चक्रवात अर्नब की चपेट में आए 14 राज्य ...
यूपी में अब तक 56 लोगों की मौत, 46 घायल, जानिए किस जिले में हुई अधिक जनहानि !
चक्रवात अर्नब का असर देश के 14 राज्यों में दिख रहा है. UP में अब तक 56 की गई जान,जबकि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश, बाढ़ और जलभराव से जनजीवन प्रभावित है. कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है.उत्तर प्रदेश में पिछले 60 घंटे में बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत हो गई। 46 लोग घायल हो गए। राज्य के राहत आयुक्त ने रविवार को ये जानकारी दी। राहत आयुक्त डॉक्टर हृषिकेश भास्कर यशोद ने रविवार को बताया कि पिछले 60 घंटों में अतिवृष्टि एवं आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 56 जनहानि, 107 पशु हानि तथा 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त 46 व्यक्तियों के घायल होने की सूचना है।
सीतापुर में 7 लोगों की गई जान
उन्होंने कहा कि जनहानि के मामलों में सीतापुर में 7, लखीमपुर खीरी में 5, बहराइच में 5, बलरामपुर में 5, अयोध्या में 4 तथा गोरखपुर में 4 जनहानि की सूचना प्राप्त हुई है। घायलों में हरदोई में 7, मैनपुरी में 5, श्रावस्ती में 5, बाराबंकी में 5 और सीतापुर-लखीमपुर खीरी में 3-3 लोगों के घायल होने की सूचना है। मकान क्षतिग्रस्त होने के मामलों में हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 तथा बहराइच में 44 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।
यूपी के 56 जिलों में हुई अधिक बारिश
राज्य के 75 में से 56 जिलों में बहुत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। यशोद ने रविवार को जिलाधिकारियों और अपर जिला अधिकारियों के साथ राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया कि वे क्षेत्र में रहें, प्रभावित लोगों से सीधा संपर्क बनाए रखें और तुरंत मदद पहुंचाना सुनिश्चित करें।
अधिकारियों को मुआवजा का निर्देश
इसके साथ ही सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत फसल के नुकसान का आकलन करें और नियमों के अनुसार मुआवजा दें। जरूरत पड़ने पर रहने की वैकल्पिक व्यवस्था करें और जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें जल्द से जल्द मदद पहुंचाएं।
जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर
राहत विभाग ने बताया कि बचाव दल जलभराव वाले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान चला रहे थे। विभाग ने लोगों को सलाह दी कि वे पानी और बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बेवजह न जाएं और तेजी से बहने वाली नदियों, नालों और जलधाराओं से दूर रहें। आपातकालीन सहायता के लिए लोग राहत आयुक्त कार्यालय के हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब देश के 14 राज्यों को अपनी चपेट में लिए हुए है. इसका सबसे ज्यादा असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है. वहीं, उत्तर प्रदेश में बीते 48 घंटों में बारिश की वजह से अलग-अलग हादसों में 13 लोगों की मौत की खबर है. छह की मौत शनिवार को हुई है. चक्रवात अर्नब के असर से उत्तर प्रदेश, बिहार समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों में इन दिनों भारी बारिश हो रही है और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं. यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ में नदी-नाले उफान पर हैं. विदा होता मानसून लौट आने से उत्तर प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत 14 राज्यों में बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. बिहार के 19 जिलों में येलो अलर्ट है.
ओडिशा के मलकानगिरी में हालात गंभीर, NH-326 बंद
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, ओडिशा के मलकानगिरी में चक्रवात 'अर्नब' ने काफी तबाही मचाई है. लगातार बारिश से मलकानगिरी जिले के कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. कांकुरुकोंडा, कन्याश्रम, एमवी-90 और एमवी-96 पुलों के ऊपर तीन से चार फीट तक बाढ़ का पानी बह रहा है. इसके चलते मलकानगिरी से कालीमेला, मोटू और पोडिया के बीच आवागमन बंद हो गया है. यहां से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर पानी भर जाने के कारण जिला प्रशासन ने इसे बंद कर दिया है. एनएच पर कई स्थानों पर सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए सभी पुलों के पास पुलिस तैनात की गई है.
मलकानगिरी में दो दिन का रेड अलर्ट
मलकानगिरी के एडीएम बेदाबर प्रधान ने आईएएनएस को बताया कि अगले कुछ घंटे और भारी पड़ सकते हैं. इसके लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी है. चक्रवात के कारण जिले में पहले से ही रेड अलर्ट लागू है. कई क्षेत्रों का संपर्क टूट चुका है. तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और चेन्नई से आने वाले वाहन भी यहां फंसे हुए हैं. जिला प्रशासन और पंचायतों की ओर से प्रभावित लोगों तक भोजन और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई है.
सात जिलों के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट
चक्रवात 'अर्नब' का असर केवल मलकानगिरी तक सीमित नहीं है, बल्कि गजपति समेत कई जिलों में हालात खराब हो गए हैं. ओडिशा सरकार में मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने कहा, "मैं गजपति जिले में हूं. चक्रवात और भारी बारिश को देखते हुए सात जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था." बालासोर में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. फायर सर्विस की टीमों ने कई स्थानों पर गिरे पेड़ों को हटाया. वहीं, रेमुना में बुधवार को एक मकान गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक बच्चा घायल हो गया.
फायर ऑफिसर अजय ने आईएएनएस को बताया, "बांकेश्वर में तीन जगहों पर पेड़ गिरे, जिनमें से दो पेड़ घरों पर गिरे थे. वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया. राजाबगीचा जंक्शन पर फ्लडलाइट की मदद से मलबा हटाने का कार्य किया गया." उन्होंने बताया कि बालासोर के सभी फायर स्टेशन पूरी तरह तैयार हैं. 12 स्टेशनों पर एक-एक नाव तैनात है, जबकि चार अतिरिक्त नावों को स्टैंडबाय पर रखा गया है.
छत्तीसगढ़ में तीन दिन से मूसलाधार बारिश
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, चक्रवात अर्नब की वजह से पिछले तीन दिनों से छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश हो रही है. रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं, अनेक मार्गों पर यातायात ठप है और कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को राहत एवं बचाव कार्यों में उच्च सतर्कता बरतने तथा निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
महासमुंद में बाढ़ का बढ़ा खतरा
महासमुंद जिले में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश से व्यापक नुकसान हुआ है. गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के कारण महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. बम्हानी गांव में सरकारी शराब की दुकान पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गई, जिसमें दो सुरक्षा गार्ड छगन लाल कुर्रे और ईद कुमार टंडन फंस गए थे. दोनों ने वीडियो जारी कर अपनी सुरक्षा की जानकारी दी. बाद में बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया. प्रशासन ने नदी किनारे बसे 18 गांवों के लिए अलर्ट जारी किया है.
चक्रवात का सबसे ज्यादा असर बस्तर मंडल और आसपास के जिलों पर पड़ा है. लगातार भारी बारिश के कारण अधिकांश नदियां और नाले उफान पर हैं. मुख्य सड़कें जलमग्न हो गई हैं और अंतर-जिला संपर्क लगभग पूरी तरह टूट गया है. धमतारी स्थित गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोल दिए गए हैं, क्योंकि जलाशय 98 प्रतिशत से अधिक भर चुका है. रुद्री बैराज के जरिए महानदी में करीब 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है.
सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा
मुरुमसिल्ली बांध अपनी 100 प्रतिशत क्षमता तक भर चुका है, जबकि बलोद जिले के दुधवा और सोंधुर बांध 90 प्रतिशत से अधिक भर गए हैं. धमतारी मुख्यालय के पास उफनती हटकुल नदी ने आसपास के कई गांवों का संपर्क काट दिया है. कोरबा में बंगो बांध और ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से भी पानी छोड़ा गया है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी निचले क्षेत्रों की ओर बह रहा है और इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के बाद सुकमा, कांकेर, बीजापुर, जगदलपुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.




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