सौरमंडल के बाहर बीटा पिक्टोरिस b नाम के ग्रह से पहली बार मिले अनोखे रेडियो सिग्नल...
पहली बार अंतरिक्ष से आया रहस्यमयी रेडियो सिग्नल,एलियंस का मिल गया ठिकाना !
हार्वर्ड और ओरेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मीरकैट टेलीस्कोप से इस रहस्यमयी सिग्नल को खोज निकाला है. जानिए क्या यह एलियंस का मैसेज है या इसके पीछे छिपा है कोई वैज्ञानिक राज.रात में जब आप आसमान की तरफ देखते हैं तो क्या कभी दिमाग में यह ख्याल आता है कि इस इतनी बड़ी दुनिया में हम अकेले हैं.
अगर हां, तो यह खबर आपके होश उड़ाने के लिए काफी है. वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौरमंडल से बहुत दूर मौजूद एक विशाल Planet से आते हुए अनोखे Radio Signal पकड़े हैं. इस न्यूज के आते ही सोशल मीडिया पर एलियंस की चर्चा शुरू हो गई है. लेकिन क्या सच में कोई एलियन हमसे बात करने की कोशिश कर रहा है. या फिर स्पेस में कोई और ही सीन चल रहा है. चलिए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं इस पूरी स्टोरी को.
सौरमंडल के पार से आई एक रहस्यमयी आवाज
हमारी पृथ्वी से बहुत दूर अंतरिक्ष के काले अंधेरे में एक ऐसी हलचल हुई है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान खींच लिया है. Harvard & Smithsonian Center for Astrophysics और University of Oregon के रिसर्चर्स ने मिलकर एक कमाल की खोज की है. उन्होंने हमारे सौरमंडल के बाहर स्थित एक एक्सोप्लैनेट से लगातार आ रहे रेडियो सिग्नल को डिटेक्ट किया है. यह पहला मौका है जब वैज्ञानिकों ने किसी ग्रह से सीधे आ रही रेडियो तरंगों को इतने सटीक तरीके से पकड़ा है. इससे पहले जब भी ऐसी तरंगे आती थीं, तो यह पता लगाना मुश्किल होता था कि यह किसी तारे से आ रही हैं या उसके चक्कर काटने वाले ग्रह से.
जिस ग्रह से यह सिग्नल आ रहे हैं, उसका नाम Beta Pictoris b है
जिस ग्रह से यह सिग्नल आ रहे हैं, उसका नाम Beta Pictoris b है. यह ग्रह हमारी पृथ्वी से लगभग 63 Light-years की दूरी पर मौजूद है. यह ग्रह एक बहुत बड़े तारे का चक्कर लगाता है. अगर इसके साइज की बात करें तो यह हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह Jupiter से भी करीब 11.7 गुना ज्यादा भारी है. NASA की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ग्रह की खोज साल 2008 में ही कर ली गई थी. यह अपने तारे का एक चक्कर पूरा करने में लगभग 23.6 साल का लंबा समय लेता है.
क्या यह किसी एलियन का भेजा हुआ मैसेज है
जैसे ही यह खबर फैली कि स्पेस से सिग्नल मिले हैं, लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आया कि क्या एलियंस हमसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. खासकर वो यूथ जो sci-fi फिल्मों और एलियंस की कहानियों के शौकीन हैं, वे काफी एक्साइटेड हो गए. लेकिन वैज्ञानिकों ने इस बात को एकदम क्लियर कर दिया है. यह कोई एलियन मैसेज नहीं है. तो फिर यह रेडियो वेव्स आ कहां से रही हैं. इसका जवाब वैज्ञानिकों ने बहुत ही सिंपल तरीके से दिया है.
ग्रह के एटमॉस्फियर में चल रहा है बड़ा खेल
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रेडियो सिग्नल इस ग्रह पर होने वाले विशालकाय Aurora की वजह से पैदा हो रहे हैं. जैसा कि आपने अर्थ के नार्थ और साउथ पोल पर हरी-नीली रोशनी का डांस देखा होगा, जिसे Northern Lights कहा जाता है, ठीक वैसा ही नजारा इस ग्रह पर भी देखने को मिल रहा है. लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि Beta Pictoris b पर यह अरोरा पृथ्वी के मुकाबले करोड़ों गुना ज्यादा विशाल और ताकतवर है. स्पेस से आने वाले हाई-एनर्जी पार्टिकल्स जब इस ग्रह की मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं, तो बहुत तेज रेडियो एनर्जी निकलती है.
सुपरफास्ट स्पीड से रोटेट करता है यह प्लैनेट
Beta Pictoris b ग्रह की एक और खास बात यह है कि यह बहुत तेजी से अपनी धुरी पर घूमता है. जहां हमारी पृथ्वी को एक रोटेशन पूरा करने में 24 घंटे लगते हैं, वहीं यह विशाल ग्रह मात्र 8 से 9 घंटे में अपना एक चक्कर पूरा कर लेता है. इतनी तेज स्पीड से घूमने की वजह से इसके अंदर बहुत मजबूत इलेक्ट्रिक करंट बनता है. यही करंट लगातार रेडियो तरंगों को जन्म देता है, जिन्हें पृथ्वी पर लगे टेलीस्कोप ने कैच कर लिया है.
साउथ अफ्रीका के पावरफुल टेलीस्कोप का कमाल
वैज्ञानिक सालों से इस स्टार सिस्टम के आसपास से आ रही रेडियो एक्टिविटी को नोटिस कर रहे थे, लेकिन वे पक्के तौर पर नहीं कह पा रहे थे कि सिग्नल का असली सोर्स क्या है. इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए रिसर्चर्स ने साउथ अफ्रीका में बने बेहद शक्तिशाली MeerKAT Radio Telescope Array का इस्तेमाल किया. इस टेलीस्कोप की नजर इतनी तेज है कि इसने तारे के बैकग्राउंड नॉइज़ को अलग कर दिया और सीधे प्लैनेट से आ रही छोटी-छोटी बर्स्ट वाली रेडियो तरंगों को आसानी से आइसोलेट कर लिया.
पृथ्वी से 2500 गुना ज्यादा स्ट्रॉन्ग मैग्नेटिक फील्ड
इस खोज से वैज्ञानिकों को जो सबसे बड़ा डेटा मिला है, वो है इस ग्रह की मैग्नेटिक फील्ड की ताकत. शुरुआती कैलकुलेशन से पता चला है कि Beta Pictoris b का मैग्नेटिक फील्ड पृथ्वी के मुकाबले करीब 2,500 गुना ज्यादा मजबूत है. किसी भी ग्रह पर लाइफ की पॉसिबिलिटी या उसके एटमॉस्फियर को सेफ रखने के लिए मजबूत मैग्नेटिक फील्ड का होना बेहद जरूरी होता है. इस खोज से पहली बार वैज्ञानिकों को किसी बाहरी ग्रह की मैग्नेटिक स्ट्रेंथ को सीधे मेज़र करने का मौका मिला है.




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