ग्वालियर-चंबल में भारी बारिश का अलर्ट,कई बांधों के गेट खुले...
जल्द खुलेंगे तिघरा बांध के गेट,जल स्तर 736 फीट पर पहुंचा,जलसंकट का खतरा टला !
ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। मौसम विभाग ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और शिवपुरी समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका है।
तिघरा में तेजी से बढ़ा पानी, जलसंकट का खतरा टला !
लगातार हो रही बारिश ग्वालियर की पेयजल लाइफलाइन तिघरा बांध के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार रात बांध का जलस्तर 736 फीट दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में जलस्तर करीब 3.3 फीट बढ़ा है। पूर्ण भराव स्तर करीब 739 फीट माना जाता है, यानी बांध अब अपने अधिकतम स्तर से लगभग साढ़े पांच फीट दूर है।
अपर ककैटो, ककैटो और पेहसारी से पानी शिफ्ट किए जाने के साथ तिघरा के कैचमेंट क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश का असर भी जलस्तर पर दिखाई दे रहा है। पानी की आवक बढ़ने से आने वाले समय में शहर के सामने पेयजल संकट की आशंका काफी कम हुई है।
प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान
मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना समेत कई जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक करीब 30.7 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है।
बरगी, भदभदा और कलियासोत के गेट खुले
भारी बारिश के बीच जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने से कई बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है। जबलपुर के बरगी बांध के 13 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। भोपाल में भदभदा और कलियासोत बांध के गेट भी खोले गए हैं। निचले इलाकों और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को हाई अलर्ट पर रहने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी कलेक्टरों को हाई अलर्ट पर रहने, राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने और स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि उफनते नदी-नालों और जलभराव वाले रास्तों को पार न करें तथा मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।




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