G NEWS 24 : राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन-2026 में पत्रकारिता की बदलती भूमिका पर हुआ मंथन

श्रेष्ठ विश्व के निर्माण के लिए सशक्त मीडिया जरूरी...

राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन-2026 में पत्रकारिता की बदलती भूमिका पर हुआ मंथन

आबू रोड/जयपुर। आज के डिजिटल युग में मीडिया केवल समाचार और सूचना पहुंचाने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वह समाज की सोच, दिशा और चेतना को प्रभावित करने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति बन चुका है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ जहां खबरों की पहुंच और गति कई गुना बढ़ी है, वहीं फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाओं, अधूरी जानकारी और सनसनीखेज पत्रकारिता जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे दौर में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

इन्हीं चुनौतियों और संभावनाओं को केंद्र में रखते हुए ‘श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया’ विषय पर राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन-2026 का आयोजन आबू रोड स्थित मानसरोवर में किया जा रहा है। 9 से 13 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस महासम्मेलन में पत्रकारिता की बदलती भूमिका, मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर विचार-मंथन किया जा रहा है।

1980 में स्थापित हुआ था मीडिया विंग

1936 में स्थापित ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में 25 विंग संचालित किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक मीडिया विंग की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी। मीडिया विंग द्वारा प्रत्येक वर्ष देश-विदेश के मीडिया प्रतिनिधियों के साथ समाज हित और सकारात्मक पत्रकारिता से जुड़े विषयों पर आयोजन किए जाते हैं।

राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन-2026 के अवसर पर बीके गंगाधर, बीके सरला, बीके पुष्पा, बीके शकू, बीके शांतनु, बीके आत्मप्रकाश एवं बीके चंदा सहित अन्य वक्ताओं ने मीडिया की भूमिका और उसके सामाजिक प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए।

खबर सबसे पहले नहीं, सही पहुंचाना जरूरी

सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आज पत्रकारिता की चुनौती केवल खबर को सबसे पहले पहुंचाने की नहीं, बल्कि सही, तथ्यपरक और विश्वसनीय खबर समाज तक पहुंचाने की है।

डिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को अभूतपूर्व गति प्रदान की है, लेकिन इसी के साथ गलत सूचनाओं के तेजी से प्रसार का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी समाज के विश्वास को बनाए रखने की है।

वक्ताओं का संदेश स्पष्ट रहा कि पत्रकारिता की प्राथमिकता केवल टीआरपी, व्यूज और वायरलिटी नहीं, बल्कि जनहित, सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। तथ्यों के साथ संवेदनशीलता और नैतिकता का समन्वय ही पत्रकारिता को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बना सकता है।

सशक्त मीडिया बदलाव की सकारात्मक आवाज

सशक्त मीडिया का अर्थ केवल निर्भीक होकर सवाल उठाना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को सामने लाने के साथ उनके समाधान की दिशा भी दिखाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, युवाओं की भागीदारी, सामाजिक समरसता, प्रशासनिक जवाबदेही और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर मीडिया सकारात्मक जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मीडिया यदि समस्याओं के साथ समाधान की खबरों को भी प्राथमिकता दे, तो वह समाज में निराशा के बजाय जागरूकता, जिम्मेदारी और सकारात्मक परिवर्तन की संस्कृति विकसित कर सकता है।

‘सूचना से आध्यात्मिक परिवर्तन की ओर’ का संदेश

महासम्मेलन की महत्वपूर्ण अवधारणा ‘सूचना से आध्यात्मिक परिवर्तन की ओर’ भी है। इस विचार के माध्यम से मीडिया की भूमिका को केवल सूचना देने तक सीमित न रखते हुए व्यक्ति और समाज के विचारों में सकारात्मक परिवर्तन से जोड़ा गया है।

सूचना व्यक्ति को जागरूक करती है, लेकिन सही विचार, मूल्य और सकारात्मक दृष्टिकोण उसके व्यवहार में परिवर्तन ला सकते हैं। यदि पत्रकारिता सत्य, नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक मूल्यों को अपने केंद्र में रखे, तो मीडिया बेहतर समाज और श्रेष्ठ विश्व के निर्माण में प्रभावी भागीदार बन सकता है।

तकनीक से बड़ा सवाल है उसका उद्देश्य

आज मीडिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि उसके पास कितनी तकनीक है, कितने प्लेटफॉर्म हैं या खबर कितनी तेजी से लोगों तक पहुंच रही है। असली सवाल यह है कि मीडिया की इस शक्ति का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।

एक खबर समाज को जोड़ सकती है तो वही खबर समाज में विभाजन भी पैदा कर सकती है। पत्रकार की कलम व्यवस्था को आईना दिखा सकती है, लेकिन गलत तथ्यों या गैर-जिम्मेदार प्रस्तुति के माध्यम से किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकती है।

इसलिए मीडिया की स्वतंत्रता के साथ उसकी जवाबदेही, विश्वसनीयता और नैतिकता भी उतनी ही आवश्यक है।

महासम्मेलन से सकारात्मक पत्रकारिता को नई दिशा की उम्मीद

राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन-2026 इसी व्यापक चिंतन को आगे बढ़ाने का मंच बन रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य सूचना की शक्ति को सकारात्मक सोच, मानवीय मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन से जोड़ते हुए ऐसी पत्रकारिता की दिशा तलाशना है, जो केवल खबरों का प्रसारण न करे, बल्कि समाज को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने में योगदान दे।

आज जब एक क्लिक पर सूचना दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है, ऐसे समय में मीडिया की असली ताकत उसकी गति में नहीं, उसकी विश्वसनीयता और सकारात्मक प्रभाव में है।

श्रेष्ठ विश्व का निर्माण केवल तकनीक से नहीं, श्रेष्ठ विचारों से होगा—और उन विचारों को समाज तक पहुंचाने में सशक्त, जिम्मेदार और मूल्यनिष्ठ मीडिया की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

विषय: “श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया — सूचना से आत्मिक परिवर्तन की ओर”

आदरणीय अतिथिगण, मीडिया जगत के साथियों एवं उपस्थित सभी महानुभावों,

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज इसकी जिम्मेदारी केवल सूचना पहुंचाने तक सीमित नहीं है। आज मीडिया समाज की सोच, दिशा और भविष्य को प्रभावित करने की शक्ति रखता है।

“श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया” का अर्थ है—ऐसा मीडिया जो खबर के साथ सच्चाई, सकारात्मकता और मानवीय मूल्यों को भी सामने लाए।

आज सूचना की गति बहुत तेज है, लेकिन आवश्यकता केवल तेज सूचना की नहीं, बल्कि सही सूचना और सही सोच की है। मीडिया यदि समाज में भय, नफरत और भ्रम बढ़ाने के बजाय जागरूकता, भाईचारा, शांति और जिम्मेदारी का संदेश दे, तो पत्रकारिता वास्तव में समाज परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

सूचना से आत्मिक परिवर्तन की ओर बढ़ने का अर्थ है कि हम केवल यह न बताएं कि क्या हुआ, बल्कि यह भी सोचें कि इससे समाज क्या सीख सकता है और बेहतर कैसे बन सकता है।

आइए, हम संकल्प लें कि हमारी कलम, कैमरा और माइक्रोफोन केवल खबर नहीं बनाएंगे—वे एक बेहतर समाज और श्रेष्ठ विश्व के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे।

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