G News 24 : उत्तराखंड के 'युवक,ने बनाई फ्लाइंग कार, परफॉर्मेंस देखकर हुआ गदगद !

 दिग्गजों ने शेयर किया मंत्रमुग्ध करने वाला वीडियो...

उत्तराखंड के 'युवक,ने बनाई फ्लाइंग कार, परफॉर्मेंस देखकर हुआ गदगद !

भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, बस उसे सही दिशा देने की जरूरत है. इसकी ताजा मिसाल उत्तराखंड में देखने को मिली जहां, एक प्रतिभाशाली युवक ने उड़ने वाली कार के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा ने सिंगल-सीटर फ्लाइंग कार के प्रोटोटाइप का कामयाब परीक्षण करके दुनिया को हैरान कर दिया है. एक स्टार्टअप के जरिए टम्टा ने हैपिडा स्काईनेक्स का प्रोटोटाइप तैयार किया और उसे करीब एक मिनट तक हवा में उड़ाकर अपने सपनों की फ्लाइंग कार का दम दुनिया को दिखाया. इस मेड इन इंडिया फ्लाइंग कार के परीक्षण कामयाबी पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत देशभर के दिग्गजों ने रवि को बधाई देते हुए उनके 'चमत्कार' को 'नमस्कार' किया है.

आपने इससे पहले विदेशी फ्लाइंग बस और फ्लाइंग कार्स के कॉन्सेप्ट के बारे में देखा-सुना और पढ़ा होगा, लेकिन उत्तराखंड की माटी के लाल ने अपने हुनर के दम पर जो कमाल कर दिखाया, उससे लोग हैरान हैं. उसके हुनर की तारीफ कर रहे हैं. फीचर्स के बारे में आपको बताएंगे आगे, लेकिन पहले देखिए उड़ने वाली उस सिंगल सीटर फ्यूचर कार का वीडियो जो पहाड़ी इलाकों में रहने वालों के लिए वरदान बन सकती है.

इसकी प्रोजेक्ट ने उन उम्मीदों को भी परवान चढाने का काम किया है कि वो दिन दूर नहीं जब भारत के लोग इस तरह के अपने पर्सनल ट्रांसपोर्टेशन का इस्तेमाल कर सकेंगे. लोग सड़कों पर जाम में फंसने के बजाए अपनी फ्लाइंग कार से फर्राटा उड़ान भरेंगे.

अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने ये कमाल ड्रोन तकनीक में नवाचार करते हुए हासिल किया. HAPIDA SKYNEX प्रोटोटाइप का कामयाब परीक्षण करके उन्होंने ये बता दिया कि देश के युवाओं में प्रतिभा, इनोवेशन और वैज्ञानिक सोच की कूट-कूट कर भरी है. हौसले की यह उड़ान देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है.

एक सोच ने  रवि टम्टा को  ऐसा इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल बनाने के लिए प्रेरित किया

अलमोड़ा के काफलीखान गांव निवासी रवि को अपने गांव से 40 किलोमीटर की दूरी बाईरोड सड़क मार्ग से तय करने में डेढ़ घंटा लगता था. वो बहुत समय से सोच रहे थे कि अगर हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जाए, तो उनका सफर मात्र 10 मिनट में पूरा हो सकता है. इसी सोच ने उन्हें एक ऐसा इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल बनाने के लिए प्रेरित किया, जो खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रांसपोर्टेशन की सूरत बदल सके.

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