G News 24 : अनोखा गणेश मंदिर,जहाँ धागा नहीं, किस्मत बंधती है !

  एक पीपल के पेड़ के नीचे दबी हुई मिली थी गणपति की यह प्राचीन मूर्ति ...

अनोखा गणेश मंदिर,जहाँ धागा नहीं, किस्मत बंधती है !

इंदौर।  साल 1735 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर को एक रात सपने में गणेश जी दिखाई दिए। सपने में उन्होंने देखा कि खजराना के जंगल में, एक पीपल के नीचे गणपति की एक प्राचीन मूर्ति दबी हुई है। सुबह होते ही सैनिक भेजे गए। और सच में, उसी जगह से खुदाई में एक अद्भुत गणेश प्रतिमा निकली। रानी ने उसी जगह पर मंदिर बनवाया। यही है आज का विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर। कहते हैं ये मंदिर सिर्फ मंदिर नहीं, इंदौर के लोगों का इमोशन है।

धागे वाली मान्यता... 

मंदिर के गर्भगृह के पास एक पवित्र जाली है। गणेश चतुर्थी के 10 दिनों में यहाँ लाखों लोग आते हैं। मान्यता ऐसी है कि अगर सच्चे मन से, उल्टा स्वस्तिक बनाकर, अपनी मनोकामना बोलकर इस जाली में एक धागा बांधा जाए, तो बप्पा आपकी मन्नत सुन लेते हैं। और जब मनोकामना पूरी हो जाए, तो वापस आकर वही धागा खोलना होता है और एक नया धागा सीधा बांधना होता है, साथ ही मोदक का भोग लगाना होता है।

लोग कहते हैं ... 

यहाँ कोई खाली हाथ नहीं जाता। किसी को नौकरी चाहिए, किसी को संतान, किसी का व्यापार अटका है... सब एक ही धागे में अपनी उम्मीद टांग जाते हैं।

एक छोटी सी कहानी...

राजू नाम का एक ऑटो ड्राइवर। इंदौर में ही रहता था। बेटी की शादी के लिए पैसे नहीं थे। गणेश चतुर्थी पर भीड़ में वो भी लाइन में लगा। जेब में सिर्फ 10 रुपये का एक धागा जो पुजारी से लिया था। आंख बंद कर बोला - "बप्पा, इज्जत रख लेना।"

तीन महीने बाद, उसकी लॉटरी नहीं लगी, पर उसे इंदौर के ही एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में परमानेंट नौकरी मिल गई। पहले ही महीने के एडवांस से बेटी की शादी तय हो गई।

गणेश चतुर्थी पर वो फिर आया। इस बार दो लड्डू के साथ। एक धागा खोला, और आंखों में आंसू लेकर दूसरा सीधा बांध दिया।

पुजारी मुस्कुराए और बोले - "खजराना में गणेश जी मन्नत नहीं, भरोसा पूरा करते हैं।"

इसलिए कहते हैं ...-

इंदौर आए और खजराना ना गए, तो क्या आए,और खजराना में धागा ना बांधा, तो क्या माँगा !

Reactions

Post a Comment

0 Comments