति लाभान्वित रहे।

काफी समय से पांच हजार रूपए के चेक बाउंस के लंबित मामले में हुआ समझौता ... 

प्रमोद कुमार दुबे व अनिल शर्मा के बीच 5 हजार रुपए के चेक मामले को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। लोक अदालत में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट कुणाल वर्मा की खंडपीठ की समझाइश के बाद उक्त मामले में समझौता हो गया।

उच्च न्यायालय ग्वालियर में हुआ 490 प्रकरणों का हुआ निराकरण 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति सह को-चेयरमेन, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति ग्वालियर मार्गदर्शन में प्रकरणों के निराकरण हेतु न्यायमूर्ति आनंद पाठक,अधिवक्ता श्रीमती निधि पाटनकर, न्यायाधिपति जी. एस. अहलूवालिया व अधिवक्ता श्रीमती आभा मिश्रा, न्यायाधिपति आशीष श्रोती व अधिवक्ता श्रीमती उमा कुशवाह तथा न्यायाधिपति आनंद सिंह बहरावत व अधिवक्ता कु. चित्रा सक्सेना की कुल 04 खण्डपीठों के द्वारा आपसी सहमति के आधार पर कुल 490 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा मोटर दुर्घटना क्लेम अपील प्रकरणों में पीडित पक्षकारों को तीन करोड चैंसठ लाख सैंतीस हजार नौ सौ चालीस रुपए अतिरिक्त क्षतिधन के रूप में प्राप्त हुये।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार व उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति-ग्वालियर के सचिव श्री राजीव के पाल द्वारा बताया गया है कि लोक अदालत का मूल उद्देश्य आपसी वैमनस्यता एवं विवादों का आपसी सहमति व राजीनामा के आधार पर प्रकरणों का निराकरण करना है, जिस कारण उभयपक्ष के मध्य विद्यमान विवाद बिना किसी की हार-जीत के साथ समाप्त हो।  इसी मूल भावना को आधार बनाकर उक्त नेशनल लोक अदालत के पूर्व न्यायमूर्ति आनंद पाठक के मार्गदर्शन में उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर में राजीनामा योग्य विचाराधीन प्रकरणों मुख्यतः बीमा कंपनी के प्रकरणों को चिन्हित कर सूची तैयार की गई, तत्पश्चात बीमा कंपनी के अधिकारी/अधिवक्तागण तथा पक्षकार व उनके अधिवक्तागण के साथ विभिन्न दिनांकों को प्री-सिटिंग आयोजित की जाकर राजीनामा के आधार पर प्रकरणों के निराकरण हेतु उभयपक्ष में सहमति बनाई गई, जिसके फलस्वरूप 159 क्लेम प्रकरणों सहित कुल 490 प्रकरणों का उक्त लोक अदालत में निराकरण किया गया है।

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