G News 24 : मार्क जुकरबर्ग पीएम मोदी से मांगें माफी,अन्यथा सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले लेंगे : निशिकांत दुबे

वीडियो हटाने पर संसदीय समिति सख्त,सेफ हार्बर प्रोटेक्शन वापस लेने की चेतावनी...

मार्क जुकरबर्ग पीएम मोदी से मांगें माफी,अन्यथा सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले लेंगे : निशिकांत दुबे 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंस्टाग्राम वीडियो कुछ घंटों के लिए हटाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बड़ा रूप ले लिया है। इस मामले में संसदीय सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने मेटा कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. समिति अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने खुद मार्क जुकरबर्ग से माफी मांगने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर माफी नहीं मिली तो 'सेफ हार्बर' सुरक्षा वापस ली जाएगी. संसदीय समिति के चेयरमैन और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो उनसे सेक्शन 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए। 

संसद की कम्युनिकेशन और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि मेटा इस मामले में माफी नहीं मांगता है, तो कंपनी को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाला "सेफ हार्बर प्रोटेक्शन" वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 23 जुलाई को जारी किया गया एक वीडियो इंस्टाग्राम से रात करीब 12:30 बजे हट गया। यह वीडियो लगभग सुबह 5 बजे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहा। बाद में मेटा ने वीडियो को बहाल कर दिया और सफाई देते हुए कहा कि यह किसी नीति के तहत नहीं बल्कि एक "तकनीकी त्रुटि" (Technical Error) के कारण हुआ था। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद सरकार और संसदीय समिति इस मामले को गंभीर मान रही है।

संसदीय समिति ने जताई कड़ी नाराजगी

संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का वीडियो हटना सामान्य तकनीकी गलती नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कंपनी को जवाब देना होगा।

दुबे ने आरोप लगाया कि कई बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां अपनी नीतियों में पारदर्शिता नहीं बरततीं और कंटेंट मॉडरेशन के नाम पर मनमाने फैसले लेती हैं। उन्होंने कहा कि यदि मेटा सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता है, तो सरकार आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर पुनर्विचार कर सकती है।

क्या है सेफ हार्बर प्रोटेक्शन?

आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत इंटरनेट आधारित मध्यस्थ (Intermediaries) जैसे सोशल मीडिया कंपनियों को "सेफ हार्बर प्रोटेक्शन" मिलता है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी उपयोगकर्ता द्वारा प्लेटफॉर्म पर कोई आपत्तिजनक, गलत या गैर-कानूनी सामग्री पोस्ट की जाती है, तो उसके लिए सीधे कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।

हालांकि, यह सुरक्षा कुछ शर्तों के साथ मिलती है। यदि सरकार या सक्षम न्यायालय किसी सामग्री को हटाने का आदेश देता है और कंपनी समय पर कार्रवाई नहीं करती, तो यह सुरक्षा समाप्त हो सकती है। यही कानूनी प्रावधान फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (पूर्व ट्विटर), गूगल, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, जियो और एयरटेल जैसे कई डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी लागू होता है। यदि किसी कंपनी का सेफ हार्बर प्रोटेक्शन समाप्त हो जाए, तो उसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री के लिए सीधे कानूनी जिम्मेदारी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक एवं दीवानी कार्रवाई भी संभव हो सकती है।

मेटा ने दी तकनीकी त्रुटि की सफाई

वीडियो हटाए जाने के बाद मेटा ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो किसी नीति के उल्लंघन के कारण नहीं हटाया गया था। कंपनी के अनुसार यह पूरी तरह एक तकनीकी समस्या थी, जिसकी पहचान होने के बाद वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया गया। हालांकि, संसदीय समिति इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रही है। समिति का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण सार्वजनिक संचार से जुड़े कंटेंट के साथ हुई इस तरह की घटना की विस्तृत जांच आवश्यक है।

मेटा इंडिया के अधिकारियों पर एफआईआर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास सहित कई सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत के आधार पर दर्ज इन मामलों में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और कथित रूप से मॉर्फ्ड वीडियो प्रसारित किए गए।

पुलिस ने अरुण श्रीनिवास को दोनों मामलों में सह-आरोपी बनाया है। साथ ही उन सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है जिन्होंने संबंधित वीडियो को साझा किया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित एआई आधारित मॉर्फ्ड वीडियो सबसे पहले किसने बनाया, किसने अपलोड किया और किन माध्यमों से उसे वायरल किया गया।

मेटा की ग्लोबल टीम से होगी पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, सरकार अब मेटा की वैश्विक टीम से भी विस्तृत पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। अगले सप्ताह कंपनी की ग्लोबल टीम के दिल्ली आने की संभावना है। इस दौरान उनसे कंटेंट मॉडरेशन नीति, एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली, फर्जी सामग्री की पहचान और उसे रोकने के लिए अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों पर सवाल पूछे जाएंगे। सरकार विशेष रूप से यह जानना चाहती है कि क्या एल्गोरिदम किसी प्रकार का पक्षपात करता है, किन आधारों पर कंटेंट हटाया जाता है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में सोशल मीडिया कंपनियां किस तरह की जिम्मेदारी निभाती हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही पर फिर छिड़ी बहस

प्रधानमंत्री का वीडियो हटने की घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की कानूनी जिम्मेदारियों पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। सरकार पहले भी कई बार सोशल मीडिया कंपनियों से भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करने और स्थानीय नियमों के अनुरूप काम करने की अपेक्षा जता चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सेफ हार्बर प्रोटेक्शन जैसे प्रावधानों पर सख्ती बढ़ती है, तो भारत में काम कर रही वैश्विक टेक कंपनियों के लिए कानूनी और परिचालन संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। वहीं, कंपनियों का कहना है कि अरबों पोस्ट और वीडियो के बीच तकनीकी त्रुटियों की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं की जा सकती, लेकिन ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए लगातार सिस्टम में सुधार किया जा रहा है।

फिलहाल संसदीय समिति के कड़े रुख, हैदराबाद पुलिस की जांच और मेटा की संभावित पूछताछ के बीच यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार इस मामले में केवल चेतावनी तक सीमित रहती है या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही तय करने के लिए कोई बड़ा नीतिगत या कानूनी कदम उठाती है।

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