G News 24 : सिस्टम की लापरवाही के कारण पिता की गोद में युवक की तड़पते हुए चली गई जान !

 एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से युवक की हुई मौत...

सिस्टम की लापरवाही के कारण पिता की गोद में युवक की तड़पते हुए चली गई जान !

मंडला। मंडला जिले में एक पिता अपने 21 वर्षीय बेटे को तड़प-तड़पकर दम तोड़ते हुए सिर्फ देखते रह गए। परिवार का आरोप है कि सरकारी एंबुलेंस से अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गई, जिससे बेटे की मौत हो गई। इस घटना के बाद लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है

सरकारी 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने के कथित मामले में 21 वर्षीय युवक की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए जा रहे युवक की रास्ते में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर बीच रास्ते में खाली हो गया, जिसके बाद युवक पिता की गोद में तड़पता रहा और समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने से उसने दम तोड़ दिया। घटना का वीडियो और परिजनों की पीड़ा सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गरमा गया है।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा आम जनता को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जाती है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

एक घंटे की देरी और रास्ते में खत्म हुई ऑक्सीजन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंडला जिले के अजीत बरया की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी। आरोप है कि एंबुलेंस निर्धारित समय से करीब एक घंटे की देरी से पहुंची। इसके बाद युवक को जिला अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया। परिजनों का कहना है कि युवक लगातार सांस लेने के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो सकी और उसने पिता की गोद में ही अंतिम सांस ली। घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों ने सवाल उठाए कि यदि एंबुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवा में भी पर्याप्त ऑक्सीजन और आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं होंगे तो मरीजों की जान कैसे बचाई जाएगी।

कलेक्टर ने गठित की चार सदस्यीय जांच समिति

घटना के बाद मंडला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह एंबुलेंस की स्थिति, ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता, उपकरणों की कार्यक्षमता, कॉल रिस्पॉन्स टाइम और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या एंबुलेंस संचालक की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विधायक नारायण सिंह पट्टा ने एफआईआर की मांग उठाई

बिछिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण सिंह पट्टा ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए मंडला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने 'जय अम्बे एम्बुलेंस सर्विस' के संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। विधायक ने यह भी कहा कि जिले में संचालित सभी एंबुलेंसों की तकनीकी फिटनेस, ऑक्सीजन सिलेंडर, मेडिकल उपकरणों और आपातकालीन सुविधाओं की व्यापक जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही उन्होंने मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा और आवश्यक सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

घटना को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर घटना का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि ऑक्सीजन जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में युवक की मौत होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है और सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है। सिंघार ने स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग भी की।

डिप्टी सीएम का आश्वासन

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज की जान बचाना स्वास्थ्य व्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि कहीं भी लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एंबुलेंस सेवा में ऑक्सीजन, जीवनरक्षक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित रहनी चाहिए। नियमित निरीक्षण और उपकरणों की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि युवक की मौत केवल तकनीकी खराबी का परिणाम थी या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का मामला। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और एंबुलेंस संचालक पर कड़ी कार्रवाई की संभावना है।

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