राज्यसभा चुनाव में पार्टी ने पुराने चेहरों को दुबारा मौका न देते हुए सभी नए चेहरों को मैदान में उतारा है...
भाजपा ने इन आठ स्थानीय नेताओं पर लगाया दांव,साधे राजनीतिक समीकरण !
लखनऊ । भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति ने यूपी में 10 सीटों पर होने वाले राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए 8 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। नामांकन के अंतिम तिथि एक दिन पहले जारी सूची में पार्टी ने पुराने चेहरों को दुबारा मौका न देते हुए सभी नए चेहरों को मैदान में उतारा है। इनमें प्रदेश के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर, प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह, पूर्व सांसद प्रियंका रावत, राधाकांत ओझा, गोपीकृष्ण पांडेय, श्रुति गंगवार और प्रकाश पाल शामिल हैं। इस प्रकार प्रत्याशियों में तीन पिछड़ा, दो-दो दलित व ब्राम्हण और एक राजपूत समाज के लोगों को शामिल किया गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी और राज्यसभा सांसद तरुण चुग की ओर से जारी सूची में इस बार पार्टी ने किसी बाहरी के स्थान पर सभी स्थानीय नेताओं को ही मौका दिया है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने बाहरी को लाकर किसी तरह का विवाद नहीं खड़ा करना चाहती है। खास बात यह है कि पार्टी ने प्रत्याशी चयन में सामाजिक समीकरण के साथ संगठनात्मक सक्रियता को प्राथमिकता देकर पार्टी ने उस राजनीतिक दिशा का संकेत दिया है। सूची में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, ठाकुर और महिला प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है। साथ ही संगठन में सक्रिय रहे चेहरों को उच्च सदन भेजने का फैसला किया गया है।
बता दें कि जिन सदस्यों की कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, उनमें भाजपा के बृजलाल, हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, डॉ दिनेश शर्मा, नीरज शेखर और अरुण सिंह, सपा के प्रोफेसर राम गोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम शामिल हैं। देखा जाए तो मौजूदा सदस्यों में दो ओबीसी सदस्य हैं। इस बार इनके स्थान पर तीन ओबीसी चेहरे को मौका दिया गया है। इसी तरह दो महिला के स्थान पर महिलाओं और दो ब्राम्हण के कोटा को कोटा बरकरार रखा गया है। जबकि मौजूदा दो राजपूत सदस्यों के स्थान पर एक चेहरे को मौका मिला है।
दो केंद्रीय मंत्रियों को नहीं मिला मौका
केंद्र सरकार में मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को इस बार दोबारा मौका नहीं दिया गया है। ऐसे संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक अब इन दोनों मंत्रियों की केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी होने की अटकले हैं।
2027 से पहले सामाजिक संदेश की कोशिश
भाजपा की सूची को केवल राज्यसभा की आठ सीटों के लिए उम्मीदवार चयन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में पार्टी ने उच्च सदन के लिए चेहरों का चयन करते हुए अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने का संकेत दिया है। ब्राह्मण, राजपूत, ओबीसी, दलित और महिला प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि चुनावी रणनीति में संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों बराबर महत्वपूर्ण हैं।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। नामांकन की अंतिम तिथि मंगलवार है। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर में पूरा हो रहा है। भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी मैदान को औपचारिक रूप से सजा दिया है। अब निगाहें नामांकन के बाद बनने वाले अंतिम समीकरण और सपा की अगली रणनीति पर हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले होने वाला यह चुनाव दोनों दलों के लिए अपने विधायकों के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक आधार को परखने का भी मौका होगा।




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