AI का उपयोग अब पढ़ाई, ऑफिस और सॉफ्टवेयर से जुड़े कामों तक ही सीमित नहीं रह गया...
महाकाल मंदिर के बाहर खोई चप्पल ढूंढने के लिए चैट जीपीटी की ली मदद !
उज्जैन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब पढ़ाई, ऑफिस और सॉफ्टवेयर से जुड़े कामों तक ही सीमित नहीं रह गया है। लोग रोजमर्रा की छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी AI टूल्स का सहारा लेने लगे हैं। इसका एक दिलचस्प उदाहरण मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के बाहर देखने को मिला, जहां एक श्रद्धालु ने अपनी खोई हुई चप्पल की जोड़ी तलाशने के लिए चैट जीपीटी की मदद ली।
जानकारी के अनुसार, गोवा निवासी शुभांग बोरेकर महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। दर्शन के बाद जब वे मंदिर से बाहर निकले तो चप्पल स्टैंड के आसपास बड़ी संख्या में जूते-चप्पल रखे हुए थे। भीड़ और एक जैसी दिखाई देने वाली कई चप्पलों के बीच उन्हें अपनी चप्पल की जोड़ी पहचानने में परेशानी होने लगी। काफी देर तक तलाश करने के बावजूद जब उन्हें अपनी चप्पल नहीं मिली तो उन्होंने अलग तरीके से मदद लेने का फैसला किया। उन्होंने चप्पल की पहचान करने के लिए चैट जीपीटी का सहारा लिया। AI की मदद से उन्होंने आसपास रखी चप्पलों में अपनी जोड़ी तलाशने की कोशिश की।
यह घटना इस बात का उदाहरण भी है कि AI तकनीक किस तरह लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं में उपयोगी साबित हो सकती है। जहां एक ओर AI का इस्तेमाल पढ़ाई, सॉफ्टवेयर, दफ्तर के काम और जानकारी जुटाने में तेजी से बढ़ रहा है, वहीं अब लोग सामान्य परिस्थितियों में भी इसके नए-नए इस्तेमाल तलाश रहे हैं।
महाकाल मंदिर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में जूता-चप्पल स्टैंड पर एक जैसी दिखाई देने वाली चप्पलों के बीच अपनी जोड़ी पहचानना कई बार मुश्किल हो जाता है। शुभांग बोरेकर के साथ हुई यह घटना इसी परेशानी से जुड़ी एक अनोखी मिसाल के रूप में सामने आई है।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस धीरे-धीरे आम लोगों की दैनिक जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। पहले जहां AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से तकनीकी और पेशेवर कार्यों के लिए किया जाता था, वहीं अब लोग फोटो पहचानने, जानकारी हासिल करने और छोटी समस्याओं का समाधान खोजने जैसे कामों में भी इसकी सहायता ले रहे हैं।
महाकाल मंदिर के बाहर खोई चप्पल की तलाश में चैट जीपीटी की मदद लेने का यह मामला सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि तकनीक के इस तरह के व्यावहारिक इस्तेमाल का उदाहरण आमतौर पर देखने को कम मिलता है।



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