कश्मीरी युवक फहीम नजीर पर हमले के बाद हड़कंप...
गुपकार रोड पर युवाओं का हल्लाबोल, राहुल गांधी पर FIR की मांग !
श्रीनगर के गुपकार रोड पर कश्मीरी युवक फहीम नजीर पर हुए हमले के बाद घाटी का माहौल गरमा गया है. घटना के विरोध में स्थानीय युवाओं ने भारी प्रदर्शन करते हुए जोरदार हल्लाबोल किया. श्रीनगर में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के पास गुपकार रोड पर कई कश्मीरी युवाओं ने विरोध मार्च निकाला. वे दिल्ली में कश्मीरी युवक फ़हीम नज़ीर शाह के साथ कथित मारपीट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने हमले के आरोपियों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की. उन्होंने इस घटना के लिए कांग्रेस और INDIA ब्लॉक से माफी मांगने को भी कहा.
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करना या उनका प्रशंसक होना कोई अपराध नहीं है. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री किसी एक राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं. युवाओं ने मामले में कार्रवाई और जवाबदेही की मांग करते हुए नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने खुद को गैर-राजनीतिक बताया. हालांकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उन्हें मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोक दिया और मौके से हटा दिया.
दिल्ली में कैसे हुई घटना?
यह मामला 8 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया था. विपक्षी दल चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. श्रीनगर के रहने वाले फहीम नजीर शाह भी वहां पहुंचे थे. वह खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक बताते हैं.
पीएम मोदी के समर्थक हैं फहीम
फहीम नजीर के पास एक पोस्टर था, जिसके जरिए उन्होंने मोदी के प्रति अपना समर्थन जताया और विपक्ष के दावों पर सवाल उठाए. आरोप है कि इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने फ़हीम को घेर लिया, उनके साथ धक्का-मुक्की की और मारपीट की. उन्हें घसीटे जाने का आरोप भी लगाया गया है. घटना के बाद फ़हीम की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की.
आरोपियों पर कार्रवाई की मांग
श्रीनगर में प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने मांग की कि दिल्ली में फ़हीम के साथ कथित मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ भी FIR दर्ज करने की मांग की और INDIA ब्लॉक से इस घटना पर माफी मांगने को कहा. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसी व्यक्ति को उसकी राजनीतिक पसंद या प्रधानमंत्री के प्रति समर्थन के कारण निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.




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