G News 24 : फर्जी चीनी ऐप मामले में SC ने भूपेश की जमानत रद्द की,मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 900 करोड़ का केस !

 प्रेडिकेट ऑफेंस में समझौता हो जाने मात्र से,उससे जुड़ी मूल आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं हो जाती हैं : SC 

फर्जी चीनी ऐप मामले में SC ने भूपेश की जमानत रद्द की,मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 900 करोड़ का केस !

फर्जी चीनी निवेश ऐप ‘LOXAM’ से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा को मिली जमानत रद्द कर दी, जबकि आरोपी रोहित विज की जमानत याचिका खारिज कर दी. मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही जांच से जुड़ा है. ED को इस ऐप के माध्यम से 900 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग की जानकारी मिली थी. ठगों ने इस पैसे को 38 फर्जी खातों के माध्यम से ट्रांसफर किया था.

ED ने इस चीनी ऐप की जांच हैदराबाद पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट द्वारा 2022 में गई FIR के बाद शुरू की थी. इस फर्जी ऐप में कुछ चीनी कारोबारियों ने भारतीयों के साथ मिलकर इनवेस्टमेंट की थी. आरोपियों ने ऐप को एक नामी फ्रेंच कंपनी से जुड़ा बताकर सैकड़ों भारतीय लोगों से ठगी की थी. उन्होंने लोगों को भारी मुनाफे और पैसा दोगुना करने का लालच दिया था. ED ने पिछले साल आरोपी रोहित विज और उसके साथियों की गिरफ़्तारी की थी. 

समझौते पर कोर्ट की अहम टिप्पणी !

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने ED बनाम भूपेश अरोड़ा, SLP (Crl) No. 13532/2026 केस पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रेडिकेट ऑफेंस में समझौता हो जाने मात्र से, उससे जुड़ी मूल आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं हो जाती हैं.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का केंद्र यह सवाल रहा कि क्या प्रेडिकेट ऑफेंस में पक्षकारों के बीच समझौता हो जाने से PMLA के तहत सामने आई आपराधिक गतिविधि भी स्वत: समाप्त मानी जा सकती है. अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया, कि केवल समझौते के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कार्रवाई का आधार खत्म हो जाता है.

रोहित विज को भी राहत नहीं...

चीनी ऐप ‘LOXAM’ के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से जुड़े मामले में रोहित विज की जमानत याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राहत नहीं दी. अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है. दोनों मामलों में ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अनिल कौशिक और अर्कज कुमार पेश हुए. 

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