120 दिन में नीति लागू करने के निर्देश...
हाईकोर्ट ने ई-रिक्शा को बताया राष्ट्रीय समस्या !
ग्वालियर। चंबल-ग्वालियर संभाग समेत मध्यप्रदेश की सड़कों पर बढ़ते ई-रिक्शा के बेकाबू संचालन और उससे पैदा हो रही यातायात संबंधी समस्याओं को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की युगल पीठ ने ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन को गंभीर समस्या बताते हुए इसे राष्ट्रीय समस्या तक कहा। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को ई-रिक्शा की संख्या, रूट परमिट और यातायात नियंत्रण को लेकर स्पष्ट नीति बनाने और उसे निर्धारित समयसीमा में लागू करने के निर्देश दिए हैं। ग्वालियर शहर में 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा संचालित होने की बात सामने आई है।
शहर के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा के चलते यातायात जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की युगल पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार के लिए समयसीमा तय की है। सामाजिक कार्यकर्ता निशा गुर्जर की ओर से दायर जनहित याचिका में अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्रा ने ई-रिक्शा के बढ़ते दबाव से जुड़ी कई समस्याएं अदालत के सामने रखीं। याचिका में कहा गया कि पिछले करीब एक दशक से ई-रिक्शा के संचालन को लेकर प्रभावी और ठोस नियामक व्यवस्था का अभाव है।
इसके कारण शहरों में यातायात जाम और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है। दूसरा प्रमुख मुद्दा रूट परमिट का है। याचिका में कहा गया कि ई-रिक्शा के लिए स्पष्ट रूट निर्धारण नहीं होने के कारण वे शहर के अलग-अलग मार्गों पर संचालित होते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। याचिका में परमिट धारक व्यावसायिक वाहन चालकों के हितों का मुद्दा भी उठाया गया। दलील दी गई कि परमिट और टैक्स के रूप में बड़ी राशि का भुगतान करने वाले वाहन संचालकों को बिना स्पष्ट परमिट व्यवस्था के संचालित ई-रिक्शा से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की युगल पीठ ने केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ई-रिक्शा की संख्या, रूट परमिट और यातायात नियंत्रण सहित अन्य आवश्यक पहलुओं को लेकर राष्ट्रव्यापी नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए केंद्र सरकार को 60 दिनों की समयसीमा दी गई है। तैयार नीति सभी राज्यों को भेजी जाएगी। हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को भी अपनी भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक प्रावधान तय कर नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए परिवहन आयुक्त से परामर्श लेने की बात कही गई है। अदालत के निर्देश के अनुसार आज से 120 दिनों के भीतर ई-रिक्शा चालकों और मालिकों के लिए एक समग्र नीति अधिसूचित कर लागू करनी होगी।
यदि निर्धारित 120 दिनों की अवधि में नीति लागू नहीं की जाती है, तो याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में याचिका पुनर्जीवित कराने की छूट दी गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ई-रिक्शा की संख्या, उनके रूट, परमिट और यातायात नियंत्रण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाए जाने की उम्मीद है। ग्वालियर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में संचालित ई-रिक्शा के कारण यातायात प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों के बीच अदालत का यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब केंद्र और राज्य सरकार की ओर से तैयार की जाने वाली नीति पर नजर रहेगी, जिससे ई-रिक्शा संचालन के साथ-साथ आम लोगों और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालकों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।




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