पहले इंदौर,फिर उज्जैन और अब ग्वालियर !
सिंधिया जी को उन्हीं के गृहनगर में भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा ही,काले झण्डे दिखाना ये कैसी राजनीति है !
ग्वालियर में भाजपा में गुटबाजी की राजनीती चरम पर आ गई है। यह इस घटना ने एकबार फिर सिद्ध क्र दिया है। इसी महीने कुछ दिनों पहले इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का दौरा कार्यक्रम था। मंच से जब मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पार्टी नेता रणदिवे को इस आयोजन का श्रेय दिया तो इंदौर के पार्टी विधायक व प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उसी मंच से मुख्यमंत्री यादव की बात पर तंज किया कि मुख्यमंत्री बड़े राज की बात कह रहे हैं कि रणदिवे जी इस इंदौर कार्यक्रम की सफलता के सूत्रधार हैं।
फिर, उज्जैन में जब नितिन नवीन का रोड शो हुआ तो उज्जैन के महापौर व भाजपा नेता मुकेश टटवाल को नवीन जी के वाहन रथ पर बिठाया गया , बाद में उतार दिया गया। टटवाल ने इसे अपना अपमान समझा और डॉ.अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष धरने की घोषणा कर दी। आखिरकार मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के महापौर और दलित नेता को धरना न देने के लिए मना लिया।
तीन रोज पहले ग्वालियर के डबरा में सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री इमरती देवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर बैठने से मना कर दिया था। सांसद भारत सिंह कुशवाह उन्हें बुलाते रह गए । अपना फोटो बैनर पर न होने से इमरती देवी नाराज हो गईं थीं । उन्होंंने यहां तक कह दिया था कि भाजपा के मंच पर तो हत्यारे बैठे हैं।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में दतिया के नरोत्तम मिश्रा समर्थक सैकड़ों भाजपाइयों ने पार्टी नेतृत्व-मोदी जी , मोहन यादव के खिलाफ जो सार्वजनिक टिप्पणी की थी , उस घटना ने भाजपा में अनुशाासन को तार-तार कर दिया था। यानी भाजपा में गुटबाजी की घटनाओं ने कांग्रेस की गुटबाजी को पीछे छोड़ दिया है?
भाजपा के प्रदेश और केन्द्रीय संगठन महामंत्री जो संघ से आते हैं , क्या वे अपनी भूमिका निभा नहीं रहे हैं?ग्वालियर भाजपा के बारे में यह बताना जरूरी है कि यहां भारत सिंह कुशवाह (सांसद) और नारायण सिंह कुशवाह(प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री) के बीच वर्षों से मतभेद हैं । दोनो एक दूसरे से बोलचाल नहीं करते हैं। नारायण सिंह ने ही सिंधिया को बुलाया , भारत सिंह को नहीं बुलाया जबकि कार्यक्रम कुशवाह समाज का था। भारत सिंह और सिंधिया भी आपस में बातचीत नहीं करते हैं।




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